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उत्तर प्रदेश

मानवाधिकारों को नए सिरे से परिभाषित करने की ज़रूरतः चितरंजन सिंह

PUCL sonbhadr

दुद्धी (सोनभद्र)। लोक स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन “पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल)” की सोनभद्र इकाई के वार्षिक सम्मेलन में मानवाधिकार को परिभाषित करने का मुद्दा उठा। स्थानीय इच्छितापुरम् कॉलोनी स्थित एक गेस्ट हाउस में शनिवार को आयोजित सम्मेलन में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने कहा कि सरकार ने आज तक मानवाधिकार को परिभाषित नहीं किया है। इस वजह से मानव अधिकारों को लेकर हमेशा संशय बना रहता है। मनुष्य के लिए जो जरूरत की चीजें हैं, सत्ता ने लोगों को उससे दूर रखा है। देश और प्रदेश में बड़े पैमाने पर मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है। इसलिए मानवाधिकार को नए सिरे से परिभाषित किए जाने की जरूरत है।

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दुद्धी (सोनभद्र)। लोक स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन “पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल)” की सोनभद्र इकाई के वार्षिक सम्मेलन में मानवाधिकार को परिभाषित करने का मुद्दा उठा। स्थानीय इच्छितापुरम् कॉलोनी स्थित एक गेस्ट हाउस में शनिवार को आयोजित सम्मेलन में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने कहा कि सरकार ने आज तक मानवाधिकार को परिभाषित नहीं किया है। इस वजह से मानव अधिकारों को लेकर हमेशा संशय बना रहता है। मनुष्य के लिए जो जरूरत की चीजें हैं, सत्ता ने लोगों को उससे दूर रखा है। देश और प्रदेश में बड़े पैमाने पर मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है। इसलिए मानवाधिकार को नए सिरे से परिभाषित किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने देश में किसानों और गरीबों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में साढ़े चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। करीब सवा-एक लाख लोगों की मौत हर साल भूख से हो रही है। इसलिए विकास के मॉडल को मानवाधिकार के नजरिए से भी देखने की जरूरत है। हमें मानवाधिकार के क्षेत्र को और अधिक विकसित करना पड़ेगा। वहीं, संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि भारतीय बाजार विदेशियों के लिए खोला जाना चिंताजनक है। इसने भारतीय बाजार को तबाह कर दिया है जिससे मानवाधिकारों का उल्लंघन बड़े पैमाने पर हो रहा है।

पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव और अधिवक्ता विकास शाक्य ने संगठन का परिचय देते हुए कहा कि मानवाधिकार आयोग स्वतंत्र रूप से अपने फैसले को लागू नहीं करा सकता है और ना ही वह किसी मामले की जांच करा सकता है। उसे अपने फैसले को लागू कराने के लिए सरकारी एजेंसियों और निर्वाचित सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। इस वजह से लोगों के मानवाधिकार उल्लंघन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वास्तव में मानवाधिकार उल्लंघन के लिए एक स्वतंत्र जांच एजेंसी होनी चाहिए और कानून में यह प्रावधान होना चाहिए कि वह अपने फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करा सके।

पीयूसीएल की दुद्धी इकाई के संरक्षक डॉ. लवकुश प्रजापति ने मानवाधिकार के साथ-साथ मनुष्य की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर भी चिंतन करना चाहिए कि मनुष्य की जो जरूरते हैं, उसके आधार पर मानवाधिकार को परिभाषित किया जाए। पूर्व छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता विजय शंकर यादव ने कहा कि मानवाधिकारों की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए भारत के प्रत्येक नागरिक को जागरूक होना पड़ेगा। जब तक हर नागरिक अपने अधिकारों के लिए लड़ने का जज्बा नहीं बना लेता, तब तक सही मायने में मानव अधिकारों को सुरक्षा नहीं मिल पाएगा। इसके लिए अभियान चलाने की जरूरत है।

आदिवासी बहुल सोनभद्र से प्रकाशित हिन्दी साप्ताहिक समाचार-पत्र “वनांचल एक्सप्रेस” के संपादक शिव दास प्रजापति ने कहा कि सत्ता में काबिज सरकारें और उनकी पुलिस संगठित रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं। देश और प्रदेश में फर्जी मुठभेड़ों में खुलेआम बेगुनाहों का कत्ल किया जा रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने इन कत्लेआम को अंजाम देने के लिए अपना तरीका भी बदल दिया। वे अब एक सोची-समझी साजिश के तहत खनिज संपदा से परिपूर्ण इलाकों में अवैध खनन को अंजाम दे रही हैं। वहां खुलेआम मजदूरों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है जिससे वे हर दिन हजारों की संख्या में मारे जा रहे हैं।

उन्होने कहा कि सोनभद्र-मिर्जापुर समेत प्रदेश के विभिन्न इलाकों में हुए खनन हादसे इस बात के गवाह हैं। उसमें मारे गए लोगों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है क्योंकि सत्ता द्वारा मामले की जांच के लिए बैठाई गई जांच कमेटी सालों बीत जाने के बाद भी अपनी रिपोर्ट शासन-प्रशासन को नहीं सौंप रही है। 27 फरवरी, 2012 को बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुआ खनन हादसा इसका जीवंत उदाहरण है जिसकी जांच रिपोर्ट ढाई सालों बाद भी राज्य सरकार को नहीं सौंपी गई है। जबकि सोनभद्र में अवैध खनन का मामला उच्चतम न्यायालय में भी उठ चुका है और उसने इसे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कराने का आदेश दिया है।

सम्मेलन को डॉ. एके गुप्ता, डॉ. तेजबल वैद्य, शोहराब खान, प्रभु सिंह एडवोकेट, प्रमोद चौबे, देवमणि, फौजदार सिंह परस्ते, कमलेश सिंह आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह, उपाध्यक्ष अजित सिंह और पूर्व छात्र नेता विजय शंकर यादव को उनके संघर्षों के लिए अंगवस्त्रम् भेंटकर सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन के द्वितीय पारी में सर्वसम्मति से अधिवक्ता महेन्द्र सिंह कुशवाहा को पीयूसीएल का नया जिलाध्यक्ष चुना गया। वहीं अभिषेक विश्वकर्मा को जिला संगठन सचिव, जितेन्द्र चंद्रवंशी, गोविंद अग्रहरी और संजय गुप्ता को जिला उपाध्यक्ष चुना गया। निवर्तमान जिलाध्यक्ष श्यामाचरण गिरी ने आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया जबकि कार्यक्रम का संचालन संगठन के दुद्धी इकाई के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार चंद्रवंशी ने किया। इस मौके पर सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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1 Comment

1 Comment

  1. शमीम इकबाल

    September 6, 2014 at 11:55 am

    अभी भी मानवाधिकार के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है /हर जगह नागरिक दमन की व्यवस्था है /

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