आखिर कौन सच बोल रहा है ईडी या मिशेल?

अगस्ता वेस्टलैंड डील वास्तव में राजनीति के मैदान में फुटबाल बन गया है। एक तरफ जहाँ प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी इसकी आड़ में गाँधी परिवार और अहमद पटेल को लपेटने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं वहीं कांग्रेस आरोप लगा रही है कि आम चुनावों में हार तय देख जनता का ध्यान भटकाने का मोदी सरकार का यह चुनावी हथकंडा है।

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राफेल डील पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा छोड़ा गया तीर कि चौकीदार चोर है एक ओर जहाँ यह जनमानस के दिल में बैठ गया है वहीं इससे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी बहुत आहत हैं, क्योंकि वे अभी तक इस आरोप का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।दूसरे शब्दों में कहें तो संदेह से परे जवाब मोदी नहीं दे सके हैं।मोदी सरकार बनने के बाद सरकार की हर असफलता,हर गडबडी का जवाब नेहरु,इंदिरा गाँधी के कार्यकाल या फिर यूपीए के कार्यकाल से जोडकर दिया जाता रहा है।इसलिए इस बार भी पहले मनी लान्डरिंग के आरोप में प्रियंका वाड्रा के पति राबर्ट वाड्रा को जेल भेजने की कोशिश की गयी ,चिदम्बरम परिवार को घेरने की कोशिश की गयी पर जब अदालत के हस्तक्षेप के कारण इसमें सफलता नहीं मिली तो अगस्ता मामले में अहमद पटेल और गाँधी परिवार को घसीटने की कोशिश की जा रही है।इनमें एक आश्चर्यजनक समानता यह है कि सभी मामलों में ईडी मुख्य किरदार है।इससे यह दिखाने की सरकार की कोशिश है कि मैं ही नहीं हमाम में सभी नंगे हैं।वास्तव में चुनाव के दौरान मोदी सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए ईडी झूठ गढ़ने का काम कर रही है और सीबीआई की तरह इसे भी सरकारी तोते की संज्ञा से नवाज़ाजा रहा है।

दरअसल ईडी की ओर से दिल्ली की विशेष कोर्ट में अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को लेकर पेश किए गए पूरक आरोप पत्र में रिश्वत लेने के वालों के नामों का खुलासा किया गया है।इसके बाद विवाद शुरू हो गया है। ईडी ने गुरुवार को चार्जशीट फाइल कर दावा किया था कि क्रिश्चियन मिशेल ने एपी का मतलब अहमद पटेल और एफएएम का मतलब फैमिली बताया था। इसके जवाब में मिशेल ने दिल्ली के एक कोर्ट में कहा कि उसने पूछताछ के दौरान डील से जुड़े किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं लिया है। इन्हीं खबरों के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार की अपनी सभा में कहा कि बिचौलिए ने एपी और फैमिली की नाम लिया है। मोदी ने कहा कि आप मुझे बताइए कि अहमद पटेल किस फैमिली के करीब हैं। एक जमाना था जब एक विशेष परिवार की एयरपोर्ट पर तलाशी भी नहीं ली जाती थी। लोग उन्हें सैल्यूट करते थे, अभी फिलहाल वह बेल पर हैं। वह खुद को जेल जाने से बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

क्रिश्चियन मिशेल के वकील अल्जो के जोसेफ ने कोर्ट में हलफनामा दिया है। इस हलफनामा में कहागया है कि ईडी ने अपनी चार्जीशट में यूपीए के नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स को फंसाने की कोशिश की है। इतना ही नहीं चार्जशीट में यूपीए नेताओं को घूस देने की भी बात कही गई, जबकि मिशेल ने किसी का भी नाम नहीं लिया है। मिशेल ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक एजेंडे के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। मिशेल के वकील अल्जो के जोसेफ ने अपनी याचिका में यह भी पूछा कि कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर एक्शन लेने से पहले ही यह मीडिया में कैसे लीक हो गया। इसके बाद स्पेशल जज अरविंद कुमार ने ईडी को नोटिस जारी करके शनिवार तक जवाब माँगा था ।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से शनिवार को अगस्ता वेस्टलैंड मामले के पूरक आरोप-पत्र के मीडिया में लीक होने की जांच की मांग की है। ईडी ने कुछ समाचार संगठनों को नोटिस जारी करने की भी मांग की ताकि वह बताएं कि उन्हें आरोप-पत्र की प्रति कहां से मिली। इसके अलावा अदालत ने क्रिश्चियन मिशेल के व्यापारिक साझेदार एवं बिचौलिए डेविड निगेल जॉन सिम्स को मामले में आरोपी के तौर पर तलब किया। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए कहा कि मिशेल की याचिका के जवाब में ईडी अपना पक्ष रखे। मिशेल ने बताया कि पूछताछ के दौरान मैंने किसी का नाम नहीं लिया। कोर्ट ने भी इन दस्तावेजों पर संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में यह दस्तावेज मीडिया में पहुंचकर माहौल को सनसनीखेज कैसे बना रहे हैं? क्या ईडी ने चार्जशीट को लीक किया? कोर्ट चार्जशीट कॉपी के लीक होने के मामले पर 11 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

क्या है अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
साल 2010 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने इंडियन एयरफोर्स के लिए 12 वीवीआईपी हेलि‍कॉप्टर खरीदने के लिए इटैलियन कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड से सौदा किया था। यह सौदा 3600 करोड़ में हुआ था। सौदे में 360 करोड़ के कमीशन के भुगतान के आरोपों के बाद साल 2014 में केन्द्र सरकार ने इस सौदे को रद्द कर दिया था। रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इस मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख समेत कई अधिकारियों का नाम सामने आया था।

मामला सामने आने के बाद से ही इस सौदे में बिचौलियों की भूमिका में रहने वाले लोगों की सीबीआई को तलाश थी। क्रिश्चियन मिशेल, गुइदो हाश्के और कार्लो गेरेसा पर इस सौदे में बिचौलिया होने के आरोप लगे थे। भारत सरकार तभी से इन तीनों को प्रत्यर्पित करने का प्रयास कर रही थी। लंबी कोशिशों के बाद अब जाकर तीन में से एक बिचौलिया भारत सरकार, यूएई से प्रत्यर्पित करने में कामयाब हुई है।

इटली की कोर्ट ने क्लीन चिट दिया

गौरतलब है कि इटली की कोर्ट ने आठ जनवरी 2018 को अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े दो पूर्ववर्ती अधिकारियों को इस आधार पर बरी कर दिया था, कि इस सौदे में कुछ गलत नहीं हुआ है। इसी तरह से मिलान की एक अदालत ने भी 17 सितंबर 2018 के अपने फैसले में साफ किया था, कि इसमें भारतीय अधिकारी को कोई रिश्वत नहीं दी गई और सौदे में कुछ भी गलत नहीं हुआ। इस मामले में केंद्र सरकार भी पक्षकार थी, यदि उसे लग रहा था कि गलत हुआ, तो फैसला आने के बाद फिर इसे लेकर अपील क्यों नहीं की गई।

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
अगस्ता वेस्टलैंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूरक आरोप पत्र को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि आम चुनावों में हार तय देख जनता का ध्यान भटकाने का सरकार का यह चुनावी हथकंडा है। एक अप्रमाणित पेज के जरिए लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि चुनाव के दौरान मोदी सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए ईडी झूठे ढकोसले को गढ़ने का काम कर रही है। बावजूद इसके कुछ होने वाला नहीं है। मोदी सरकार का जाना तय है। ईडी के यह आरोप एक अप्रमाणित पेज के आधार पर चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए लीक कराए गए है।

लेखक जेपी सिंह प्रयागराज के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

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