‘द स्टेट्समैन’ के धाकड़ संपादक रहे सच्चिदानंद सहाय के छोटे बेटे का कोरोना से निधन, मझले बेटे और बेटी अस्पताल में जूझ रहे

धनंजय सिंह-

स्व. सच्चिदान्द सहाय जी ‘द स्टेट्समैन’ के संपादक थे. पृथ्वीराज रोड पर अखबार ने बंगला दिया था. वो इलाका आज भी राजधानी का सबसे महँगा इलाका है. कहा करते थे कि एक जर्नलिस्ट के पास कलम की ताकत होती है, उसके सिवाय कुछ भी नहीं.

वो ऐसे सम्पादक थे जो इंदिरा जी को कहने की क्षमता रखते थे कि ‘आपके साथ विदेश दौरा कवर करने किस रिपोर्टर को जाना है, यह मैं तय करूँगा, आपका दफ्तर नहीं’! आज कितने पत्रकार, सम्पादक ऐसा कहने की सामर्थ्य रखते हैं?

हाँ इंदिरा जी भी ऐसी कड़ी बात का बुरा नहीं मानती थीं.

स्व. सच्चिदानंद जी की याद आज आ गयी और पोस्ट कर दिया ताकि दुनिया को पता चले कि ऐसे भी सम्पादक हुए हैं इस देश में.

तमाम अच्छी यादें हैं उस परिवार के साथ. पर अब बुरी खबरें आ रही हैं.

आज उनके एक परिजन से शोक का सन्देश मिला. पूरा परिवार छिन्न-भिन्न हो चुका है.

कल सहाय जी के एक पुत्र चले गए. दूसरे बेटे और बेटी अस्पताल में संघर्ष कर रहे हैं. इन तीनों लोगों ने पचास प्लस होने के बावजूद वैक्सीन नहीं ली थी.

बड़े बेटे तारा शंकर सहाय की निधन कई साल पहले हो चुका है… परसों छोटे बेटे का निधन हुआ. बीच वाले मुन्ना जी और बेटी आभा दी बीमार हैं. ये दोनों बेटे तलाकशुदा हैं. दीदी ने विवाह नहीं किया था माँ-पिताजी की देखभाल के लिए. कुछ साल पहले पटपड़गंज के मिथिला अपार्टमेंट में घर बेच गाजियाबाद शिफ्ट हो गए थे लोग.

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