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सहारा समूह न कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित रह गया है और न निवेशकों के लिए, जानिए वजह

जानिये क्यों रोका गया है क्यू शॉप का भुगतान? अपने कार्यकर्ताओं को परिवार का सदस्य मानने वाली सहारा इंडिया कंपनी का एक ऐसा सच जो आपको झकझोर के रख देगा। कार्यकर्ता तो संस्था के लिए अपना सर्वस्व दाव पर लगा रहे हैं, लेकिन संस्था अपने कार्यकर्ताओं के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। मुख्यालय के रिजाइन किये एक स्टॉफ ने बताया है कि संस्था ने प्लानिंग के तहत Q Shop की एडवाइस रोकी है क्योंकि कार्यकर्ताओं और स्टॉफ ने लगभग 60% क्यू शॉप अपने नाम से ट्रान्सफर ले लिया है।

कार्यकर्ताओं ने संस्था की गुडविल बचाने हेतु अपने पास से जमाकर्ताओं को भुगतान दे दिया। क्यू शॉप अपने नाम से लिया पर भुगतान का समय होने पर कंपनी ने एडवाइस रोक दी ताकि स्टॉफ और कार्यकर्ता अपना पैसा निकाल न सकें और राशि फँसी रहे। सहारा कंपनी अपने कार्यकर्ताओं को हर तरफ से मुश्किल में डाल रही है। अब एक और प्लान तैयार हो रहा है जिसके तहत कार्यकर्ताओं की स्वयं औऱ परिवार के सदस्यों के नाम से जो फिक्स डिपॉजिट है, उनको मिसमैच एडवाइस में बताकर लेट किया जाएगा।

कंपनी एक वॉलेट सिस्टम भी ला रही है जिसमे 33% राशि कार्यकर्ता उपयोग नहीं कर सकेगा। सहारा प्रबंधन हर कार्यकर्ता और स्टाफ के स्वयं और उसके परिवार के सदस्यों के नाम से डिपॉजिट राशि का एवं Name to Name Transfer QShop accounts और Branch to Branch transfer accounts डेटा तैयार कर रहा है। वर्तमान में डिपॉज़िट हो रही सभी राशि को सोसाइटी में कंट्रीब्यूशन अमाउंट के रूप में जमा किया जा रहा है जिससे कोई भी सदस्य (आप की भाषा मे डिपॉजिटर) भविष्य में जमा राशि पर कोई भी कानूनी दावा नहीं कर सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट में राशि जानबूझकर जमा नहीं कराई जा रही है क्योंकि राशि जमा हो जाएगी तो प्रापर्टी बेचने का दबाव आएगा और कार्यकर्ता भुगतान के लिए कहेगा। कंपनी 2020 तक सभी जमा राशि को कॉन्ट्रिब्यूशन अमाउंट में कन्वर्ट कर देगी। कंपनी द्वारा यह घोषणा कर दी गई है कि उनके यहाँ कोई भी कमीशन एजेंट नहीं है। इसके तहत अब कोई भी TDS नहीं काटा जा रहा है। सभी को सोसाइटी का मेंबर बताया जा रहा है। उन्हें कमीशन नहीं दिया जा रहा है। सोसाइटी उन्हें एडुकेटर बताकर उनसे एक्सपेनसेस बिल लेगी और बिलों का भुगतान करेगी।

कार्यकर्ताओं के खून पसीने की कमाई से फ्यूचर फण्ड काटा गया है जिसका सारा डेटा डिलीट कर दिया गया है। किसी भी सोसाइटी में सुब्रत राय और उनके परिवार का कोई सदस्य डायरेक्टर नहीं है। सहारा प्रबंधन 2020 तक अपनी सारी प्लानिंग योजनाबद्ध तरीके से कर रहा है। नोएडा कार्यालय में 150 एडवोकेटस की टीम कार्य कर रही है ताकि प्रबंधन हर तरह के लीगल मैटर से बचा रहे और कार्यकर्ता फँसा रहे. कब तक हम प्रबंधन का झूठ मानते रहेंगे और परेशान होते रहेंगे?

कहीं तो रुको… कभी तो रुको… कंपनी अपना लक्ष्य 2020 तक पूरा कर रही है। विशेष रणनीति के तहत प्रबंधन हर ब्रांच को मात्र 30 से 36 लाख एक वर्ष में देगा और वो भी दादागिरी से 25% भुगतान और 75% को reinvestment करवाना होगा यानी कार्यकर्ताओं को यह एहसान जताया जाएगा कि हम फण्ड दे रहे हैं, पूरे भारत में बस आपको ही फण्ड मिल रहा है, बाकी जगह तो 1 रुपया भी फण्ड नहीं दिया जा रहा है, आप बहुत भाग्यशाली हो…

योजना के अनुसार 3 लाख देना है और 1 महीने का टाइम पास करना है फिर 4 लाख देना है और 1 महीना निकालना है। इसी तरह से स्टॉफ और कार्यकर्ताओं को फँसा के रखना है और 36 लाख में 1 वर्ष निकालना है। राशि इतनी कम और देरी से देना है कि कोई भी कार्यकर्ता अपनी स्वयं की राशि निकाल न सके। लिस्ट के अनुसार ही भुगतान होगा। स्टॉफ की सेलेरी 6 माह की पेंडिंग रखना है। रेंट, मिसलेनियस 5 माह का पेंडिंग रखना है। कार्यकर्ताओं को 3 से 4 माह में एक बार कमीशन देना है और एहसान जताना है कि सिर्फ आपको ही कमीशन दिया है, संस्था आपके बारे में बहुत सोच रही है।

मीटिंग में यह बताया जाएगा कि 3 से 4 माह में सब ठीक हो जाएगा। आपकी परेशानियां ख़त्म होने वाली हैं, आप लगे रहो.। edunguru और winds जैसी योजनाओं के सपने दिखाए जाएंगे और वर्ष 2019 को निकाला जाएगा. और 2020 में भी यही होगा। प्रबंधन को प्लानिंग के अनुसार ऐसे ही टाइम पास करना है और सारी डिपॉजिट राशि को कॉन्ट्रिब्यूशन अमाउंट में कन्वर्ट करना है क्योंकि कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में जमा राशि पर कोई भी कानूनी दावा नहीं किया जा सकता है। आपके साथ कुछ भी घटना हो, उससे उन्हें कोई मतलब नहीं। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस का बहाना लेकर यह चलता रहेगा और कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता ऐसे ही परेशान होता रहेगा… सोचो… कभी तो रुको… कहीं तो रुको…..!

सहारा समूह के एक एजेंट द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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