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सत्ता को चुनाव आयोग की परवाह नहीं, जमकर उड़ाई जा रही आचार संहिता की धज्जियां

यदि प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, नीति आयोग के अध्यक्ष तथा तमाम सरकारी विभाग चुनाव आचार संहिता की खुलकर धज्जियां उड़ायें तो क्या चुनाव आयोग इस परअंकुश लगा सकता है, क्या चुनाव आयोग इनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है? जवाब है नहीं।चुनाव आयोग पर देश में चुनाव करवाने की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है ।लेकिन 2019 आम चुनाव के पहले आदर्श आचार संहिता के इतने कथित उल्लंघन हुए हैं कि सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर आयोग कहां है और क्या उसका हाल किसी ऐसी अप्रभावी संस्था या बिना दांत के शेर जैसा तो नहीं है, जिसकी किसी को परवाह नहीं? चुनाव आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता/आचार संहिता) का मतलब है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है।

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग उम्मीदवार से अप्रसन्नता व्यक्त कर सकता है, उसकी निंदा (सेंशर) कर सकता है, और अगर मामला आपराधिक हो तो उचित अधिकारी से एफ़आईआर दर्ज करने को कह सकता है।लेकिन आज के राजनीतिक माहौल में जब चुनावी जीत के लिए कुछ भी करना कई जगह जायज़ बताया या माना जाता है, चुनाव आयुक्त के अप्रसन्नता जताने और निंदा करने से किसी को क्या फर्क पड़ता है?

चुनाव का बिगुल बज चूका है और तीसरे चरण के लिए नामंकन दाखिल हो रहे हैं। आदर्श आचार संहिता लागू है, नरेंद्र मोदी का महिमामंडन करने वाली एक फिल्म रिलीज़ के लिए तैयार है।31 मार्च को भाजपा की ओर से “प्रोपोगैंडा टीवी चैनल” नमो टीवी लांच किया गया लेकिन चैनल की कानूनी स्थिति, इसके लाइसेंस पर गंभीर सवाल हैं। केबल ऑपरेटर टाटा स्काई ने कहा आप इस चैनल को अपने चुने हुए चैनलों के ग्रुप से डिलीट भी नहीं कर सकते।

राजस्थान के चुरू में नरेंद्र मोदी की रैली में उनके पीछे पुलवामा में मारे गए लोगों की तस्वीरें थीं, जिससे मृत सैनिकों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल पर विवाद शुरू हो गया।पाकिस्तान में पकड़े गए भारतीय जवान अभिनंदन की तस्वीरों का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया गया।राजस्थान के राज्यपाल की कुर्सी पर बैठने वाले कल्याण सिंह ने किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता की भाषा बोलते हुए कहा, “हम सब चाहेंगे कि मोदी जी ही प्रधानमंत्री बनें।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक भाषण में ‘मोदी जी की सेना’ जैसे शब्दों का इस्तेमा मोदी सरकार के महकमे खुलेआम आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं ।
मोदी सरकार के कई विभागों ने आचार संहिता का उल्लंघन खुलेआम कर रहे हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने नाराजगी जताई है। साथ ही आयोग ने रेलवे, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नीति आयोग के उपाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।मोदी सरकार और बीजेपी सरेआम आचार संहिता का उल्लंघन कर रही है। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है और कई मामलों में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सबसे पहले बात करते है रेलवे और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की। जहां आचार संहिता लागू होने के बाद भी टिकटों पर अभी पीएम मोदी की तस्वीर मौजूद है। इसे लेकर चुनाव आयोग ने नाराजगी जताते हुए दोनों मंत्रालायों को खत लिखा है और पूछा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद अभी तक टिकटों पर तस्वीर क्यों मौजूद है।

आयोग ने रेल मंत्रालय और नागरिक उड्डयन को खत लिखकर पूछा है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी रेल टिकट से प्रधानमंत्री की तस्वीरें क्यों नहीं हटाई गई। इसके अलावा तस्वीर लगी हवाई यात्रा पास लोगों को क्यों जारी की गई। चुनाव आयोग ने दोनों मंत्रालयों से 3 दिन के अंदर जवाब देने को कहा है। 20 मार्च को तृणमूल ने इस बारे में चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

चुनाव आयोग ने बायोपिक फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के 4 निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि फिल्म को राजनैतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। इससे पहले चुनाव आयोग ने प्रचार के लिए फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ का पोस्टर प्रकाशित करने पर 20 मार्च को दो समाचार पत्रों को भी नोटिस जारी किया था। अब चुनाव आयोग ने इसी के तहत फिल्म के प्रोड्यूसर से जवाब मांगा गया है।

चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किए, चिट्ठियां लिखीं। चुनाव आयोग ने कल्याण सिंह को आचार संहिता भंग करने का दोषी माना और राष्ट्रपति कोविंद की चिट्ठी लिखी। चुनाव आयोग ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को ‘मोदीजी की सेना’ वाले बयान के लिए फटकार लगाई है। हालंकि उनपर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद योगी ने एक और विवादास्पद बयान दे दिया है जिसकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई है।वहीं ‘न्याय योजना’ पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार द्वारा दिए गए बयान को आयोग ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना है। आयोग ने उन्हें इस मामले में भविष्य में “सतर्कता” बरतने की नसीहत दी है।चुनाव आयोग ने किसी पर भी सख्त कार्रवाई नहीं की।

आचार संहिता?
चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है. आचार संहिता यानि चुनाव में पार्टियों और उम्मीदवार किस तरह व्यवहार करेंगे.राजनीतिक दलों से बातचीत और सहमति से ही आचार संहिता से जुड़ा दस्तावेज़ तैयार हुआ था । इसके इतिहास की शुरुआत 1960 से केरल के विधानसभा चुनाव से हुई, जहां पार्टियों और उम्मीदवारों ने तय किया कि वो किन नियमों का पालन करेंगे।

चुनावी आचार संहिता किसी कानून का हिस्सा नहीं है। हालांकि आदर्श आचार संहिता के कुछ प्रावधान आईपीसी की धारों के आधार पर भी लागू करवाए जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 1962 के आम चुनाव के बाद 1967 के लोक सभा और विधानसभा चुनावों में भी आचार संहिता का पालन हुआ और बाद में उसमें एक के बाद एक बातें जोड़ी गईं। चुनावी सुधार पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि आदर्श आचार संहिता को जनप्रतिनिधित्व कानून का हिस्सा बना दिया जाए, लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया गया।

चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर
वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर पूछा है “चुनाव आयोग (नरेंद्र) मोदी पर (कथित) प्रोपोगैंडा मूवी की इजाज़त देता है, उन्हें दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर एंटी सैटेलाइट मिसाइल पर चुनावी भाषण देने की इजाज़त देता है, उन्हें रेलवे के दुरुपयोग की इजाज़त देता है लेकिन रफ़ाल पर किताब पर पाबंदी लगा दी जाती है और उसकी कॉपीज़ को अपने कब्ज़े में ले लिया जाता है।” कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कटाक्ष किया है। सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, “क्या एमसीसी (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) अब बन गया है- मोदी कोड ऑफ कंडक्ट।” उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है “योगी आदित्यनाथ भारतीय सेना का अपमान करते हैं और चुनाव आयोग उन्हें ‘प्रेम पत्र’ लिखता है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष न्याय योजना को कोसते हैं,चुनाव आयोग कहता है ‘आगे से मत करें’।”

लेखक जेपी सिंह प्रयागराज के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=ieM6mxKHRqM
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