कविता कृष्णपल्लवी-
पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
शुक्रवार (29 मई) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की पत्नी शाकंभरी द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह-प्रथम की खंडपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने के लिए काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया। सत्यम वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Syed Farman Ahmad Naqvi ने अधिवक्ताओं शाश्वत आनंद, अंकुर आज़ाद और शशांक तिवारी के साथ अदालत में पक्ष रखा।
वर्मा की क़ानूनी टीम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हेबियस कॉर्पस याचिका में उनकी गिरफ़्तारी, हिरासत और वर्तमान न्यायिक अभिरक्षा की वैधता को चुनौती दी गई है। यह मामला पिछले महीने नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन और उसके बाद दर्ज किए गए आपराधिक मामलों से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि गिरफ़्तारी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तथा बाद की रिमांड और हिरासत संबंधी कार्यवाहियों की वैधता भी सवालों के घेरे में है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद इस मामले की सुनवाई पर क़ानूनी विशेषज्ञों, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और मीडिया संगठनों की विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी कठोर शक्तियों और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संबंधों से जुड़ा है।
ग़ौरतलब है कि सत्यम वर्मा को 17 अप्रैल को लखनऊ स्थित जनचेतना बुकस्टोर से गिरफ़्तार किया गया था। बाद में 14 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके और सामाजिक कार्यकर्ता Akriti Choudhary के खिलाफ National Security Act (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) की धाराएं भी लगा दी थीं।


