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रायबरेली के इस पत्रकार ने नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे हड़पे, सुनें आडियो

रायबरेली में सूरज यादव (उर्फ राज उर्फ प्रभु यादव) नामक पत्रकार पर आरोप है कि इसने एक युवक से नौकरी दिलाने के नाम पर साठ हजार रुपये वसूले. जब नौकरी नहीं दिला पाया तो युवक द्वारा पैसे मांगे जाने पर उसने दस पंद्रह हजार रुपये लौटाने के बाद अब फोन उठाना और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया है.

बताया जाता है कि सूरज यादव राष्ट्रीय सहारा अखबार से जुड़ा हुआ है. नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे हड़पने के एक पहले के मामले में आरोप लगने पर सहारा प्रबंधन ने इसे नौकरी से हटा दिया था. पर नेताओं की लाबिंग के जरिए ये दुबारा सहारा में एंट्री पाने में कामयाब हो गया. अब फिर से सूरज यादव नौकरी के नाम पर पैसे हड़पने का खेल खेलने लगा है.

पीड़ित युवक का नाम शिवम जायसवाल है. शिवम का कहना है कि सूरज यादव ने एनटीपीसी में असिस्टेंट मैनेजर के पद की जाब दिलाने के नाम पर साठ हजार रुपये लिए. जब जाब नहीं दिला पाया तो पैसे वापस मांगे. वह लौटाने में आनाकानी करता रहा और केवल आश्वासन देता रहा. पांच पांच हजार रुपये तीन बार दिए और अब न तो फोन उठाता है और न ही मैसेज का जवाब देता है. उसने वाट्सअप आदि पर ब्लाक कर दिया है. जब अब ये समझ में आ गया कि ये पैसे वापस नहीं करेगा तो हम लोगों को मीडिया के एक आदमी ने सलाह दी कि भड़ास को सारी जानकारी दो, वहां पर मीडियाकर्मियों की करतूतों के बारे में जानकारी प्रकाशित की जाती है. उसी के बाद हम लोगों ने भड़ास से संपर्क किया और सारे स्क्रीनशाट, आडियो भेज रहे हैं.

शिवम का कहना है कि वह गरीब परिवार से हैं. दस से पंद्रह हजार रुपये महीने की जाब करने वाले परिवार से वे बिलांग करते हैं. सूरज यादव को पैसे उधार मांग कर दिया गया. बहन की शादी मार्च महीने में है. सात आठ महीने हो गए पैसे मांगते मांगते लेकिन सूरज यादव लौटा ही नहीं रहा है.

देखें ये स्क्रीनशॉट-

ऐसी चर्चा है कि सूरज यादव रायबरेली में अकेला पत्रकार नहीं है जो ठगी का यह कार्य करता है. इस काम का पूरा एक गिरोह है जिसमें रायबरेली से लेकर लखनऊ-उन्नाव तक के कई पत्रकार शामिल हैं. कुछ एक टीवी के पत्रकार भी इसमें जुड़े हुए हैं. सूरज यादव बेरोजगार युवकों से डील कर उनके पैसे हड़पता है और पैसे का एक बड़ा हिस्सा दूसरे पत्रकारों को देता है जो कांट्रैक्ट पर नौकरियां लगवाने का काम करते हैं. कुछ एक अन्य पत्रकार भी यही काम करते हैं. यह रैकेट उच्च पदस्थ लोगों से संपर्क संबंध बनाकर खुद को अब तक बचता बचाता रहा है. सूरज यादव कुछ ज्यादा ही पैसे हड़पता और लोगों को ठगता है इसलिए इसकी कहानी सामने आ गई. अन्य दूसरे लोग ये खेल शातिर तरीके से खेलते हैं इसलिए उनके चेहरे अभी तक छिपे हुए हैं.

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