अखबार के बहिष्कार की धमकी मिलते ही राजस्थान पत्रिका अब शिक्षकों की प्रशस्ति गान में जुटा

अखबार को पहले रणछोड़ नजर आने वाले शिक्षक अब कर्मवीर लगने लगे… एक शिक्षक ने आवश्यक दवाइयां लेने के लिए अलमारी से दो बिस्किट निकाल कर क्या खा लिए, राजस्थान पत्रिका ने इस मुद्दे की आड़ में शिक्षक जगत पर सवाल खड़े कर दिए।

मामला पत्रिका के सबसे कमाऊपूत ग्रामसेवक ने उठाया था तो मजबूरन चार कॉलम की खबर छापनी पड़ी, जबकि पत्रिका को पता था कि बीमार शिक्षक ने दवाई लेने के लिए दो बिस्किट खा लिए थे।

सब कुछ जानते हुए भी पत्रिका ने शिक्षक को चोर व घर भेदन का अपराधी घोषित कर दिया।

सुबह जब अखबार पाठकों तक पहुचा तो माड़साबों का गुस्सा भी सातवे आसमान पर पहुच गया। फिर क्या था सोशल मीडिया पर पत्रिका को भांड करार दे कर ट्रोल किया जाने लगा।

शिक्षक संघ के नेताओं ने पत्रिका के बहिष्कार की धमकी दे डाली।

फिर क्या था, कोठारी बंधुओं ने हाथों हाथ अपने संपादकों को फरमान जारी कर निर्देश दिया कि माफी मांगने के साथ माड़साबों को खुश किया जाए।

आका का ऊपर से निर्देश मिलते ही खबरनवीस अपनी नारद वाली पेन की पेन तोड़ कर, भाड़ वाली पेंसिल लेकर शिक्षकों के प्रशस्ति गान में लीन हो गए।

भांड का रोल निभाते हुए पत्रिका के खबरनवीसों के मन में ख़याल तो जरूर आया होगा कि कल तक हम जिनको लॉकडाउन के दौरान चोरी छुपे ड्यूटी से भागने वाले रणछोड़ करार दे रहे थे, पापी पेट के लिए आज उनको कर्मवीर बनाना पड़ रहा है।

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