Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

यही राजनीति तो हिंदू कट्टरपंथी संगठन भी करते हैं!

-समरेंद्र सिंह-

राजनीति ऐसे ही काम करती है। कुछ दिन पहले हाथरस में दलित लड़की के बलात्कार और कत्ल की वारदात पर मीडिया ने जब हो हल्ला मचाया तो उसके कुछ दिन बाद ही राजस्थान में हुई एक आपराधिक घटना को खूब उछाला गया। बीजेपी आईटी सेल के लोगों ने उस घटना का हवाला देते हुए मीडिया को जमकर कोसा और कहा कि इस मामले में लोग चुप क्यों हैं? यह घटना राजस्थान में हुई है क्या इसलिए?

यह एक लड़की के खिलाफ लड़की को खड़ा करने की कोशिश थी। हिंसा के बचाव में हिंसा को खड़ा करने की कोशिश थी। लेकिन क्या कट्टरता का बचाव हो सकता है? हिंसा का बचाव किया जा सकता है? किसी आपराधिक और आतंकवादी घटना का बचाव हो सकता है?

हो सकता है। हमारे यहां कुछ भी संभव है। यह एक किस्म का ट्रेंड बन गया है। जब आप एक किस्म की हिंसा का विरोध कीजिएगा तो उसके समर्थक किसी कोने से एक दूसरी हिंसा को बाहर निकालेगा और कहेगा कि इसका विरोध तो नहीं किया?

इस समय फ्रांस के संदर्भ में यही हो रहा है। फ्रांस में हुई हिंसा को जायज ठहराने के लिए दलितों, आदिवासियों के खिलाफ हो रही हिंसक वारदातों की खबरों के लिंक उछाले जा रहे हैं। उस हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश हो रही है। इन सभी लोगों को यह सीधी सी बात समझनी चाहिए कि धार्मिक कट्टरता का किसी भी बहाने से बचाव नहीं होना चाहिए।

यही राजनीति तो हिंदू कट्टरपंथी संगठन भी करते हैं। अपनी हिंसा को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं के शोषण के किस्से सुनाते हैं। इस्लामी आतंकवाद के किस्से सुनाते हैं।

उनमें और आपमें क्या फर्क होगा? चुप्पी फर्क नहीं हो सकती। फर्क तो यही होगा कि आप दोनों हिंसा का खुलकर विरोध करेंगे। कट्टरता का विरोध करते वक्त किसी अगर-मगर को खड़ा नहीं करेंगे। जब आप अगर-मगर बीच में लाते हैं और एक हिंसा के बचाव में दूसरी हिंसा को खड़ा करते हैं, एक कुरीति के पक्ष में दूसरी कुरीति को खड़ा करते हैं तो आपमें और उसके लिए जिम्मेदार लोगों में कोई फर्क नहीं होता।

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन