फर्जी मुठभेड़ का मुद्दा उठाने पर थानेदार ने भेजा लीगल नोटिस, सोशल एक्टिविस्ट ने भी भेजा जवाब


लखनऊ : जेल में बंद निर्दोषों को छुड़ाने और मुठभेड़ में मारे गए निर्दोषों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए बनाए गए संगठन ”रिहाई मंच” के महासचिव राजीव यादव ने आजमगढ़ के कन्धरापुर थाना प्रभारी अरविन्द यादव की क़ानूनी नोटिस का जवाब भेज दिया है. अपने जवाब में राजीव ने कहा कि पुलिस प्रशासन फर्जी मुठभेड़ों का सवाल उठाने पर नोटिस भेज रही है लेकिन जान-माल की धमकी देने वाले पुलिसकर्मी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. ये कैसा राज है. पुलिस महकमें ने बस कार्रवाई का आश्वासन दे कर चुप्पी साध ली है.

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेसनोट में बताया कि मुठभेड़ों का सवाल उठाने पर थानेदार ने पहले धमकी भरा फोन किया. उसके बाद रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव को 18 जुलाई को एक नोटिस भेजा. इसमें अरविन्द मिश्रा नाम के व्यक्ति ने आजमगढ़ नागरिक पुलिस के थाना प्रभारी अरविन्द यादव को खुद का मुअक्किल बताते हुए कथित नोटिस भेजा है जिसमें बताया गया है कि उनके मुअक्किल अरविन्द यादव की ख्याति व प्रतिष्ठा में काफी क्षति हुई है. इस नोटिस का जवाब राजीव यादव ने लिखित तौर पर अरविन्द यादव को भेज दिया है.

नोटिस में मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा है कि नोटिस भ्रामक व अस्पष्ट है. नोटिस में मजिस्टेरियल जाँच का जिक्र किया गया है पर यह नहीं बताया गया कि उक्त जाँच में क्या तथ्य हैं. अरविन्द यादव की तरफ से नोटिस भेजने वाले वकील शायद उनको बेगुनाह बताना चाहते हैं.

नोटिस का जवाब देते हुए राजीव ने कहा है कि अरविन्द यादव लोक सेवक हैं और लोक सेवक द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान यदि कोई अपराध कारित किया जाता है तो उसके लिए लोक सेवक के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए शासन से स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है. लेकिन अपने पद के कर्तव्य के निर्वहन से अतिरिक्त अपराध के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। चूँकि मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष विचाराधीन तथा जांच की प्रक्रिया में है और दोषी पाए जाने पर अरविन्द यादव के विरुद्ध आपराधिक वाद संस्थित किया जा सकता है.

नोटिस में उन्होंने चेताते हुए कहा कि थाना प्रभारी अरविन्द यादव द्वारा मुझे दी गई गाली और धमकी के लिए मैं किसी भी समय आपराधिक मुकदमा दायर कर सकता हूं जिसके लिए मेरे द्वारा माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय सर्वोच्च न्यायालय भारत नई दिल्ली, राज्यपाल महोदय उत्तर प्रदेश लखनऊ, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ, गृह सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी आजमगढ़, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ और अध्यक्ष पिछड़ा आयोग नई दिल्ली को अरविन्द यादव द्वारा कारित घटना की सूचना दी जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि फर्जी मुठभेड़ों का सवाल इस तरह की नोटिसों से दबने वाला नहीं है. फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए लोगों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है.

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