नकली शराब बिकवाने वाले आबकारी निरीक्षक अब भी जमे हैं पदों पर, शासन मौन

योगी राज में अफसर सरकारी नीतियों का भर्ता बनाने में जुटे हैं. आबकारी विभाग का सबसे बुरा हाल है. प्रदेश भर में नकली शराब बिक रही है. दुकानों में ग्राहकों से ज्यादा पैसे लेकर शराब बेची जा रही है. हरियाणा से नकली शराब की खेप धड़ल्ले से चली आ रही है. Continue reading

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योगी राज में कप्तान साहब जयकारा लगवा रहे- ‘बोलबम’! देखें वीडियो

यूपी के जिला अंबेडकर नगर के कस्बा टांडा में कावड़ यात्रा के दौरान फील्ड में उतरे पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने तेज आवाज में कहा- ”थोड़ा जयकारा लगवाओ बोलबम…”. Continue reading

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भाजपा विधायक ने धमकाया तो इंस्पेक्टर ने छोड़ दिया दुष्कर्म का आरोपी

बीजेपी एमएलए दिनेश खटिक

भाजपा के विधायक जी लोग तो इंस्पेक्टर को कुछ समझ ही नहीं रहे… मेरठ में मवाना थाने के एसओ से एक विधायक की बातचीत का ये आडियो सुनें. पुलिस की नौकरी कितनी मुश्किल होती है, यह टेप सुनकर समझ में आता है. धमकी का असर भी हुआ. अभिलेखों में बदलाव कर इंस्पेक्टर ने आरोपी को छोड़ दिया. Continue reading

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अश्लील वीडियो बना वायरल करने से आहत दलित लड़की ने दी जान, देखें वीडियो

यूपी के मैनपुरी से एक बड़ी खबर है. यहां बेखौफ मनचलों ने एक दलित लड़के से छेड़छाड़ कर पहले उसका वीडियो बनाया और फिर वायरल कर दिया. इससे परेशान लड़की ने जान दे दी. बताया जाता है कि शौच को गयी एक दलित किशोरी के साथ कुछ मनचलों ने छेड़छाड कर वीडियो बना लिया और उसे वायरल करने की धमकी दे उसके साथ मनमानी करनी चाही. इससे आहत हो लड़की ने जहर खाकर जान दे दी. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. Continue reading

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बुलंदशहर में लॉ एंड आर्डर का बुरा हाल, अबकी पुलिस वालों ने फौजी को पीटा, देखें वीडियो

फौजी बंटी सिंह

यूपी में लॉ एंड आर्डर के मामले में बुलंदशहर सबसे खराब और खतरनाक जिले में शुमार हो गया है. यहां पुलिस वाले किसी अपराधी से पैसे लेकर किसी निर्दोष युवक को इनामी बदमाश बना देते हैं तो कभी यही पुलिस वाले सरेआम देश की सेवा करने वाले फौजी की पिटाई करने लगते हैं. इस फौजी ने खुद का एक वीडियो जारी कर योगी राज में बुलंदशहर की अराजक पुलिस का ब्योरा विस्तार से दिया है. Continue reading

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योगी की लखनऊ पुलिस ने जानकारी लेने थाने आए डाक्टर को पीट-पीट कर ये हाल कर दिया, देखें तस्वीरें

योगी राज में पुलिस अराजक हो चुकी है. कहीं अपराधियों से सुपारी लेकर निर्दोष युवक को इनकाउंटर में मारने के लिए फर्जी तरीके से इनामी बदमाश में तब्दील कर देती है, तो कहीं संपादक के घर में कूद कर बिना वजह जान मारने की धमकी देती है. Continue reading

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एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा : यूपी सरकार या तो बेकार है या फिर यहां सिर्फ भ्रष्टाचार है!

तीन-तीन बार परीक्षा की तिथि तय करने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग बिना अपने माथे पर प्रश्नचिह्न लगवाए एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा करा पाने में पूरी तरह अक्षम साबित हुआ है। साढ़े 7 लाख प्रतियोगियों के भविष्य को अधर में डालते हुए तीन बार परीक्षा की तिथि घोषित की। विज्ञान और बायोलॉजी विषय के संबंध में स्थिति स्पष्ट न कर पाए। Continue reading

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निर्दोष युवक को इनामी बदमाश बनाए जाने की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची

अलीगढ़ के जाने माने समाज सेवी, आरटीआई कार्यकर्ता व तेज़ तर्रार वकील प्रतीक चौधरी ने बुलंदशहर के बहापुर गांव के बीवी नगर थाने में हत्या के मुलजिम बनाए गए सौरव पुत्र देवेंद्र के जीवन की रक्षा हेतु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। Continue reading

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प्रबंध संपादक को धमकाने वाले दरोगा ने यूं मांगी सरेआम माफी, देखें तस्वीरें

Dev Nath : दरोगा धमकी प्रकरण में मेरे साथ खड़े रहने वालों का अभिनंदन। यह मित्रों और मीडिया में आई खबरों का नतीजा ही है कि दरोगा जी अपनी दबंगई भूल गए और लखनऊ में मुझसे मिलकर माफी मांग ली। दरोगा जी भले लगे इसलिये हमने भी दिल से माफ कर दिया।

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फर्जी मुठभेड़ का मुद्दा उठाने पर थानेदार ने भेजा लीगल नोटिस, सोशल एक्टिविस्ट ने भी भेजा जवाब


लखनऊ : जेल में बंद निर्दोषों को छुड़ाने और मुठभेड़ में मारे गए निर्दोषों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए बनाए गए संगठन ”रिहाई मंच” के महासचिव राजीव यादव ने आजमगढ़ के कन्धरापुर थाना प्रभारी अरविन्द यादव की क़ानूनी नोटिस का जवाब भेज दिया है. अपने जवाब में राजीव ने कहा कि पुलिस प्रशासन फर्जी मुठभेड़ों का सवाल उठाने पर नोटिस भेज रही है लेकिन जान-माल की धमकी देने वाले पुलिसकर्मी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. ये कैसा राज है. पुलिस महकमें ने बस कार्रवाई का आश्वासन दे कर चुप्पी साध ली है. Continue reading

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योगी राज का एक सच ये भी : निर्दोष युवक को इनामी बदमाश में तब्दील कर दिया बुलंदशहर पुलिस ने!

जब शासन सत्ता की तरफ से पुलिस को इनकाउंटर करने की खुली छूट दे दी जाती है तो उसका साइड इफेक्ट बड़ा भयावह होता है. कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी पैसे लेकर निर्दोष युवकों को इनामी बदमाश में तब्दील करने के लिए दिन-रात ‘मेहनत’ करने लगते हैं. बुलंदशहर के सौरभ अपने मां-पिता की इकलौती संतान हैं. मां नवोदय विद्यालय में प्रिंसिपल हैं. पिता किसान हैं. Continue reading

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल भीतर ही अपना तेज खो दिया!

छवि बदलने के अंतर्द्वंद में योगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सियासत में काफी कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों योगी सरकार खुल कर फैसले नहीं ले पा रही है? क्यों डर-डर का काम कर रही है? कहीं ऐसा तो नहीं है कि नौकरशाही पर लगाम नहीं लगा पाने के कारण योगी सरकार के फैसलों पर उंगलियां उठाई जा रही हैं? राज्य में बहुत कुछ ऐसा घट रहा है जिसे योगी सरकार और आम चुनाव की सेहत के लिये ठीक नहीं कहा जा सकता है। Continue reading

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योगीराज में अंधेरगर्दी : सौ से ज्यादा शिक्षकों को मनमाने तरीके से लखनऊ में पोस्टिंग दे दी गई!

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही साफ-सुथरी और सबको न्याय दिलाने का वादा करती हो लेकिन उसके अधिकारी सरकार की मंशा पर पलीता लगाये हुए हैं। ‘पैसे और पहुंच’ के बल पर कई शिक्षकों का अंतर जनपदीय स्तर पर मनमाने ढंग से तबादला करके ‘प्राइम पोस्टिंग’ दे दी गई। वहीं वे शिक्षक-शिक्षिकाएं दर-दर भटक रही हैं, जिनके पास ‘पैसा और पहुंच’ नहीं है। हाल यह है कि तबादला नीति के लिये स्कोरिंग के जो मापदंड तय किये गये थे, उसमें भी खूब खेल हुआ है। Continue reading

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Justice For Sanskriti : हत्या के 6 दिन के बाद भी लखनऊ पुलिस के पास कोई सुराग नहीं है

Samar Anarya

एक जिला है बलिया। आजादी की लड़ाई के लिए मशहूर। कचहरी पर कब्ज़ा कर आज़ादी के पहले तिरंगा लहरा देने वाले चित्तू पांडेय का जिला। जिले में एक जगह है फेफना। बस. इसके बाद कुछ है नहीं। इसके बाद कुछ है नहीं सब था. Continue reading

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योगी राज में मनबढ़ कोतवाल ने इस बुढ़िया संग की बदसलूकी, देखें वीडियो

निजाम बदला, नहीं बदला पुलिस का मिजाज

आजमगढ़। देश-प्रदेश का निजाम तो बदल गया मगर पुलिस के मिजाज अभी भी नहीं बदले हैं। वही सुर, वही ताल। फूलपुर कोतवाली पर फरियाद लेकर पहुंची एक बुढ़िया को गाली देते कोतवाल का तेवर देखकर यही सच सामने आया। जबकि तंग आने के बाद वह बुढ़िया कप्तान के दरबार से होकर कोतवाली पहुंची थी। Continue reading

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योगी डाल-डाल तो भ्रष्ट अफसर पात-पात!

Ashwini Kumar Srivastava : योगी डाल-डाल तो भ्रष्ट अफसर पात-पात! राज्य में एक विभाग है प्रदूषण नियंत्रण विभाग। हर उद्योग या प्रोजेक्ट के लिए वहीं से एनओसी लेनी पड़ती है, तभी जाकर प्रोजेक्ट मंजूर माना जाता है। योगी आदित्यनाथ जानते हैं कि यह विभाग महाभ्रष्ट है और हर एनओसी के लिए मोटी रकम घूस में लेता है, और न मिलने पर एनओसी या तो रद्द कर देता है या फिर महीनों या बरसों तक लटकाए रखता है। Continue reading

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बस्ती में भाजपा विधायक ने पत्रकार से की अभद्रता, थानेदार के जरिए कैमरे से वीडियो डिलीट कराया

यूपी के बस्ती जिले के रूधौली कस्बे से खबर है कि दैनिक अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार व ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन बस्ती के मण्डलीय उपाध्यक्ष डॉ एस के सिंह से भाजपा के विधायक ने अभद्रता की है. अभद्रता से नाराज ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने आंदोलन की चेतावनी दी है. Continue reading

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योगी के गृह जिले में महिला कल्याण समेत कई विभागों-योजनाओं पर चढ़ी बदइंतजामी की चादर

गोरखपुर में महिला कल्याण विभाग के मन्डलीय अधिकारी ‘डिप्टी सीपीओ’ का पद 2 वर्ष से रिक्त चल रहा है. ऐसे में सवाल है कि महिला कल्याण की योजनायें सीएम के गृह जिले में कैसे कार्यान्वित होंगी. महिला कल्याण निदेशालय में वैसे तो 4 अधिकारी बैठे हुए हैं लेकिन मुख्यमन्त्री के संसदीय क्षेत्र रहे जनपद गोरखपुर में 2 वर्ष पहले उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी पद से कनक पन्डेय के सेवानिवृत्त होने के बाद से डिप्टी सीपीओ का पद रिक्त चल रहा है. Continue reading

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लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय के घर में घुसकर बोला- ”मैं STF से रणजीत राय हूँ, जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो…”

Subhash Rai : मैं एसटीएफ से रणजीत राय हूँ, जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो… (जब पुलिस और एस टी एफ के लोग इस तरह क़ानून तोड़ने वाले, अराजक और अपराधी क़िस्म के मित्रों और रिश्तेदारों की मदद में आम जीवन जीने वालों का जीना हराम करने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए, बिना किसी असाइनमेंट के गुंडों की तरह कहीं भी हमला करने लगेंगे तो हम जैसे आम और साधारण लोगों का जीवन कभी भी संकट में पड़ सकता है) Continue reading

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भड़ास में खबर व सोशल मीडिया पर मुहिम के बाद मीडिया छात्रा को छेड़ने वाला गया जेल

मीडिया की छात्रा तपस्या शर्मा इस योगी राज में लफंगों से इस कदर परेशान थीं कि वे लगभग सुसाइड की सोचने लगी थीं. पुलिस की लफंगे के साथ मिलीभगत के चलते उन्हें हर पल, हर मोड़ पर उत्पीड़न झेलना पड़ा. गाजियाबाद की स्थानीय इलाकाई पुलिस बजाय इस लड़की की मदद करने के, लफंगों के साथ खुलेआम खड़ी दिखी. Continue reading

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योगी राज में गाजियाबाद पुलिस और लफंगों से परेशान ये मीडिया की छात्रा कहीं सुसाइड न कर ले, देखें वीडियो

पीड़ित छात्रा तपस्या शर्मा

गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना एरिया में एक लफंगा अपने दोस्तों के साथ खुलेआम एक लड़की और उसके पिता को गालियां देता है. लड़की को छेड़ता है. गंदे मैसेज भेजता है. काल करके गंदी गंदी बातें करता है. लड़की का नाम तपस्या शर्मा है जो मीडिया की छात्रा है.   Continue reading

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पुलिस कप्तान का स्टिंग करने वाला पत्रकार भाई समेत जेल गया, पत्नी से गैंगरेप

बाराबंकी में एक पत्रकार ने पूर्व एसपी अनिल कुमार सिंह का स्टिंग ऑपरेशन किया. इस पूर्व एसपी के खिलाफ एक कॉन्स्टेबल ने तकरीबन आठ लाख रुपए लेकर स्थानीय थानों में पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग कराने का आरोप लगाया था. पत्रकार ने इसी मसले से जुड़ा स्टिंग अपने चैनल पर तीन से चार बार चलावाया. इसके बाद पत्रकार को जेल भेज दिया गया. पत्रकार के भाई को भी जेल भेज दिया गया. पत्रकार फिलहाल जमानत पर बाहर है लेकिन उसका भाई जेल में है. स्टिंग के बाद एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया. Continue reading

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भ्रष्ट सुनील बंसल ने मेरे खिलाफ FIR दर्ज करायी है, जेल जाने को हूं तैयार : सूर्य प्रताप सिंह

Surya Pratap Singh : भ्रष्ट सुनील बंसल ने मेरे ख़िलाफ़ गोमतीनगर थाने, लखनऊ में FIR दर्ज करायी है… अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकर्ता (अब भाजपा में) के नाम से छल से यह FIR दर्ज कराके यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि यह अखिलेश यादव की शय पर लिखी गयी है। जबकि अपने मुख्यमंत्री काल में अखिलेश यादव किसी से भी FIR दर्ज कराके मुझे जेल भेज सकते थे, मगर ऐसा नहीं किया और न ही मेरी security हटायी थी। Continue reading

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योगी सरकार के करोड़ों के इस विज्ञापन में कार्यक्रम स्थल का नाम ही नहीं है

सिस्टम को टीबी का सुबूत… जगाने का काम करने वाले सोते हुए कर रहे हैं काम… करोड़ों के बजट वाले इस विज्ञापन में पूरी रामकथा है। लेकिन रामकथा में राम जी का ही नाम नहीं है। कार्यक्रम की पूरी जानकारी है पर ये लिखना भूल गये कि कहां है कार्यक्रम।

उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के सभी बड़े अखबारों में आज ये फुल पेज विज्ञापन छपा है। इस विज्ञापन में सरकार ने करोड़ों रूपये खर्च किये हैं।  खैर जब सिस्टम को ही टीबी हो गयी है तो टीबी को खत्म करने की जागरूकता भी टीबी का शिकार हो जाये तो ताज्जुब की बात नहीं।

लखनऊ के पत्रकार नवेद शिकोह की एफबी वॉल से.

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दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान योगी सरकार

यूपी की योगी सरकार दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान है. यही कारण है कि इस भाजपा सरकार में इस घोटालेबाज अफसर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है. आईएएस सत्येंद्र सिंह एनआरएचएम घोटाले के भी आरोपी हैं. वे अब भी एक बड़े पद पर तैनात हैं.  सत्येंद्र सिंह जब एनआरएचएम में जीएम हुआ करते थे तो उन्होंने काफी खेल किए. इसी कारण उन्हें आरोपी बनाया गया. सीबीआई जांच के दौरान सत्येंद्र सरकारी गवाह बन गए. इसी कारण उनके खिलाफ चलने वाली सभी जांच ठंढे बस्ते में डाल दी गई. पर क्या सरकारी गवाह बनने से गुनाह माफ़ हो जाते हैं?

बताया जाता है कि सत्येंद्र सिंह के गोमती नगर विस्तार, विपुल खंड, फन मॉल के पास अरबों रुपये कीमत के आवास हैं. सत्येंद्र सिंह का किडजी नाम का एक स्कूल भी है. इसके अलावा नोएडा सहित देश भर के कई शहरों में आलीशान बंगले, फ्लैट्स और बेशकीमती ज़मीनें हैं. आयकर विभाग के पास भी इस दागी अफसर की पूरी डिटेल है लेकिन कोई अदृश्य ताकत इस अफसर पर हाथ डालने से रोकती है.

एक दफे सत्येन्द्र कुमार सिंह के छह शहरों में स्थित ठिकानों पर आईटी अफसरों ने छापा मारा था. तब लाखों रुपया कैश और अरबों की संपत्ति मिली थी. विभाग के पास सूचना थी कि सत्येंद्र के पास ठीकठाक काला धन है. आयकर अफसरों की 22 अलग-अलग टीमों ने लखनऊ, मेरठ, बागपत, मैनपुरी, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली आदि में सत्येंद्र के सभी ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे. वैसे तो योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात करती है लेकिन सत्येंद्र के मामले में साफ दिख रहा है कि भ्रष्टाचारी को बचाया जा रहा है. आईएएस सत्येंद्र सिंह पशुधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर जमे हुए है. देखना है कि योगी सरकार में भी इस अफसर का बाल बांका होता है या पहले जैसा जलवा कायम रहेगा.

लखनऊ से भड़ास संवाददाता सुजीत कुमार सिंह ‘प्रिंस’ की रिपोर्ट.

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योगी राज में युवा उद्यमी के संघर्ष को मिली जीत, करप्ट अफसरों का गिरोह हारा

Ashwini Kumar Srivastava : योगी राज में देर तो है….अंधेर नहीं! क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ मेरे जीवन का अब तक का सबसे बेहतरीन तोहफा लेकर आये हैं…और वह है, सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार में फंसकर ढाई बरस की भयंकर देरी से तकरीबन दम ही तोड़ चुके हमारे आवासीय प्रोजेक्ट की मंजूरी। ईश्वर की कॄपा से अब हमारे मार्ग की हर वह बाधा दूर हो चुकी है, जिनसे घिर कर हम न जाने कितनी मुश्किलों में आन फंसे थे। हालांकि शासन को भी सुनवाई आदि प्रक्रिया में लगभग ढाई महीने का समय जरूर लगा लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के शिकायत तंत्र ने अंतत: मुझे न्याय दिलवा ही दिया। ढाई बरस से जिस फ़ाइल को सरकारी तंत्र में बैठे एक भ्रष्ट अफसर ने बिना किसी की परवाह किये रोक रखा था, उसे आखिरकार मजबूर होकर, बेमन से और बिना एक भी दमड़ी की घूस लिए ही मंजूर करके मुझे देना ही पड़ गया।

मेरे द्वारा की गई इस अफसर की शिकायत को पीएमओ और चीफ मिनिस्टर आफिस ने सही पाते हुए मेरे हक में यह फैसला दिया है….और वह भी बिना किसी सोर्स सिफारिश के या बिना एक भी पैसे की घूस दिए हुए ही। इसलिए अब मैं अपनी ही कही हुई बात में सुधार करते हुए यह स्पष्ट कर रहा हूँ कि योगी राज में देर तो है, पर अंधेर नहीं….कम से कम मेरे लिए तो अब नहीं है। जिस तरह मैंने एक आम नागरिक की ही तरह अपने हक की यह लड़ाई लड़ी थी और केंद्र व राज्य सरकार के सुनवाई तंत्र ने उस पर मुझे न्याय दिलवाया है, उससे मुझे अब यह उम्मीद जग गयी है कि कोई भी व्यक्ति इस सरकार में भ्रष्टाचार या किसी भी अन्य अन्याय आदि के खिलाफ बिना किसी हिचक और भय के लड़ाई लड़ सकता है।

इस लड़ाई में खुल कर मेरा साथ देने वाले Bhadas4media के Yashwant Singh का तो मैं दिल से बहुत ज्यादा आभारी हूँ। जिस समाज में ज्यादातर लोग खुद के खिलाफ हुए अन्याय या भ्रष्टाचार के विरुद्ध नहीं खड़े हो पाते, उस समाज में यशवंत जी जैसे लोग भी हैं, इस पर मुझे आज भी यकीन ही नहीं होता…लेकिन यह मैंने न सिर्फ अपने मामले में बल्कि हमेशा देखा है कि यशवंत जी मेरे जैसे न जाने कितने अंजान लोगों के साथ अन्याय के खिलाफ जंग में एक ऐसा बिगुल बनकर बनकर साथ खड़े हो जाते हैं, जिससे हर अन्यायी की रूह तक कांप जाती होगी।

इस कामयाबी तक पहुंचने में मेरे माता-पिता का आशीर्वाद तो हमेशा ही निस्वार्थ रूप से मेरे साथ रहा है लेकिन एक और शख्सियत ऐसी हैं, जिनके आशीर्वाद के बिना मेरा यहाँ तक पहुंच पाना नामुमकिन था। वह हैं डीएवी के पूर्व प्रॉक्टर और लखनऊ के बेहद सम्मानित व रसूखदार इंसान श्री राम शंकर तिवारी ‘दादा’। वैसे तो उनका सहयोग व आशीर्वाद बचपन से ही मुझे हमेशा ही मिलता आया है। लेकिन नौकरी छोड़कर रियल एस्टेट में उतरने के बाद अगर मैं कहीं कुछ भी हासिल कर पाया हूँ तो वह सिर्फ दादा की ही बदौलत है।
जापान में रह रहे मेरे बड़े भाई को उनकी बहुत छोटी सी उम्र से ही ‘दादा’, उनकी पत्नी, जिन्हें हम बुआ जी कहते हैं, और उनके समूचे परिवार ने हमेशा पुत्रवत स्नेह दिया है। भैया की ही वजह से दादा व उनके परिवार ने मुझे भी हमेशा अपने परिवार का ही एक अंग माना है। दादा का जिक्र मैंने इससे पहले कभी नहीं किया क्योंकि ऐसा करके मैं कभी भी यह एहसास नहीं दिलाना चाहता हूँ कि उन्होंने अब तक जो भी मेरे लिए किया, उसका ऋण मैं सिर्फ धन्यवाद कहकर या आभार जताकर ही चुका दूंगा।

दरअसल, माता-पिता और भाई-बहनों यानी अपने परिवार के बाद दादा के ही एहसानों का ही ऐसा ऋण मुझपर चढ़ गया है, जो मैं शायद कभी चुका ही न पाऊं। बहरहाल, मुझ पर अपनत्व की बारिश करने वाले और दिल से मेरा भला सोचने वाले हर उस शख्स का मैं शुक्रगुजार हूं, जो मुझसे दूर है या मेरे कहीं आस-पास ही है। मैं जानता हूँ कि खुशी की इस घड़ी में सबका नाम लेकर आभार व्यक्त कर पाना अभी संभव नहीं है लेकिन जुबां पर नाम भले ही न आ पाया हो लेकिन मेरा अजीज और खैरख्वाह हर इंसान हमेशा मेरे दिल में बसता है…और सबको पता है कि मैं दिल से जिसको मानता हूँ, उसका जिक्र सबके सामने करूँ न करूँ, उसे हमेशा सर माथे पर ही बिठाकर रखता हूँ। ईश्वर की अनुकंपा, परिजनों व मित्रों समेत आप सबका स्नेह और बड़ों का आशीर्वाद मुझ पर हमेशा यूँ ही बना रहे, बस यही कामना करता भी रहता हूँ।

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की एफबी वॉल से. अश्विनी दिल्ली में नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, बिजनेस स्टैंडर्ड जैसे बड़े अखबारों में लंबे समय तक पत्रकारिता करने के बाद कई साल से यूपी की राजधानी लखनऊ में बतौर रीयल इस्टेट उद्यमी सक्रिय हैं.

पूरा प्रकरण है क्या… इसे विस्तार से जानने-समझने के लिए नीचे दिए शीर्षकों पर क्लिक करें….

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रिश्वत के लिए फाइल पर कुंडली मार कर बैठ जाता है ये अफसर, कंप्लेन पर पीएमओ भी सक्रिय

Ashwini Kumar Srivastava : 2018 की तरफ बढ़ते हुए मुझे एक बेहद बड़ी खुशखबरी यह मिल रही है कि भ्रष्टाचार और एक भ्रष्टाचारी अफसर एसपी सिंह के खिलाफ चल रही मेरी लड़ाई को खुद प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में ले लिया है। दोनों ही जगहों से बाकायदा मेरी शिकायत पर न सिर्फ ताबड़तोड़ जांच आरंभ हो गई है बल्कि मेरी वह सितंबर में की गई सबसे पहली शिकायत को भी पीएमओ ने दोबारा जीवित करवा दिया है, जिसे इस भ्रष्टाचारी अफसर एसपी सिंह ने न जाने कैसे सांठ-गांठ करके निस्तारित करवा दिया था।

और, कार्यवाही की यह सारी सूचनाएं मुझे खुद पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय के शिकायत तंत्र द्वारा ही देखने के लिए पोर्टल व मोबाइल एप पर मुहैया भी करा दी गयी हैं।
यही नहीं, सूत्रों की मदद से सुनने में तो यहां तक भी आ रहा है कि ढाई बरस से लटकी हमारी फ़ाइल पर अपनी मुहर लगाते हुए हमारे प्रोजेक्ट की मंजूरी का पत्र भी संभवतः आज या कल तक शासन स्तर से ही हमें दे दिया जाएगा।

उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार अपने ही तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार से निपटने में इसी तरह भविष्य में भी हर आम आदमी का साथ देती रहेगी। मैंने भी इस लड़ाई को एक आम आदमी की ही तरह लड़ा है…प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के शिकायती तंत्र का ही इस्तेमाल किया, न किसी भाजपा नेता, विधायक, सांसद, मंत्री या अफसर के सामने जाकर सोर्स सिफारिश की और न ही उसी भ्रष्टाचारी अफसर के सामने घुटने टेक कर उसे भारी घूस देकर अपना प्रोजेक्ट कराने का रास्ता अपनाया। जबकि मुझे भिड़ने की बजाय ऐसा ही करने की कई लोगों ने सलाह भी दी।

मुझे पूरा यकीन है कि मेरी ही तरह अगर हर आदमी भ्रष्टाचारी और भ्रष्टाचार के सामने डट कर खड़ा हो जाये और घूस देने से मना कर दे…तो देर से ही सही लेकिन उसे जीत हासिल होकर रहेगी। बहरहाल, 2018 में एक अच्छी दिशा में और बेहतरीन खबर के साथ कदम रखते हुए मैं आभारी हूँ, उन सभी का, जिन्होंने हर सुख-दुख में मेरा दिल से साथ दिया है।

मेरी इस लड़ाई में भी कई लोग खुल कर मेरे साथ भी आये। उनमें सबसे ऊपर नाम Bhadas4media वाले औघड़ बाबा यानी Yashwant Singh का भी है। जो हर उस लड़ाई में खुद ही प्रकट हो जाते हैं, जो अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ी जा रही होती है। उनकी शर्त बस इतनी ही होती है, जो इस बार उन्होंने लखनऊ में साथ जमी एक महफ़िल में खुद ही बताई थी कि जिसकी लड़ाई है, उसे अपना भय छोड़कर खुलकर एक बहादुर इंसान की तरह सामने आना होगा। क्योंकि कई बार उन्हें ऐसे लोगों के लिए भी कोर्ट, कचहरी या पुलिस का सामना करना पड़ चुका है, जो खुद डर कर दुबके रहते हैं, और यशवन्त जी को अपनी लड़ाई में सूली पर चढ़वा देते हैं।

काश, हम सभी के भीतर ऐसे ही एक बेबाक और निर्भीक यशवन्त का जन्म हो जाये और हम सभी गूंगे-बहरों की तरह भ्रष्टाचार और अन्याय को सहकर मुर्दे बने रहने की बजाय यशवन्त जी की तरह भड़ास निकाल कर इस दुनिया को ही बदल कर रख दें…

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की एफबी वॉल से. अश्विनी दिल्ली में नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, बिजनेस स्टैंडर्ड जैसे बड़े अखबारों में लंबे समय तक पत्रकारिता करने के बाद कई साल से यूपी की राजधानी लखनऊ में बतौर रीयल इस्टेट उद्यमी सक्रिय हैं.

पूरे प्रकरण को विस्तार से समझने के लिए नीचे दिए शीर्षकों पर क्लिक कर पढ़ें :

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यूपी में सुरक्षित महसूस नही कर रहे पत्रकार, पढ़िए हाथरस में भास्कर के पत्रकार के साथ क्या हुआ…

हाथरस। अब तक हमने खबरे बहुत लिखी पर कल मेरे साथ बड़ी गजब और ऐसी घटना
घटी कि खुद की खबर लिखने लायक घटना घट गई। पत्रकारिता के अबतक के जीवन
काल में मेरी खबरों से जहां कुछ लोग खुश हुए तो कुछ लोग निराश भी हुए।
कुछ लोगों ने इधर उधर से धमकिया भी दिलवाई। पर में चुप न हुआ। पर कल तो
मेरी जान पर बन आयी मैं अपनी जान बचाकर किसी तरह बच कर अपने घर आया।

सोमवार को मैं रोजाना की तरह सिटी स्टेसन पर आकर अपनी ट्रेन का इंतजार कर
रहा था। ट्रेन में समय था तो मैं लेपटॉप निकालकर उस पर कार्य कर रहा
था। कुछ युवक मेरे पीछे बेंच पर बैठ कर बातें करने लगे। मैंने उन्हें
अपनी चर्चा करते सुना तो मैं सतर्क हुआ। मैंने काम करते करते अपना ध्यान
उनकी बातों पर लगा दिया। उनकी बातें ठीक नहीं हो रही थीं। तभी ट्रेन आ
गयी। मैं अपना चालू लैपटॉप यों ही बिना शट डाउन किये ऊपर से बंद करके बगल
में लगाकर ट्रेन में चढ़ गया तो वो सभी युवक भी उसी डिब्बे में चढ़ने लगे। कुछ
फोन करने लगे। ट्रेन का क्रॉस होना था। थोड़े समय बाद और लोग आने लगे
जिनके हाथ में हाकी डंडे भी थे। एक व्यक्ति एक गेट पर खड़ा हो गया और खटाक
से उसने एक साइड का गेट बन्द कर दिया और मेरी बगल में खड़ा हो गया। दूसरी
साइड के गेट पर एक अन्य युवक खड़ा हो गया और अपने पैर मेरे आगे लगाकर ऐसे
खड़ा हो गया जैसे मेरा रास्ता बंद कर रहा हो। स्थिति भांप कर मैं आगे के
डिब्बों में पहुंचा तो उसमें भी लोग आने लगे और पूरा डिब्बा-सा घेर लिया।

आगे पहले स्टेशन मेण्डु पर आकर मैं उतरा और ट्रेन के चलने का इंतजार करने
लगा तो डिब्बे में से वही लोग उतरने लगे। कुछ लोग आगे पीछे के डिब्बों के
गेट के पास खड़े हो गए। मुझे अपनी जान संकट में प्रतीत हुई तो मैं ट्रेन
में नहीं चढ़ा और किसी वाहन से जाने का मन बनाया और वहां से बाहर निकलने
लगा। बाहर स्टेशन पर गाड़िया लगी मिलीं। मैं बाहर सड़क पर आया तो पूरा जाम लगा
हुआ था और कुछ लोग मेरा पीछा करते हुए गाड़ियों में आये और दोनों साइड
की ओर गाड़ियां चलने लगीं। मैं इधर उधर घूमकर तुरंत वहां से निकलकर वापस
स्टेशन पहुंचा। स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से मिला जो अपने आपको मीणा करके
बता रहे थे। मेंने उन्हें सिटी स्टेशन से लेकर रोड तक की पूरी घटना बताते
हुए अपना परिचय दिया। उन्होंने गम्भीरता से लेते हुए चूँकि मेरा मोबाइल
बैटरी समाप्त होने के कारण बंद हो चुका था, मेरी पत्नी को फोन मिलाया और
मेरी बात कराई। उनको भी मैनें सारी घटना बता दी और जिन जिन लोगों को बता
सकता था उनको अपनी लोकेशन दी। यहां से मीणा जी ने मुझे किसी युवक की बाइक
पर बैठाकर बस में बैठाने के लिए भेज दिया तो फाटक का नजारा देखकर मेरा
दिमाग सन्न राह गया। सिकन्दराराव जाने वाले वाहन फाटक से इधर नहीं आ रहे
थे।  हाथरस जाने वाले वाहन जा रहे थे। सिकन्द्रराव रोड खाली पड़ा था।

जो ट्रेन में मेरे साथ थे उनमें से कुछ लोग कई लोगों की मदद से आड़े टेड़े
वाहन लगाकर दबंगई से रोड रोक रहे थे। मैंने मामले को गंभीर मानकर हाथरस
जाने का मन बनाया। जब मैं हाथरस जाने के लिए दूसरी साइड आया तो जो लोग
पहले सिकन्द्रराव का रास्ता रोक रहे थे वह अब हाथरस का रोकने लगे। मेरे
आगे पीछे लोग घूमने लगे। उन लोगों को चकमा देकर मैं वहां से पास ही में
मौजूद शिव ढाबा पर आया और जब तक लेपटॉप में मेरा फोन लगा था इसलिए मेरा
फोन कुछ चार्ज हो चुका था। मैंने तुरंत अपने पत्रकार साथी धीरज उपाध्याय
को अपनी लोकेशन दी और घटना की जानकारी भी दी। तब तक वो सभी समझ चुके थे
कि मैं भांप गया हूं कि उनके इरादे नेक नहीं हैं। मैंने होटल पर भी
सुरक्षित होने के लिए वहां घूम फिर के देखा तो वहां भी संदिग्ध लोग ईकट्ठे
हो रहे थे। वहां मुझे सेफ नहीं लगा तो मैं थोड़ा आगे हलवाई की सी दुकान थी,
वहां गया। दुकानदार से आग्रह किया भाई मेरे पीछे कुछ लोग लगे हैं, मेरी
जान को खतरा है, मेरा सहयोग करो। वो ‘दुकान से बाहर उतरो उतरो’ कह कर मुझे
बाहर धकेलने लगा और शोर करने लगा। जो लोग मेरे पीछे थे वही भीड़ बनकर आने
लगे तो मैंने दुकान के अंदर घुसकर उसका शटर डालकर अंदर से बंद कर लिया।

दुकान के अंदर से कुछ दिख नहीं रह था। केवल बाहर की आवाज़ आ रही थी। नीचे
से झांककर देखने पर केवल टाँगे ही दिख रहीं थीं। मेरा फोन बंद हो चुका था
तो मैंने मोबाइल उसी दुकान में चार्जिंग पर लगाया और उसके चार्ज होने की
प्रतीक्षा करने लगा। बाहर से कुछ लोग लात और ईंटो से शटर बजाने लगे ।
मैंने शटर के जिस लॉक में ईंट फसाकर उसे रोक रखा था, वह खुलने लगा तो मैंने
तुरन्त ऊपर टंगी चाबी को उतारा और जल्दी जल्दी चाबी से लॉक लगा
दिया। इतनी देर में कुछ स्थानीय लोग भी वहां आ गए तो वही संदिग्ध लोग
मेरे बारे में उल्टा सीधा बोलकर उनके दिमाग में गलत छवि डालने लगे। मैं
अंदर से सब बोल बोल कर सबको बता रहा था कि भाई में कोई गलत आदमी नहीं
हूं। पत्रकार हूँ। मेरा मोबाइल अंदर चार्ज हो रहा है। में खुद जंगसन
प्रभारी जी को फोन मिलाऊँगा। थोड़ी देर रुक जाओ। मैं अपनी जान को खतरे में
भांपकर इस दुकान में घुसा हूँ। पुलिस या मेरे किसी परिचित के आने के बाद
ही शटर खोलूंगा। वो सब लोग लात मारकर फिर शटर बजाने लगे। तभी आवाज आने
लगी पुलिस आ गयी, आ गई, अब बात कर ले। मैंने अंदर से क्योंकि कुछ दिख नही
पा रहा था। मैंने पूछा कि जंगसन प्रभारी जी हैं क्या? मैं उन्हें जानता
हूँ। तो कोई उनकी सी आवाज में कहने लगा हां हूँ अब खोल दे। मुझे शक हुआ तो
मैंने कहा कि सर प्रभारी जी तो नहीं हैं। मैं उन्हें जानता हूँ। हाथरस भी
रहे हैं। पहले मैं उन्हें उनके सीयूजी पर फोन मिलाऊँगा। तब खोलूंगा। आवाज
आई तुझे अंदर से कुछ दिख नहीं रहा तो क्या पुलिस का सायरन भी सुनाई नहीं
पड़ रहा है। फिर तेजी से सायरन बजने लगा। मैंने कहा सायरन प्रूफ नहीं करता कि
बाहर पुलिस है। मैं पहले बात करूंगा तब खोलूंगा। फिर तो बह सब शटर तोड़ने
पर उतारू हो गए। एक तरफ का लॉक ठीक से लगा नहीं था सो खुल गया और नीचे से
तीन सिपाही दिखे। मेरी जान में जान आयी और मैं शटर खोलकर बाहर आने लगा।

पब्लिक बहुत थी पर शुरू से रुकने वाले वही लोग पब्लिक के बीच में घुसकर
मेरे साथ जमकर गुस्सा उतार रहे थे। ज्यादातर पब्लिक अचंभित सी होकर नजारा
देख रही थी। मौके पर आए सिपाहियों ने जबरदस्ती मुझे एक गाड़ी में डालकर
ले जाने लगे। वहां उस वक्त जो भी लोग भीड़ के रूप में मुझे दिख रहे थे मैंने उन्हें
चीख चीख कर बताया भाइयों मैं कोई अपराधी नही हूँ, मैं एक पत्रकार हूँ।
अपनी जान बचाने के लिए इस दुकान में शरण ली। मेरे साथ ठीक नहीं हो रहा है।
कोई मुझे पूछता हुआ आये तो बता देना पुलिस ले गयी है जंगसन। गाड़ी में एक
नेता टाइप के व्यक्ति और दो पुलिस कर्मी और गाड़ी का चालक थे। नेता टाइप
वाला व्यक्ति बोल रहा था कि ज्यादा बड़ा पत्रकार बनता है आज तुझे बीजेपी
वाले बचाये। मैंने कहा कि मेरा किसी बीजेपी बीएसपी किसी से कोई लेना देना
नहीं है। मैं पत्रकार हूं। वो पुलिस के सामने ही मारपीट करने लगा। मेरा
फोन छीन लिया। एक पुलिस  कर्मी ने उसे बमुश्किल रोका। मुझे थाने लाकर
बैठा दिया गया। लोग अब थाने आने लगे। मैं देखकर हैरान था कि जिन लोगों
से मैं बच कर भाग रहा था, थाने में वही लोग ज्यादा नजर आ रहे थे। मैंने
अपने घर फोन करने की जिद करना शुरू किया तो तीन सिपाही जो मुझे लेकर आये
थे जबरदस्ती हथकड़ी डालने लगे। मैं विरोध करते हुए चिल्लाने लगा
हथकड़ी क्यों लगा रहे हैं, मैं कोई खूंखार अपराधी नहीं तो हूँ, अपनी जान
बचाने का ही प्रयास किया था। मैं एक पत्रकार हूँ। मेरे घर सूचना दो।

इस पर तीनों सिपाही बल प्रयोग करने लगे पर मैं उनके काबू में नहीं आया और
चीख चीख कर लोगों को अपना परिचय और घटना बताने लगा। तभी जो लोग घटना
में शुरू से इन्वोल्व थे और थाने में डेरा जमाए हुए थे उनमें से वही नेता
टाइप व्यक्ति आये और अपनी भड़ास थाने के अंदर ही निकालने लगे। मेरी जोर
जोर की आवाज के बाद थाना प्रभारी जी ने पुलिस को बुलाया। थोड़ी देर बाद
थाना प्रभारी जी ने मुझे बुलाया। वहां लगी कुर्सी पर पहले से वही नेता
टाइप व्यकि बैठे हुए थे। थाना प्रभारी ने जानकारी ली तो मैंने उन्हें
पूरी घटना बताई और बताया कि स्टेशन मास्टर से भी मिलकर उन्हें पूरी घटना
बताकर आया हूँ। वहीं से एक युवक बाइक से फाटक पर छोड़ गया। वो लोग मेरे
पीछे थे उनसे बचने के लिए मैंने दुकानदार से हाथ जोड़कर जान को खतरा बताते
हुए सहयोग मांगा था। उसको बिना कोई नुकसान पहुंचाए उसकी दुकान में केवल
सुरक्षित होने के लिए अपने आप को अंदर सिक्योर किया था। मैंने थाना
प्रभारी जी से कहा कि मेरे परिवार को सूचित कीजिए। पर वह सुन नहीं रहे थे।

इसी बीच हाथरस से कुछ पत्रकार साथी आ गए तब जाकर मेरे घर पर फोन किया
गया। तब तक पिताजी सिकन्द्रराव कोतवाली जा चुके थे और मेरी पत्नी ने भी
थाना प्रभारी को फोन पर बताया पापा सिकन्द्रराव पुलिस के पास गए हैं,
उनके साथ आ रहे हैं कहाँ पर आना है। पिताजी कुछ लोगों को लेकर जंगसन थाने
पहुंचे और अपनी सुपुर्दगी में घर लाये। कल मैंने एक ऐसी घटना का
साक्षात्कार किया जिससे में अंदर तक सहम गया। पर परमात्मा की कृपा रही की
मुझे सूझबूझ दी और जिंदा घर आ गया क्योंकि घटना कराने वालों ने योजना तो
बड़ी सोच समझकर और काफी लोगों को लगाकर बड़ी पॉवरफुल  बनाई थी। पर मारना और
बचाना ऊपर वाले के हाथ में है। जान तो बच गयी पर कहीं तक वह लोग सफल भी
हो गए। इस घटना को मैं जीवन भर भूल नहीं सकूँगा। मैंने अपनी अब तक की
पत्रकारिता में जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठाकर जहां कुछ लोगों के
ह्रदय में जगह बनायी तो वहीं कुछ लोगों को निराश भी किया पर आज मुझे
एहसास हो गया कि कलम की आवाज रोकने के लिए पॉवर वाले लोग इतना नीचे जा
सकते हैं। इतनी बड़ी और पॉवरफुल योजना कोई आम बुद्धि वाला व्यक्ति नहीं
बना सकता। खैर जो भी हुआ….. मैं चुप नहीं बैठूंगा।

मेरे साथ हुई घटना नजरअंदाज कर पुलिस ने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। मैं
बताता रहा कि मैं अपनी जान बचाकर स्टेशन पर बताकर आया हूँ। मेरे पीछे
बदमाश थे। अगर पुलिस मेरी बात को भी गंभीरता से लेकर जांच करती तो उन
लोगों को पकड़ा जा सकता था। पर पुलिस ने इस ओर कोई धयान नहीं दिया। जिस
दुकान में मैने शरण ली थी वहां मेरा बैग दुकान के अंदर तख्त पर रखा था
जिसमे मेरा लेपटॉप, कैमरा आदि सामान था। उसमें से मेरा लेपटॉप गायब था।
बाकी सब समान मुझे मिल गया। मैंने इसके शिकायत की तो इसपर भी किसी ने कोई
ध्यान नहीं दिया। मेरी रिपोर्ट तो लिखना दूर मेरी बात तक नहीं सुनी गयीं।
सरजी घटना के बाद से में काफी आहत और दहशत में हूँ।

संदीप पुण्ढीर, ब्यूरो चीफ
दैनिक भास्कर हाथरस
सम्पर्क सूत्र-  9927849965

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पत्रकार गौरव अग्रवाल ने पूछा तीखा सवाल तो तिलमिला गए सीएम योगी (देखें वीडियो)

कल आगरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताज महल में झाड़ू लगाने के बाद एक प्रेंस कांफ्रेंस किया. इसमें एक युवा पत्रकार गौरव अग्रवाल ने उनसे तीखा सवाल पूछ लिया. सवाल था कि पिछली सरकार के जो भ्रष्ट नौकरशाह थे, वे अब योगी जी के इर्दगिर्द दिखने लगे हैं, भ्रष्टाचार के मुद्दे का क्या हुआ? साथ में ये कि युवाओं को रोजगार देने का वादा था, लेकिन ऐसा कुछ तो हो नहीं रहा है.

इन सवालों पर सीएम योगी कहने लगे कि उन्हें इस सवाल पर अफसोस है. सीएम योगी ने इसी सवाल के बाद हाथ जोड़ते हुए अपनी प्रेस कांफ्रेंस खत्म कर दी. सवाल पूछा था युवा पत्रकार गौरव अग्रवाल ने. गौरव पंजाब केसरी और नवोदय टाइम्स टीवी के लिए आगरा में रिपोर्टर हैं. गौरव ऐसे ही कड़वे सवाल पूछने वालों में जाने जाते है. देखें संबंधित वीडियो :

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एफआईआर दर्ज न होने से परेशान यूपी के एक मान्यता प्राप्त पत्रकार ने भेजी भड़ास को चिट्ठी

अर्जुन द्विवेदी ने भड़ास4मीडिया को एक पत्र भेजकर एक एफआईआर दर्ज कराने के बाबत किए जा रहे अपने संघर्ष का उल्लेख किया है और अपनी जान-माल के नुकसान की आशंका जाहिर की है. अर्जुन द्विवेदी यूपी के राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. अर्जुन से संपर्क editorsristimail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है. पढ़िए भड़ास के नाम आई अर्जुन की चिट्ठी…

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