कम प्रतिभा वाले लोगों का मखौल उड़ाता है टाइम्स आफ इंडिया का आज का कार्टून!

Nirendra Nagar-

आज The Times of India के कॉमिक्स पेज पर एक कार्टून छपा है जिसमें पिता अपनी बेटी से पूछता है कि क्या उसे उम्मीद है कि उसका संगीतकार प्रेमी शादी के बाद उसका ख़्याल रख पाएगा?

स्ट्रिप के अगले चित्र में बेटी कहती है, ‘कम-से-कम खाने-पीने के सामान की कमी तो नहीं होगी।’ हम उस चित्र में देख पाते हैं कि नाराज़ श्रोता संगीतकार पर फलों-सब्ज़ियों की बरसात कर रहे हैं (देखें चित्र)।

पता नहीं, आपको इस कार्टून को देखकर हँसी आएगी या नहीं… मगर मुझे नहीं आई। यह कार्टून दरअसल असफल या कम सफल लोगों का मज़ाक उड़ाने की हमारी प्रवृत्ति को दिखाता है। हमारा समाज हर सफल व्यक्ति को सिर-आँखों पर बिठा लेता है और हर असफल व्यक्ति की असफलता के लिए उसी में कोई दोष ढूँढता है। तब तो और भी ज़्यादा जब कोई व्यक्ति रोज़ी-रोटी कमाने, शादी करने और परिवार चलाने की बँधी-बँधाई पटरी पर न चलकर किसी और दिशा में अपनी ख़ुशी और करियर ढूँढ रहा होता है।

हम जानते हैं कि कोई भी सफलता या असफलता कई-कई कारकों का नतीजा होती है और उसके लिए न हम किसी एक व्यक्ति की क्षमता-अक्षमता को पूरा श्रेय दे सकते हैं, न पूरा दोष।

कोशिश करने वालों की (कभी) हार नहीं होती… ऐसी लाइनें केवल कविता के तौर पर या मनोबल बढ़ाने के लिए अच्छी होती हैं। वरना हम जानते हैं कि एक सफल शाहरुख़ ख़ान के पीछे न जाने कितने असफल शाहरुख़ खान हैं जिन्हें उनके परिवार और मुहल्ले के अलावा कोई नहीं जानता। क्या वे केवल इस कारण उतने सफल नहीं हुए कि उनमें प्रतिभा की कमी थी या उन्होंने भरपूर कोशिशें नहीं कीं?

तर्क के लिए मान लेते हैं कि हाँ, कुछ लोगों में प्रतिभा की कमी थी, परिश्रम की कमी थी, कोशिशों की कमी थी। परंतु तब भी क्या हमें उनका मज़ाक उड़ाने का हक़ मिल जाता है?

कभी किसी भी असफल व्यक्ति का मज़ाक उड़ाने से पहले सोचिएगा। सोचिएगा कि जिसके सपने पूरे नहीं होते, वह दिन-रात कैसा महसूस करता होगा? सोचिएगा कि उसको सहारा और तसल्ली देने की ज़रूरत है, समझाने की ज़रूरत है या उसकी खिल्ली उड़ाने की!

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One comment on “कम प्रतिभा वाले लोगों का मखौल उड़ाता है टाइम्स आफ इंडिया का आज का कार्टून!”

  • (यह कार्टून दरअसल असफल या कम सफल लोगों का मज़ाक उड़ाने की हमारी प्रवृत्ति को नहीं दिखाता है।)
    Nirendra Nagar ji, har words ke do ya kei matlab hote hain ya yeh khen ki aap kis angle (nazar) se dekh ya samjh rahen. Jesa ki is cartoon me cartoonist yeh kehna chaata hai ki premi ladki ko bhooka nahi rakhega.

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