उमेश एक दिन के पुलिस रिमांड पर, पुरानी फाइल भी खुली, नया वारंट जारी, गैंगस्टर लगेगा, Y श्रेणी सिक्योरिटी हटेगी

समाचार प्लस चैनल के एडिटर इन चीफ और सीईओ उमेश कुमार के गैंग के लोग स्टिंग के लिए जिस ‘विशेष जैकेट’ को पहनते थे, पुलिस उसकी तलाश में जुटी… उमेश के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है जिसके लिए संयुक्त निदेशक अभियोजन को फाइल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं….

स्टिंग कर ब्लैकमेलिंग के आरोप में घिरे समाचार प्लस चैनल के संपादक उमेश जे कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए एक दिन की पुलिस रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया है। कल सुबह दस से शाम 5 बजे तक उमेश को पुलिस अपनी कस्टडी में रखकर विभिन्न राज से पर्दा हटाने की कोशिश करेगी और पुलिस रिमांड बढ़ाए जाने के लिए भी साक्ष्य जुटाएगी। इस बीच, पुलिस ने उमेश के खिलाफ 2007 में दर्ज मुकदमे में भी वारंट जारी कर दिया है. उमेश जे कुमार के खिलाफ रायपुर थाने में 2007 में मनोरंजनी शर्मा की तरफ से मुकदमा दर्ज हुआ था. इस मुकदमे में पुलिस ने 2010 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी. मगर, इस बीच उमेश शर्मा ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था. स्टिंग ऑपरेशन कर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगने के बाद पुलिस ने इस मुकदमे को रि-ओपन कर दिया है.

पुलिस का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 मार्च 2018 को आदेश दिया है कि छह माह या इससे पुराने मुकदमों पर जहां भी स्टे है, वह स्वत: निरस्त माने जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का हवाला देते हुए पुलिस ने उमेश जे कुमार के खिलाफ दर्ज इस मुकदमे में वारंट जारी कर दिए हैं. इससे उमेश जे कुमार की मुसीबतें बढऩे वाली हैं. पुलिस सूत्रों का कहना है कि जल्द गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, आरोपी उमेश कुमार शर्मा की वाई श्रेणी सिक्योरिटी हटाने की तैयारियां भी शुरू हो गई है. उत्तराखंड पुलिस जल्द ही गृह मंत्रालय में इस संबंध में सिफारिश कर सकती है. इसके लिए पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है. उमेश कुमार शर्मा ने अक्टूबर 2015 में अपनी जान को खतरा बताते हुए केंद्र सरकार से सिक्योरिटी की मांग की थी. इस पर उत्तर प्रदेश पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर उमेश को वाई श्रेणी की सिक्योरिटी दी गई थी. तब से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 12 जवान और कमांडो उमेश की सुरक्षा में तैनात हैं.

उमेश को जान का कोई खतरा नहीं, फर्जी रिपोर्ट पर ली थी सिक्योरिटी

जिस दिन उमेश की गिरफ्तारी हुई थी, तब भी सिक्योरिटी में तैनात जवानों से पुलिस की नोक-झोंक हुई थी. इस दौरान उनके उच्चाधिकारियों को वारंट की कॉपी दिखाई गई. उसके बाद ही पुलिस उमेश तक पहुंच पाई थी.सोमवार को उमेश की पेशी के दौरान भी सिक्योरिटी कोर्ट परिसर के बाहर ही रही. मंगलवार को भी सिक्योरिटी में तैनात जवान परिसर के बाहर ही मौजूद रहे. चूंकि उमेश जेल में है तो इस सिक्योरिटी का मतलब ही नहीं है. साथ ही खुफिया रिपोर्ट यह भी कहती है कि उमेश को कोई धमकी या किसी तरह से जान का खतरा है ही नहीं. लिहाजा उसने यह सिक्योरिटी भी सरकार को गुमराह कर अपने रुतबे के आधार पर हासिल की थी. ऐसे में अब पुलिस की ओर से गृह मंत्रालय से इस सिक्योरिटी को वापस लिए जाने की सिफारिश की जा रही है. एक आला अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में सारी तैयारियां हो चुकी हैं, आगे निर्णय गृह मंत्रालय को लेना है.

विशेष जैकेट बरामद करने के लिए पुलिस लगाएगी विशेष जोर

देहरादून पुलिस को समाचार प्लस चैनल के एडिटर इन चीफ और सीईओ उमेश कुमार से एक विशेष जैकेट बरामद करनी है. यह जैकेट स्टिंग करने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। इसी में खुफिया कैमरे और रिकॉर्डिंग डिवाइस फिट की जाती है. उमेश कुमार और उनके गैंग के लोगों ने समाचार प्लस के एडिटर (इनवेस्टिगेशन) आयुष गौड़ को भी यही जैकेट पहनाकर देहरादून और दिल्ली में भेजा था. आयुष ने अपने चैनल के एडिटर इन चीफ उमेश कुमार के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा है कि देहरादून में मुख्यमंत्री आवास में जाने से पहले उन्होंने यह जैकेट निकालकर बाहर रख दी थी. देहरादून पुलिस ने कोर्ट से उमेश का रिमांड मांगने के लिए इस जैकेट की बरामदगी का भी तर्क रखा है.

सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश से मुकदमें की पुरानी फाइल खुली और वारटं जारी हो गया

इस बीच, सरकार की नजरें बदलते ही पुलिस स्टिंग प्रकरण में जेल में बंद समाचार प्लस चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा के पुराने मामलों को खंगालने में जुटी है. मंगलवार को उमेश पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए एक और मुकदमा मिल गया. जमीन के एक मामले में मनोरंजनी शर्मा की तरफ से 2007 में रायपुर थाने में उमेश शर्मा आदि के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. 2010 में इस मुकदमे के ट्रायल पर हाईकोर्ट से स्थगनादेश मिल गया था, तब से यह मुकदमा सुनवाई पर नहीं आया था. पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में अभियोजन अधिकारियों के साथ मंथन किया था. स्थगनादेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में दिए आदेश का हवाला देकर अभियोजन अधिकारियों ने मंगलवार को कोर्ट में पैरोकारी की. आदेश के अनुपालन में पुलिस ने धोखाधड़ी के मुकदमे के ट्रायल पर आठ साल से चल रहे स्टे को निरस्त कराते हुए कोर्ट से वारंट प्राप्त कर लिया है.

अपने साथ काम करने वालों को उमेश कुमार मेज पर पिस्टल रखकर धमकाता था

उमेश जे कुमार के खिलाफ 13 मुकदमे दर्ज थे, जो भाजपा और कांग्रेस सरकार में वापस किए गए. सरकार को हिलाने और नेता-नौकरशाहों को अपनी मुट्ठी में करने की साजिश के लिए स्टिंग को बतौर हथियार इस्तेमाल करने वाले उमेश जे कुमार को लेकर आयुष गौड़ ने पुलिस को दिए बयान में कुछ और खुलासे किए हैं. इसमें बताया गया है कि उमेश मेज पर पिस्टल रखकर उसे धमकाता था. एसओ राजपुर ने कहा कि रिमांड पर लेने के लिए पिस्टल की बरामदगी को भी आधार बनाया गया है. इसके अलावा पूर्व में किए जा चुके स्टिंग के ऑडियो-वीडियो क्लिप की रिकवरी को भी रिमांड का आधार बनाया जा रहा है.

पुलिस को पिस्टल और अब तक किए गए सभी स्टिंग की तलाश करनी है

राजपुर पुलिस ने उमेश जे कुमार की पांच दिन की कस्टडी रिमांड मांगी है. उमेश ने कई बड़े नेताओं और नौकरशाहों के स्टिंग कर रखे हैं. इसके ऑडियो-वीडियो कहां हैं, यह उमेश के अलावा उसके विश्वासपात्र लोगों को ही मालूम है. आयुष भी कबूल कर चुका है कि वह खुद कई लोगों के स्टिंग कर चुका है, लेकिन उनका अब तक प्रसारण नहीं हुआ है. इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, इस बारे में आयुष गौड़ ने पुलिस को तमाम जानकारियां दी हैं. इसी के आधार पर पुलिस जल्द से जल्द रिमांड लेकर उन उपकरणों को बरामद करना चाहती है, ताकि उनका दुरुपयोग न हो सके. वहीं पुलिस उस पिस्टल को भी बरामद करने की कोशिश में है, जिसे सामने रखकर आयुष को धमकाने का आरोप है. पिस्टल मिलने के बाद उसके लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट संबंधित जिला प्रशासन को भेज दी जाएगी.

उमेश को रिमांड पर लेकर सीडी, पेनड्राइव, मोबाइल आदि को अनलॉक करने के लिए कोड पूछेगी पुलिस

स्टिंग ऑपरेशन कर ब्लैकमेल करने के मामले में फंसे उमेश जे कुमार की मुसीबतें बढऩे वाली हैं. पुलिस रिमांड मिलने के बाद उमेश से बरामद सीडी, पेन ड्राइव और मोबाइल के कोड पूछे जाने हैं. साथ ही पुलिस उमेश की निशानदेही पर कई अन्य सबूत जुटाने का भी प्रयास करेगी. खासकर उमेश के घर से बरामद सीडी पैन ड्राइव, मोबाइल आदि स्टिंग उपकरणों की फॉरेंसिंक जांच कराई जानी है. यह सभी उपकरण कोर्ट में पेश किए गए हैं. पुलिस सूत्रों का कहना है कि बरामद उपकरणों से किसका स्टिंग हुआ है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. कोर्ट की अनुमति पर इसका परीक्षण कराया जाएगा. इसके अलावा मोबाइल और कई इलेक्ट्रानिक उपकरण में गोपनीय कोड होने से उमेश की पुलिस रिमांड ली जा रही है ताकि कोड खोलने के बाद मोबाइल और पेन ड्राइव में सुरक्षित सामग्री के बारे में जानकारी जुटाई जा सके.

उमेश पर इनाम घोषित कर भगोड़ा करार दिया गया था लेकिन कांग्रेस और भाजपा नेताओं का उसे संरक्षण मिलता रहा

जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ब्लैकमेलर स्टिंगबाजों को प्रदेश से बाहर किया. कहा कि उमेश कुमार कई सालों से स्टिंग कर ब्लैकमेलिंग का धंधा चला रहा था. ऊंची पकड़ और अकूत संपत्ति होने के कारण वह सलाखों से बाहर रहा. एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि उमेश जे कुमार पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. इनमें से कुछ मुकदमे उसने अपनी राजनीतिक पहुंच के कारण वापस करा दिए. बताया कि वर्ष 2011 में उस पर इनाम घोषित कर भगोड़ा करार कर दिया गया था. साथ ही उसके खिलाफ लुक आउट का सर्कुलर जारी किया गया था, लेकिन बिना तत्थों के उसे भी निरस्त करवा दिया गया. उन्होंने कहा कि उमेश कुमार के कांग्रेस के साथ ही भाजपा के नेताओं से अच्छे संबंध रहे हैं. इसलिए वह बार-बार बच रहा था. उन्होंने सरकार से ऐसे ब्लैकमेलर स्टिंगबाजों को प्रदेश से बाहर करने की मांग की है.

इस पूरे प्रकरण के बारे में उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट राजीव नयन बहुगुणा का कहना है-

”दलालों, पत्रकारिता छोड़ो…. पत्रकारों, दलाली छोड़ो… ताज़ा पकड़े गए अपराधी, सो कॉल्ड पत्रकार के बारे में मुझे एक बार उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य मंत्री निशंक ने कहा- ”मैं पत्रकार विरोधी नहीं हूं। अगर होता, तो सर्वप्रथम आपके आड़े आता, क्योंकि मेरे बारे में सबसे बुरा आप लिखते रहे आजतक। मैंने उमेश कुमार पर अवश्य हाथ डाला, जो वस्तुतः पत्रकार ही नहीं है।”

तब मैंने कहा, भाई न मैंने कभी इस व्यक्ति का नाम सुना, न इसे देखा, न इसका चैनल देखा। पर अब कल देखूंगा।

अगले दिन मैंने कभी अपने सहयोगी रह चुके अपने विश्वास पात्र अधीर यादव से कहा, ये चोद्दा है कौन? तब अधीर ने उसका चैनल मेरे सामने on कर दिया। देखा कि उस पर एक अधेड़ पत्रकार चीख रहे थे। मैंने कहा, बे बन्द कर यह हाहाकारी नीचता।

फिर मैंने उस दलाल पत्रकार को अपने आत्मीय मित्र हरीश रावत के घर देखा, और रावत के भविष्य के लिए चिंतित हो गया। उसने बप्पी लाहिड़ी की तरह कुत्सित वस्त्र और गहने पहन रखे थे, और उसकी आंतरिक कुरूपता उसकी बॉडी लैंग्वेज से झलकती थी।”

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सुनिए टेप, समाचार प्लस वाला उमेश कुमार सीएम को फंसाने का तरीका समझा रहा अपने एडिटर (इन्वेस्टिगेशन) को!

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