यूपी की लुटेरी पुलिस अब बुजुर्गों को भी नहीं बख्श रही…

Yashwant Singh : हे सोशल मीडिया वालों… जगो.. कल आपके साथ या आपके परिजनों के साथ भी ये हो सकता है… ये उत्तर प्रदेश है… यानि निकृष्ट प्रदेशों में सर्वोपरि… जहां बुजुर्गों के साथ दिनदहाड़े लूट हो जाया करती है… बड़े भाई और देश के वरिष्ठ पत्रकार Sheetal P Singh जी के पिता जी श्री एलपी सिंह जी, जिनकी उम्र 90 के आसपास है, अपनी कार (नंबर DL3C AK 8969) से दिल्ली आ रहे थे.

कानपुर शहर में घुसते ही कांस्टेबल श्री विनोद कुमार यादव जी ने कार रोका और ड्राइवर को हड़काते हुए कागजात मांगे. सारे कागजात दिए जाने के बाद ढेर सारे तर्क कुतर्क धमकी के बाद पोल्यूशन के कागजात न होने का जिक्र करते हुए दो हजार रुपये मांगे. इसने पैसे लेकर पहले तो फर्जी रसीद दी. जब पोल्यूशन कागज न होने के मामले में इतना अधिक जुर्माना किए जाने को लेकर सवाल किया गया तो उसने फर्जी रसीद हाथ से छीन कर फाड़ दिया और बदतमीजी करते हुए कह डाला कि ”जाओ, जो करना हो कर लेना”.

पिता का फोन आते ही शीतल सर खुद इस घटना से हतप्रभ हो गए. आखिर कैसे ये समाजवादी सरकार अपने किसी कारकून को किसी बुजुर्ग के साथ दिनदहाड़े लूट और बदतमीजी की छूट दे सकती है. मैंने कानपुर के एसएसपी शलभ माथुर को फोन कर पूरे प्रकरण की सूचना दी. भाई Sanjay Sharma को इत्तिला किया, जिनने अपने मिडडे अखबार 4PM में विस्तार से खबर छापी.

लखनऊ के ढेर सारे पत्रकार साथियों को जानकारी दी. इतने ढेर सारे दबाव प्रभाव सोर्स सिफरिश के बाद भी वो कांस्टेबल आदरणीय यादव जी अब भी सेवारत हैं और एसएसपी से लेकर डीआईजी तक किंकर्तव्यविमूढ़ लग रहे हैं. क्या यूपी में एक यादव कांस्टेबल इस तरह खुली लूट मचा सकता है कि जिसके आगे बड़े बड़े आईपीएस और बड़े पत्रकार तेल भरते रहें. ये मामला लिटमस टेस्ट है. क्या वो कांस्टेबल सेवा में रहने के योग्य है? क्या वो यादव कांस्टेबल आदरणीय अखिलेश यादव जी के खानदान का सम्मानित सदस्य है कि उसके खिलाफ कार्रवाई में ढील दी जा रही है.

बहुत सारे सवाल हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर यूपी के जंगलराज का क्या कोई हल है? चहुंओर लूट खसोट आतंक रिश्वत का दौर चल रहा है. इस बुरे वक्त के खिलाफ कोई आवाज है? क्या यूपी की किस्मत में अभी भयंकर वाले जंगलराज के दिन आने शेष हैं? शायद ऐसा ही लगता है. क्या इस इस प्रदेश को छोड़ कर पलायन कर जाना ही एकमात्र रास्ता है? जब सरेआम बुजुर्ग लोग, लड़कियां-महिलाएं पीड़ित प्रताड़ित की जा रही हों, हर रोज हर जगह सपा के आतंकी और सपा के कथित रिश्तेदार आम जन का जीना मुहाल किए हुए हों तो ऐसे में क्या रास्ता बचा है?

मुझे पता है आप न बोलेंगे. क्योंकि आप या तो भाजपाई हैं या बसपाई. या फिर पेड सपाई. ऐसे में जब कभी आपके साथ या आपके परिजनों के साथ कुछ होगा तो ध्यान रखिएगा कि कोई न बोलेगा, अकेले रोवेंगे.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से



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