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उर्दू पत्रकारिता परीक्षा विवाद में IIMC को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, छात्रों के हक में फैसला, देखें आदेश

नई दिल्ली। उर्दू पत्रकारिता प्रवेश परीक्षा में देवनागरी लिपि को लेकर उपजे विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) को बड़ा झटका दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने 29 मई 2026 को पारित अंतरिम आदेश में याचिकाकर्ता छात्रों को 1 जून 2026 को होने वाली प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने IIMC द्वारा 26 अप्रैल 2026 को जारी प्रवेश विज्ञापन के आधार पर उर्दू पत्रकारिता पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया था। विज्ञापन में उर्दू के साथ देवनागरी लिपि में उत्तर देने की अनुमति का उल्लेख किया गया था। बाद में संस्थान ने संशोधित सूचना जारी कर कहा कि यह उल्लेख त्रुटिवश प्रकाशित हो गया था और प्रवेश परीक्षा केवल उर्दू नस्तालिक लिपि में ही आयोजित होगी।

इस फैसले को चुनौती देते हुए उपासना कुमारी और एक अन्य अभ्यर्थी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने मूल विज्ञापन पर भरोसा करके आवेदन किया था और वे देवनागरी लिपि में उर्दू पढ़-लिख सकते हैं, लेकिन नस्तालिक लिपि में दक्ष नहीं हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षा से बाहर करना अन्यायपूर्ण होगा।

अदालत ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित किए बिना उन्हें 1 जून 2026 को निर्धारित प्रवेश परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

Front page of a Delhi High Court case document with seal and QR code, header reads 'IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI', listing petitioners and respondents and the date 29.05.2026.

कोर्ट ने IIMC की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

सुनवाई में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कुमार अभिषेक और गौरव यादव ने अदालत के समक्ष ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए जिनमें IIMC के उर्दू विभाग से जुड़े पूर्व वर्षों के प्रश्नपत्रों और शैक्षणिक गतिविधियों में देवनागरी के उपयोग का उल्लेख था। उनका तर्क था कि संस्थान लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर देवनागरी का उपयोग स्वीकार करता रहा है, इसलिए अचानक प्रवेश परीक्षा में इसे प्रतिबंधित करना उचित नहीं है।

वहीं IIMC की ओर से दलील दी गई कि संस्थान को अपनी प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा की शर्तें तय करने का अधिकार है तथा याचिका निराधार है।

विवाद की पृष्ठभूमि

IIMC ने 26 अप्रैल 2026 को जारी प्रवेश अधिसूचना में उर्दू पत्रकारिता पाठ्यक्रम की परीक्षा के लिए उर्दू के साथ देवनागरी लिपि में उत्तर देने की अनुमति का उल्लेख किया था। बाद में संस्थान ने 6 मई 2026 को संशोधित विज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया कि प्रवेश परीक्षा केवल उर्दू नस्तालिक लिपि में होगी और पहले प्रकाशित सूचना त्रुटिवश जारी हुई थी।

इसी बदलाव के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब अदालत के अंतरिम आदेश के बाद याचिकाकर्ता छात्र 1 जून को होने वाली प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जबकि मामले के गुण-दोष पर अंतिम सुनवाई जुलाई में होगी।

आदेश का सार

29 मई 2026 को जारी एक पृष्ठीय आदेश में न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि:

  • IIMC का जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया जाता है।
  • याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया जाता है।
  • याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें 1 जून 2026 की प्रवेश परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।
  • मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी।

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उर्दू पत्रकारिता प्रवेश परीक्षा में देवनागरी लिपि के उपयोग को लेकर चल रहे विवाद में याचिकाकर्ता छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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