लखनऊ के पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने पत्रकार नेता विक्रम राव को जालसाज कहा!

के.  विक्रम राव  अपने झूठ, फरेब, जालसाजी और फर्जीवाड़े के लिए कुख्यात रहे हैं। लेकिन अब जयंत वर्मा जाँच समिति  की रिपोर्ट के बाद से वे इतना बौखला उठे हैं कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा है। हालाँकि उन्हें आई. एफ. डब्लू. जे. से कब का निष्कासित किया जा चुका है लेकिन यह जाल-साज संगठन के नाम का बेजा इस्तेमाल करने से बाज नहीं आ रहा है और आई. एफ. डब्लू. जे. पदाधिकारियों के खिलाफ मिथ्या ख़बरें फैला रहा है। उनकी बढ़ती हुई बेचैनी ही उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ रही है।  क्योँकि जाँच समिति के अध्यक्ष श्री जयंत वर्मा पिछले दो दिनों से लखनऊ में हैं और उन्होंने उन स्थानों का दौरा किया जहाँ पर आई. एफ. डब्लू. जे. के प्रेस का उपयोग हुआ और तमाम धांधलियां की गई।  जयंत वर्मा समिति ने लखनऊ के तमांम अधिकारियों के बयान भी दर्ज किये हैं जो विक्रम राव की १०० करोड़ रुपए से ज्यादा की धांधली को उजागर करते हैं।  श्री जयंत वर्मा समिति के अन्य सदस्य सिद्धार्थ कलहंस और मोहम्मद कामरान भी उनके साथ थे। 

विक्रम राव का एक ताजा झूठ व्हाट्सएप्प पर प्रचारित किया है।  जिसमें उन्होंने  कहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री टी. एस. ठाकुर ने बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया से कहा है कि वह आई. एफ. डब्लू. जे. के महासचिव परमानन्द पांडेय के खिलाफ कार्रवाई करें।  मानसिक  रूप से विक्षिप्त ही ऐसी शोशे बाजी कर सकता है।  यह कितना हास्यास्पद है कि विक्रम राव  सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, बार कौंसिल और अन्य बार संगठनों का नाम लेकर अपने को बचाना चाहते हैं। खैर, उन्हें अपनी गढ़ी दुनिया में रहने दीजिये। 

वस्तुस्थिति यह है कि श्री परमानन्द पांडेय सुप्रीम कोर्ट  ऑफ़ इंडिया में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड हैं और आई. एफ. डब्लू. जे.  के महासचिव भी हैं।  सम्भवतः विक्रम राव को ट्रेड यूनियन एक्ट की धारा – २२(२) का ज्ञान नहीं है।  इसीलिए वह ऐसी बेतुकी बातों से सभी  को दिगभ्रमित  करना चाहते हैं और अपनी जालसाजियों से ध्यान हटाना चाहते हैं। पूरे भारत में सैकड़ों नहीं अपितु  हजारों की संख्या में ऐसे वकील हैं  जो तमांम श्रमिक संघों, राजनीतिक पार्टियों और दूसरी पंजीकृत संगठनों के सदस्य एवं पदाधिकारी भी हैं।  दूर जाने की जरूरत नहीं है।  स्वर्गीय एम. के. रामा मूर्ति सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता थे और साथ ही आई. एफ. डब्लू. जे. के महासचिव रहे।    श्रमिकों के लिए उनकी लड़ाई और योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।  लेकिन कौन कहे विक्रम राव से  जो धोखाधड़ी के लिए जाने जाएगें। सभी सदस्यों  को हम यह बता दें विगत २-३ मार्च को बेंगलोर में विक्रम राव, उनके पुत्र और उनके  कुछ लगुओं-भगुओं ने मुख्य मंत्री के कार्यालय और बाबा आंबेडकर की तस्वीर का अपमान किया था जिसके लिए शीघ्र ही उनके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है। 

अपनी झूठी खबर में उन्होंने चेन्नई पुलिस को दी गई शिकायत और विधवा विलाप का  उल्लेख किया है।  लेकिन हमें यह बताने में गर्व  है कि पिछले महीने आई. एफ. डब्लू. जे. के अध्यक्ष बी. वी. मल्लिकार्जुनय, उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी, महासचिव परमानन्द पांडेय, सचिव के. असदुल्ला, सी. यू.जे. प्रेजिडेंट अंबजगन सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ एक पुस्तक का विमोचन किया था जो सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त की गई जानकारी पर है।  आई. एफ. डब्लू. जे. का वर्तमान नेतृत्व भ्रष्ठाचार  से लड़ाई के प्रति कटिबद्ध है,इसीलिए भ्रष्ठाचार में आकंठ डूबे विक्रम राव की बौखलाहट देखते ही बन रही है। श्री राव के अंदर इतना नैतिक सहस नहीं है कि वे अपने नाम से कुछ लिख भी सके।  इसीलिए एक बेचारे और लगभग अनपढ़ संतोष चतुर्वेदी की आड़ में मिथ्या  प्रचार कर रहे हैं।  साथियों, ईमानदारी विक्रम राव के लिए दुःस्वप्न की तरह है लेकिन हम ऐसे लोगों के खिलाफ लड़ने की अपनी कसम को दोहराते हैं। 

आई. एफ. डब्लू. जे. जिंदाबाद                 
सिद्धार्थ कलहंस
(सचिव उत्तरी)

Vikram Rao losing balance in the heat of Enquiry Committee Report

K. Vikram Rao is known for his frauds, cheating, distortions and lies is now feeling the heat of being exposed because the Jayant Verma Inquiry Committee is soon going to release the while paper on his misdeeds. He has already been expelled from the IFWJ but he is still spreading lies and canards against IFWJ and its Office Bearers by using the name of organisation. His growing unease is driving him mad. Com. Jayant Verma, the head of the Inquiry Committee, was in Lucknow for two days and he visited number of places and met many journalists and officials and recorded their statements on bungling and financial irregularities of K. Vikram Rao and his family. Com. Verma was assisted by other two members of the Committee: Siddharth Kalhans and Mohd. Kamran.

The latest bluff of Vikram Rao is his message on ‘whatsapp’ saying that the Chief Justice of the Supreme Court of India Shri T.S. Thakur has asked the Bar Council of India for initiating action against Parmanand Pandey. It is ridiculous. Only mentally challenged people drop names like Vikram Rao. If he thinks that by dropping the names of the Supreme Court, Delhi High Court, Bar Council and the Bar Associations, he will be able to save himself, then let him live in his own make-believe world. Com. Parmanand Pandey is an Advocate-on-Record in the Supreme Court of India and he is also the Secretary General of the IFWJ. Perhaps Shri Vikram Rao does not know that Section 22(2) of the Trade Union Act provides that he can be the office bearer of the IFWJ. Thousands of advocates all over the country are the office bearers of the Trade Unions, Political Parties and other registered organisations. There is no bar on them. Why to go far away, the late M.K. Rama Murthy, a celebrated Senior Lawyer of the Supreme Court of India was also the Secretary General of the IFWJ. His contributions to the Labour jurisprudence are praised all over. But you cannot convince a cheat and a fraud like Vikram Rao, that too, when he is in extreme desperation.  

Let it be known to all members that Karnataka Police can take action against Mr. Vikram Rao, his son and his cronies on any day for desecrating the office of the Chief Minister and also the portrait of Baba Sahab Ambedkar on March 2/3 in Bangalore. Nobody knows what complaint has he made to the Chennai Police but we feel proud to say that the IFWJ President B.V. Mallikarjunaiah, Vice-President Hemant Tiwari and Secretary General Parmanand Pandey, Secretary K. Asudhulla, CUJ President V. Anbazhagan along with many other office bearers of the IFWJ released a book in the Chennai Press Club exposing the corruption in the government departments from 2007 onward. IFWJ’s present leadership is for zero tolerance on the issues of corruption but any fight against corruption make Shri Vikram Rao makes him jittery because he has always been neck deep in corruption. He does not have the guts to say something and that is why; he hides behind the persons like poor Santhosh Chaturvedi, who unfortunately is hardly better than an illiterate person to spread lies. Honesty is a nightmare for Vikram Rao but we vow to fight against persons like him.

Long live IFWJ  
Siddharth Kalhans
(Secretry North)

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