बेटा, यह है पत्रकारिता, जो हमारे जमाने में व्हाट्सएप, फेसबुक से नहीं होती थी…

Riyaz Hashmi : हर जगह यह स्थिति है। जिलों में तो हालात भयंकर हैं। समझाने की कोशिश भर की है कि पत्रकार को क्या बात अलग करती है। संदेश पहुंचे तो वरिष्ठजन आशीर्वाद दें। कहानी कुछ यूं है। क्लास रूम में एक वरिष्ठ पत्रकार पत्रकारिता के विद्यार्थियों से एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा करने पहुंचा, तभी एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई।

पत्रकार : घूरते हुए, सीटी किसने मारी?

कोई जवाब नहीं।

पत्रकार ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़ा। स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं। अचानक पत्रकार रुका, वापस अपनी टेबल पर पहुँचा और बोला, चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ , इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा। सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने लगे। पत्रकार बोला, कल रात मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ, जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा। पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर आधी रात को सुनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा।

अचानक एक चौराहे के कार्नर पर एक बहुत खूबसूरत लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली खड़ी नजर आई। पत्रकार ने कार रोकी और उससे पूछा, क्या मैं सहायता कर सकता हूं? उसने कहा, उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी। पत्रकार ने सोचा, नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है, चलो इसे इसके घर छोड़ देता हूँ। वो बगल की सीट पर बैठी। रास्ते में दोनों ने बहुत बातें कीं। वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों टॉपिक्स पर उसका कमांड था। जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से पहले वह पत्रकार के नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और बोली, वह उससे प्यार करने लगी है। वह खुद भी उसे पसंद करने लगा था। उसने उसे बताया, वह यूनिवर्सिटी में बतौर पत्रकार लेक्चर देने आया था।

वह बहुत खुश हुई। फिर उसने मोबाइल नंबर लिया और अपना नंबर दिया। अंत में उसने बताया, उसका भाई भी उस यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है, जहां उसका लेक्चर था और उसने रिक्वेस्ट की कि वह उसके भाई का ख़याल रखे। पत्रकार ने कहा, तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर मुझे बेहद खुशी होगी। क्या नाम है तुम्हारे भाई का?

इस पर लड़की ने कहा, बिना नाम बताए भी आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है। जैसे ही पत्रकार ने सीटी वाली बात की तो तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ देखने लगे, जिसने पत्रकार को देखकर सीटी बजाई थी।

पत्रकार उस लड़के की तरफ घूमा और उसे घूरते हुए बोला, बेटा, यह है पत्रकारिता, जो हमारे जमाने में व्हाट्सएप, फेसबुक से नहीं होती थी। संघर्ष का नाम है पत्रकारिता।  हरामखोर निकल क्लास से बाहर…!!

लेखक रियाज हाशमी सहारनपुरके वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Comments on “बेटा, यह है पत्रकारिता, जो हमारे जमाने में व्हाट्सएप, फेसबुक से नहीं होती थी…

  • आशीष चौकसे says:

    कहानी पत्रकार ने स्वतः की सुनाई तो पत्रकार शब्द की बजाय “मैं /मैंने” शब्द यूज होने थे।

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