Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

मुंबई के एक संपादक पर 50 करोड़ का मानहानि का मुकदमा

दबंग दुनिया अखबार के मुंबई के स्थानीय संपादक उन्मेष गुजराथी पर गौरव गोयनका ने पचास करोड़ रुपये का मानहानि का दावा किया है. ऐसा उन्होंने एक खबर छापने के कारण किया है जिसका शीर्षक है- ”ट्विंकल का गोयनका फरार : 4,900 करोड़ की लूट”. इस न्यूज के छापने पर दबंग दुनिया के रेसिडेंट एडिटर उन्मेष गुजराथी पर 50 करोड़ का दावा ठोका गया है.

उन्मेष पूछते हैं कि उन्होंने ऐसा क्या झूठ छाप दिया, ऐसा क्या गुनाह कर दिया कि गौरव गोयनका इतना गुस्सा हो गए. लीजिए वो खबर पढ़िए जिसके कारण गौरव गोयनका ने मानहानि का मुकदमा ठोंका है.

‘ट्विंकल’ का गोयनका फरार: 4,900 करोड़ की लूट

18 लाख निवेशकों की कमाई डूबी

दबंग दुनिया: उन्मेष गुजराथी

नरेंद्र मोदी ने चौकीदार बनने का वादा किया था, लेकिन उनकी नाक के नीचे से ‘नीरव मोदियों’ के भागने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब 4,900 करोड़ का घोटाला कर मीराह होटल चेन का मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव गोयनका फरार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह कहा है कि गोयनाका देश से लापता है। सवाल उठ रहे हैं कि मोदी सरकार यदि विजय माल्या के भागने के बाद ही सतर्क हो गई होती, तो नीरव मोदी, मेहुल चोकसी सहित कई बड़े लुटेरे देश के करोड़ों रुपए लेकर फरार नहीं हो पाते।

अचानक लापता कैसे?

सुप्रीम कोर्ट द्वाराअचानक गोयनका के लापता होने की बात कहे जाने से कई तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि गोयनका दो पोंजी स्कीम में शामिल हैं और 18 लाख निवेशकों की रकम लगभग 4900 करोड़ रुपए लेकर फरार हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे लगातार बैंकों और चिटफंड में घोटाले कर के कोई फरार हो रहा है और पीएम मोदी इसे रोकने में नाकाम है।

साथ-साथ कई भागे!

गोयनका के भागने के बाद तरह-तरह की बातें हो रही हैं। पोंजी योजनाओं के निवेशकों के समूह के कानूनी सलाहकार ने एपेक्स कोर्ट को बताया है कि गोयनका दुबई में छुपा है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि साइट्रस चेक इन्स लिमिटेड और रॉयल ट्विंकल स्टार क्लब के अन्य सभी निदेशक भी देश से भाग गए हैं। इस तरह की आशंका यदि सही है और सचमुच कई बड़े निदेशक फरार हो चुके हैं, तो यह देश में लूट का एक बड़ा मामला है।

इस तरह की लूट से मेहनत की कमाई के देशवासियों के पैसे अब वापस उन्हें मिलेंगे कि नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। वहीं ज्ञात हो कि गोयनका के वकील ने भी इस मामले में बयान दे दिया है। गोयनका के वकील ने कहा है कि उन्हें गौरव गोयनका का तो पता नहीं है, लेकिन अदालत के निर्देशों के बाद मुंबई में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के साथ उनके पिता ओमप्रकाश गोयनका के पासपोर्ट जमा किए गए हैं।

गोयनका ही मास्टरमाइंड

मिराह होटल श्रृंखला के प्रमोटरों ने दो सामूहिक निवेश योजनाएं (सीआईएस), रॉयल ट्विंकल स्टार क्लब और साइट्रस चेक इंन्स लिमिटेड की स्थापना की, जो अब मुकदमेबाजी में फंस गए हैं। इन योजनाओं के निवेशकों का आरोप है कि गौरव गोयनका मिराह घोटाले के पीछे मास्टरमाइंड हैं। इस आरोप से किसी बड़ी साजिश की गंध आती है। यह समझ में नहीं आता कि आखिर सरकार इन समस्याओं से मुंह फेरे क्यों बैेठी है? यह तो तय है कि ऐसे घोटालों के कारण मोदी सरकार बदनाम तो हो ही गई है, लेकिन फिर भी सुधर नहीं रही है। निवेशक समूह ने आरोप लगाया है कि गौरव गोयनका ही इस धोखाधड़ी में मास्टरमाइंड हैं और उनकी जांच होनी चाहिए।

कई कंपनियां शामिल!

अदालत में न्याय की लड़ाई लड़ने वाले निवेशकों का आरोप है कि यह समूह अपनी होटल श्रृंखला का विस्तार कर रहा है और करीब 100 कंपनियां इसमें हैं। लेकिन समूह ने इस बात को लेकर अदालत में दूसरा रुख रखा है। उसने बताया है कि इसकी केवल 30 कंपनियां ही हैं। लेकिन आरोप की ओर देखें तो यह लगता है कि यह मामूली अपराध नहीं है, बल्कि एक बड़ा गिरोह इसके पीछे है, जिसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

महाराष्ट्र के अलावा गोवा, कर्नाटक और गुजरात के हैं निवेशक

गौरतलब है कि 23 मार्च को न्यायमूर्ति नरीमन सहित सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने दो योजनाओं के निवेशकों द्वारा दायर इस मामले की सुनवाई की। रॉयल ट्विंकल और साइट्रस ने निवेशकों को महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और गुजरात से जोड़ा था। गौरतलब है कि लापरवाही के कारण न केवल महाराष्ट्र बल्कि कई अन्य राज्यों के निवेशकों को चूना लग गया है। गौरतलब है कि इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को है।

अंधेरे में रखा गया

दस साइट्रस निवेशकों ने एनसीएलटी से हस्तक्षेप याचिकाओं को दर्ज करने के लिए संपर्क किया। इन निवेशकों ने आरोप लगाया है कि एनसीएलटी को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आॅफ इंडिया (सेबी), सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (एसएटी) और सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों के बारे में अंधेरे में रखा गया था, जिसमें प्रमोटरों को दो साल में पैसे चुकाने को कहा गया था। एसएटी ने सेबी के आदेश को बरकरार रखा और 2014 में इस योजना पर प्रतिबंध लगा दिया।

बैन लगा था, तो फरार क्यों?

सेबी ने 2015 में अवैध रूप से धन जुटाने मामले में एक बड़ी कार्रवाई की थी। मार्केट रेग्युलेटर ने अवैध रूप से 2,656 करोड़ रुपए जुटाने के एक मामले में रॉयल ट्विंकल स्टार क्लब और उसके चार निदेशकों पर चार साल का बैन लगा दिया था। कंपनी ने यह सब टाइम शेयर हॉलिडे प्लान्स की आड़ में किया गया। सेबी की अवैध मनी पूलिंग योजनाओं पर पैनी नजर थी। सेबी ने रॉयल ट्विंकल स्टार क्लब और उसके अधिकारियों को निवेशकों को किए गए रिटर्न के वादे के साथ पूरी रकम तीन महीनों के भीतर लौटाने के निर्देश दिए थे।

यह चार साल का प्रतिबंध कंपनी के अलावा उसके चार निदेशकों ओमप्रकाश बसंतलाल गोयनका, प्रकाश गणपत उतेकर, वेंकटरमन नटराजन और नारायण शीवरम कोटनिस पर भी लागू होने की बात कही थी। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन ने आदेश में कहा था कि यह देखा गया है कि रॉयल की ग्रुप कंपनियों की नेटवर्थ 181.39 करोड़ रुपए है, जो कुल स्वीकार की गई 2,656 करोड़ रुपए की तुलना में काफी कम है, जो उसने अपनी नौ योजनाओं के माध्यम से जुटाई थी।

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन