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सहारा प्रबंधन ने 28 तक सेलरी देने को कहा, कर्मी बोले- तब तक मास्टर एडिशन ही छपेगा

राष्ट्रीय सहारा अखबार में हड़ताल के कारण केवल मास्टर एडिशन का प्रकाशन हो रहा है. इस मास्टर एडिशन में स्थानीय खबरें नहीं होतीं. केवल सेंट्रलाइज पेज बनाकर उसे आल एडिशन छपवा दिया जा रहा है, मास्टर एडिशन के रूप में. हड़ताल के कारण लखनऊ में भी मास्टर एडिशन का प्रकाशन चल रहा है जिसमें लखनऊ की एक भी खबर नहीं है. हड़ताल को लेकर मैनेजमेंट सक्रिय हो गया है.

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राष्ट्रीय सहारा अखबार में हड़ताल के कारण केवल मास्टर एडिशन का प्रकाशन हो रहा है. इस मास्टर एडिशन में स्थानीय खबरें नहीं होतीं. केवल सेंट्रलाइज पेज बनाकर उसे आल एडिशन छपवा दिया जा रहा है, मास्टर एडिशन के रूप में. हड़ताल के कारण लखनऊ में भी मास्टर एडिशन का प्रकाशन चल रहा है जिसमें लखनऊ की एक भी खबर नहीं है. हड़ताल को लेकर मैनेजमेंट सक्रिय हो गया है.

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प्रबंधन की तरफ से कहा गया है कि 28 अप्रैल तक सेलरी दे दिया जाएगा, इसलिए सभी लोग काम पर लौटें. कर्मचारियों ने भी कह दिया है कि 28 तक यानि सेलरी मिलने तक वो लोग मास्टर एडिशन ही निकालेंगे. लखनऊ से खबर मिली है कि 28 तक मास्टर एडीशन निकालेंगे लखनऊ के राष्ट्रीय सहारा के कर्मचारी. मैनेजमेंट ने वादा किया कि 28 अप्रैल तक बैंक एकाउन्ट में फरवरी की सेलरी चली जाएगी. यदि नहीं तो 29 अप्रैल का अंक मार्केट में नहीं आएगा. कर्मचारी कह रहे हैं कि सबसे ज्यादा राजस्व लखनऊ यूनिट देता है तो फिर सेलरी क्यों नहीं.

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0 Comments

  1. कुमार कल्पित

    April 23, 2016 at 4:44 pm

    तो इसके लिए दोषी कौन । आखिर बार_बार अपने ही कर्तव्ययोगियों को हडताल का सहारा क्यों लेना पड रहा है। मीडिया कर्मी न प्रमोशन के लिए हडताल कर रहे हैं न इंक्रीमेंट के लिए जबकि अन्य अखबारों के कर्मचारी नए वेज बोर्ड की मांग कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि प्रबंधन बार बार दावा करता है कि देनदारी से क ई गुना ज्यादा हमारी संपत्तियां हैं तब वेतन देने के लाले क्यों पड रहे हैं। कहीं यह सब सोची समझी रणनीति के तहत तो नहीं हो रहा है कि हम हम अदालत में दलील दें कि आपही के कारण हम अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं। गौरतलब है कि कोर्ट भी इस तरह की टिप्पणी कर चुका है कि ” एक तरफ तो २ लाख करोड की संपत्ति का दावा कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ १० हजार करोड जमानत की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों को याद होगा कि सुब्रतो राय ने समय समय पर ईमेल के माध्यम से अपनी बेहतर स्थिति का दावा किया था। यही नहीं १५ अगस्त , २६ जनवरी और सहारा के स्थापना दिवस पर भी सुब्रतो राय संस्था की माली हालत बहुत ज्यादा मजबूत होने का दावा करते रहे हैं। याद करिये सुब्रतो राय की पुस्तक के विमोचन का अवसर। नोएडा के समारोह में उपेन्द्र राय भी सहारा की माली हालत अच्छी होने का दावा कर चुके हैं।
    अब सवाल यह उठता है कि कर्मचारियों को बार बार हडताल के मुहाने तक ले जाना सोची समझी रणनीति का हिस्सा तो नहीं?

  2. रुपाली राज

    April 23, 2016 at 5:01 pm

    इस स्थिति के लिए यूनिट हेड ही दोषी
    ………………………………………….
    राष्ट्रीय सहारा लखनऊ संस्करण में हुए कार्य बहिष्कार के लिए यूनिट हेड देवकी नंदन मिश्र का गुरूर ही जिम्मेदार है। गौरतलब है कि संपादकीय विभाग सहित अन्य विभागों के कर्मचारी काम रोककर नीचे रिशेप्शन पर आ गए थे। थोडी देर बाद यूनिट हेड (जो कि खुद अदना से रिपोर्टर थे वो भी गोरखपुर जैसे छोटे से शहर में ) आये और आते ही समझाने को कौन कहे हडकाने लगे। इसी बीच विपिन नामक नामक कर्मचारी ने माली हालत खराब होने का जिक्र करते हुए कहा कि ” अब तो नौबत आत्महत्या करने की आ गई है। बस इतना कहना क्या वे हत्थे से उखड गए। कहा प” तो कर ना लीजिए आत्महत्या, रोक कौन रहा है, मैं प्रबंधक ही नहीं हूं….. मैं अखबार छपवा लूंगा आदि आदि। तो छपवा लें । इसी तरह मास्टर एडिशन निकलवाते रहें ।

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