रोहतक में अखबार विक्रेताओं की हड़ताल से व्यापारियों को दोहरा झटका

रोहतक शहर के अखबार विक्रेता अपनी मागों को लेकर तीसरे दिन भी हड़ताल पर बैठे रहे। इस हड़ताल के चलते समाचारपत्र कम्पनियों के पसीने छूट गए हैं। आलम ये है कि शहर के मुख्य चौराहों तथा पार्कों में अखबार के प्रतिनिधि खुद जाकर लोगों को अखबार बाँट रहे हैं। कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर वेंडर्स आज भी टस से मस नहीं हुए। इससे आज भी शहर के दुकानों तथा घरों में अखबार नहीं पहुंच पाया।

अखबार कम्पनियों की तरफ से देर रात तक वेंडर्स को मनाने की कोशिशें चलती रही, लेकिन सुबह तक कोई बीच का रास्ता नहीं निकल पाया। इसके चलते वेंडर्स ने आज भी अखबार बांटने से इन्कार कर दिया। वेंडर्स की हड़ताल के चलते हरिभूमि, जागरण, भास्कर जैसे बड़े समाचारपत्रों में आज केवल नाममात्र विज्ञापन छपे हैं। इस विवाद के चलते सबसे ज्यादा परेशानी उन व्यापारियों को उठानी पड़ रही है जिन्होंने हजारों रूपए देकर दिवाली पर अखबारों में विज्ञापन बुक करवाए थे, पर दिवाली के दिन उनके अरमानों पर पानी फिर गया। अब ना तो कम्पनियाँ उनके पैसे वापिस दे रही हैं ना ही उनका विज्ञापन दोबारा छापने की बात कह रही हैं।

सुबह 6:15 बजे तक की खबर के मुताबिक आज कई अखबारों की छपाई या तो हुई ही नहीं या बेहद कम हुई। इससे अखबारों को रोजाना लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आपको बता दें कि कुछ महीने पहले लखनऊ के अखबार विक्रेताओं ने भी इसी तरह कई दिनों तक हड़ताल जारी रखी थी।

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फिल्म और टीवी कामगारों ने महाराष्ट्र सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म करने की घोषणा की

मुंबई में फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल खत्म हो गई है। महाराष्ट्र के श्रममंत्री संभाजी निलंगेकर पाटिल के आश्वासन के बाद आज बुधवार को  फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज की ओर से आयोजित 22 यूनियनों की हड़ताल समाप्त कर दी गयी। यूनियन पिछले 14 अगस्त की रात 12 बजे से हड़ताल पर थी। इस हड़ताल में शामिल कामगारों को श्रममंत्री संभाजी निलंगेकर पाटिल तथा भाजपा के मुम्बई अध्यक्ष और विधायक आशीष शेलार और पूर्व विधायक तथा नगर सेवक अतुल शहा ने भरोसा दिया कि हड़ताली कामगारों की मांग को लेकर सरकार गंभीर है और कामगारों के पक्ष में सरकार ठोस कदम उठाने जा रही है।

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा के मुताबिक श्रममंत्री के साथ बुधवार को फेडरेशन के पदाधिकारियों और फ़िल्म तथा टीवी शो निर्माताओं की एक बैठक भी  रखी जानी थी। यह बैठक महाराष्ट्र सरकार के श्रममंत्री संभाजी पाटिल निलंगेकर ने मंत्रालय की सातंवी मंजिल पर स्थित परिषद सभागृह क्रमांक पांच में बुलायी थी जिसमें भाजपा के मुंबई अध्यक्ष और विधायक आशीष शेलार, पूर्व विधायक तथा नगरसेवक अतुल शहा, प्रधान सचिव (कामगार), कामगार आयुक्त, फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने इंप्लाईज के पदाधिकारी और प्रतिनिधि तथा प्रोड्युसर अशोसिएशन के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित लोगों को भी मौजूद रहना था लेकिन मुम्बई में भारी बारिश के कारण और सरकार द्वारा अवकाश घोषित होने के बाद यह बैठक स्थगित कर दी गयी।

श्रम मंत्री ने फेडरेशन को आश्वस्त किया है कि फ़िल्म और टीवी कामगारों के पक्ष में सरकार एक ठोस कदम उठाएगी जो एक नजीर बनेगी। साथ ही राज्य के श्रम मंत्रालय ने फेडरेशन से निवेदन किया कि तब तक आप अपनी हड़ताल वापस ले लें। इसके बाद फेडरेशन ने हड़ताली कामगार यूनियनों के साथ एक बैठक किया और सबकी सहमति से सरकार पर भरोसा जताते हुए हड़ताल समाप्ति की घोषणा की गई। फिल्म और टीवी इंडस्ट्रीज में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर थे।

मुंबई के पत्रकार शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ९३२२४११३३५

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भारी बारिश को देखते हुए फ़िल्म और टीवी के हड़ताली कामगारों को दिया गया 16 घंटे का ब्रेक

मुम्बई के गोरेगांव स्थित फिल्मसिटी स्टूडियो के बाहर डटे फ़िल्म-टीवी कामगारों की हड़ताल मंगलवार को 15वें दिन भी जहां जारी रही.  हड़ताली कामगार भारी बारिश में भी हड़ताल पर डटे थे. वहीं मंगलवार को मुम्बई में हो रही भारी बारिश और गणपति के पांचवे दिन के विसर्जन को देखते हुए फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने इस हड़ताल में शामिल सभी लोगों से दोपहर में निवेदन किया कि सभी लोग अपने घर चले जाएं। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कई कामगारों को निजी वाहन से उनके घर तक पहुंचाया ताकि किसी हड़ताली कामगार को किसी प्रकार की दिक्कत न हो लेकिन कुछ हड़ताली कामगार वहां से हटने को तैयार नहीं हुए तथा कैम्प में डटे रहे। बाद में किसी तरह समझा बुझाकर उन्हें वापस घर भेजा गया।

अब बुधवार को फिर सुबह सात बजे से हड़ताली कामगार फिल्मसिटी के सामने हड़ताल में शामिल होंगे। बुधवार को ही फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज और फ़िल्म और टीवी निर्माताओं के साथ एक बैठक महाराष्ट्र के श्रम मंत्रालय ने दोपहर 12:30 से मंत्रालय में रखा है। उधर इस हड़ताल के कारण कई फ़िल्म और टीवी शो की शूटिंग पर भी असर पड़ा है। कई फिल्मों में एक्शन सीन और जूनियर आर्टिस्ट के साथ वाली शूटिंग नही हो पा रही है। कई जगह जरूरी इक्यूपमेंट नहीं मिल रहा है जिसमें शूटिंग प्रभावित हो रही है। इस हड़ताल में फ़िल्म और टीवी शो निर्माण से जुड़ी 22 यूनियनें शामिल हैं। फिल्म और टीवी इंडस्ट्रीज में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

शशिकांत सिंह
मुंबई
9322411335

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‘भाबीजी’ शिल्पा शिंदे बन गईं नेताजी, हड़ताली कर्मियों के पक्ष में दिया जोरदार भाषण (देखें वीडियो)

फ़िल्म-टीवी वर्कर्स की स्ट्राइक में एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे भी हुईं शामिल… मुम्बई के फिल्मसिटी स्टूडियो के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पिछले 9 दिन से हड़ताल पर बैठे सिनेमा और टेलीविजन कामगारों, टेक्नीशियन और महिला कलाकारों का उत्साह बढ़ाने ‘भाभी जी घर पर हैं’ की अभिनेत्री शिल्पा शिंदे भी पहुंचीं। शिल्पा शिंदे ने कामगारों द्वारा उठाई गयी मांग को जायज ठहराया और कहा निर्माता जानबूझकर अपनी शूटिंग इतनी दूर रखते हैं ताकि उनका पैसा बचे। उनके इतने दूर शूटिंग रखने से टेक्नीशियनों को कोई फायदा नहीं रहता।

शिल्पा शिंदे ने कहा कि जब मैं निर्माताओं का ध्यान किसी की परेशानी की ओर दिलाती हूँ तो मुझसे कहा जाता है आप मदर टेरेसा क्यों बनना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि एंटरटेंनमेंट इंडस्ट्रीज में जब तक आप काम कर रही हैं तब तक आपका काफी रिस्पेक्ट है। जैसे ही आपने अपनी उचित मांग सामने रखी, लोगों के तेवर बदल जाते हैं। शिल्पा ने कहा कि मैं आज भी शूटिंग कर रही हूँ। शिल्पा शिंदे ने कहा कि हड़ताल पर बैठे लोगों की मांग इतनी गंभीर भी नहीं है कि उसे ना माना जाए। टेक्नीशियन एक परिवार हैं। निर्माता आगे बढ़कर उनकी समस्याओं को सुनें। वे अपनी समस्या निर्माताओं को नही बताएंगे तो किसको बताएंगे।


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इस अवसर पर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाई के प्रेसिडेंट बी एन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने शिल्पा शिंदे का स्वागत किया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले नौ दिन से हड़ताल पर हैं। हड़ताल करने वालों का कहना है जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाती, हमारी हड़ताल जारी रहेगी। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर हैं। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज (FWICE) संगठन के साथ 22 और संगठन भी हड़ताल पर गए हैं। हड़ताल करने वाले संगठनों का कहना है कि उनकी आठ घंटे की शिफ्ट की जाए। साथ ही जहां पर फिल्म की शूटिंग होती है वहां पर साफ सफाई नहीं रहती। शौचालय की सुविधा नहीं रहती। बहुत गंदगी रहती है।

‘भाबीजी’ फेम शिल्पा शिंदे का भाषण सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

मुंबई से पत्रकार शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9322411335

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हड़ताल से उड़ान, बढ़ो बहु, चिड़ियाघर, नामकरण आदि की शूटिंग बंद

मुख्यमंत्री ने बुलाई फेडरेशन और प्रोड्यूसरों की बैठक… फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले 7 दिन से हड़ताल पर… अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुम्बई के गोरेगांव पूर्व स्थित फिल्मसिटी स्टूडियो के बाहर भारी बारिश में आमरण अनशन और हड़ताल पर बैठे फ़िल्म और टीवी कामगारों की यूनियनों को नेतृत्व करने वाली फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज और प्रोड्यूसरों की संस्था को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक के लिए आमंत्रित किया है।

माना जारहा है कि इस बैठक में फेडरेशन की 22 यूनियनों के ढाई लाख सदस्यों के पक्ष में राहत भरी खबर आ सकती है। उधर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज के प्रेजिडेंट बी एन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने दावा किया कि रविवार को उड़ान, बढ़ो बहु, चिड़ियाघर, राजश्री प्रोडक्शन के एक सीरियल की भी शूटिंग बंद करके टेक्नीशियन, कामगार सेट से बाहर आ गये और हड़ताल में शामिल हो गए। फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले 7 दिन से हड़ताल पर हैं।

एन्ड टीवी के शो बढ़ो बहु की शूटिंग बंद हो गयी। सब टीवी के शो चिड़ियाघर की शूटिंग भी बंद करके शनिवार को ही कामगार सेट छोड़कर बाहर आये और हड़ताल में शामिल हो गए। फेडरेशन की पहल पर वैनिटीवेंन और इक्यूपमेंट वाले भी हड़ताल में शामिल हुए। कलर्स के शो उड़ान की भी आज शूटिंग कैंसिल हुई है। इस सभी शो के टेक्नीशियन शो छोड़कर बाहर आगये और हड़ताल में शामिल हो गए जबकि स्टारप्लस के शो नामकरण की 65 परसेंट टीम हड़ताल में शामिल हो गयी। इस शो की शूटिंग भी होना मुश्किल लग रहा है।

इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के बारे में श्री तिवारी और पिठवा के मुताबिक फेडरेशन की इस अनिश्चित कालीनहड़ताल के पीछे उद्धेश्य है कि फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के साथ जो बरसों से वायदाखिलाफी और नाइंसाफी हो रही है उसको हमेशा के लिये समाप्त किया जाये। फेडरेशन लंबे समय से मांग करता रहा है कि आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिये डबल पेमेंट हो। हर क्राफ्ट के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपैड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ेत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जायेगा। साथ ही जॉब सुरक्षा, उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है। मगर निर्माता हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

बॉलीवुड में काम कर रहे ये कामगार अपना नया एमओयू साइन करवाना चाहते हैं, जिसकी मियाद पिछली फरवरी में खत्म हो चुकी है। ये एमओयू  हर ५ साल में साइन होता है।इस बार नए एग्रीमेंट में कामगारों की मांगों में उनका मेहनताना, सुरक्षा, समय पर भुगतान, काम करने की समय सीमा और बीमा शामिल हैं। इनके मुताबिक, इनका मेहनताना ३ से ६ महीने बाद मिलता है। १८-१८ घंटे काम करवाया जाता है।  इस हड़ताल को भाजपा की चित्रपट सेना का भी समर्थन मिला है।

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : shashikantsingh2@gmail.com

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फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल शुरू, 40 टीवी सीरियल्स और 10 फिल्मों की शूटिंग ठप

मुंबई : अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के कामगार और टेक्निशियन 14 अगस्त की रात से हड़ताल पर चले गये हैं। फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज संगठन के बैनर तले हो रही इस हड़ताल में २२ यूनियन शामिल हुयी हैं। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर गये हैं। हड़ताल की वजह से फिल्म की शूटिंग के लिए स्टूडियो बुकिंग भी बंद हो गई है। जहां हमेशा चहलपहल रहती थी उन स्टूडियो में अब सन्नाटा पसर गया है।

१४ अगस्त की रात १२ बजकर एक मिनट पर फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज संगठन के 22 यूनियन के सदस्य सेट से बाहर आ गये। फेडरेशन के प्रेसिडेंट बी.एन. तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा के मुताबिक इस हड़ताल के कारण लगभग 40 टीवी धारावाहिकों और 10 फिल्मों की शूटिंग ठप हो गयी है। साथ ही मराठी और भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग पर भी असर पड़ा है। हड़ताल के कारण मुबई के फिल्म सिटी स्टुडियो, फिल्मीस्तान के अलावा मडआईलैंड के बंगलों और नायगांव के स्टुडियो में भी सन्नाटा पसर गया है। अधिकांश जगह डबिंग और रिकार्डिंग स्टुडियो भी बंद हो गये हैं।

फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा का कहना है कि हमारी फिल्म और टेलीविजन शो निमार्ताओं से मांग मजदूरों के लिए है। ये फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के हक की मांग है। इन लोगों की सबसे बड़ी मांग ये है कि जहां पर फिल्म की शूटिंग होती है वहां पर साफ सफाई नहीं रहती, शौचालय की सुविधा नहीं रहती, बहुत गंदगी रहती है। फिल्म इंडस्ट्री में बड़े बड़े लोग प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान का समर्थन करते हैं लेकिन जहां पर फिल्म की शूटिंग होती है वहां पर स्वच्छता कोई नहीं देखता। साफ-सफाई और सुरक्षा की मांग के अलावा आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिए डबल पेमेंट होनी चाहिए। हर क्राफ्ट के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपैड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ोत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जाएगा, साथ ही जॉब सुरक्षा, उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है।

फेडरेशन का कहना है की फिल्म निमार्ता कोशिश कर रहे हैं हमारे लोगों को तोड़ने के लिए लेकिन हम टूटने वाले नहीं हैं। जब तक हमारी मांग फिल्म निमार्ता और निर्देशक लिखित रूप से नहीं मानेंगे तब तक ये हड़ताल खत्म नहीं होगी। हमारे साथ पूरी टेक्निकल यूनियन है। फेडरेशन में जो २२ यूनियन शामिल हैं उसमें द साउंड एशोसिएशन आॅफ इंडिया, कैमरा एशोसिएशन , डायरेक्टर एशोसिएशन , आर्ट्स डायरेक्टर एशोसिएशन, स्टिल फोटोग्राफर एशोसिएशन, म्यूजिक डायरेक्टर एशोसिएशन, म्यूजिशियन एशोसिएशन, सिंगर एशोसिएशन, वाइसिंग एशोसिएशन, डांस मास्टर एशोसिएशन, डांसर एशोसिएशन, फाइटर एशोसिएशन , डमी एशोसिएशन , राइटर एशोसिएशन , प्रोडक्शन एशोसिएशन, एडिटर एशोसिएशन, जूनियर आर्टिस्ट एशोसिएशन, महिला कलाकार एशोसिएशन , मेकअप और ड्रेस डिपार्टमेंट एशोसिएशन, एलाइड मजदूर एशोसिएशन और जूनियर आर्टिस्ट सप्लायर एशोसिएशन प्रमुख है। माना जा रहा है कि इस हड़ताल के कारण कई धारावाहिकोें के नये एपिसोड का प्रसारण भी खटाई में पड़ेगा और लोगो को अपने टीवी स्क्रीन पर पुराना एपिसोड ही देखने को मजबूर होना पड़ सकता है।

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ९३२२४११३३५

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सेलरी न मिलने से दैनिक भास्कर कोटा के सर्वेयरों ने किया हड़ताल

कोटा से खबर है कि दैनिक भास्कर के सर्वेयरों ने हड़ताल कर दिया है. ये दो महीने से सेलरी न मिलने से नाराज है. सर्वेयरों ने प्रबंधन से सेलरी के लिए बात की लेकिन जब उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो इन्होंने हड़ताल करने का ऐलान कर दिया. सभी सर्वेयरों ने एकजुट होकर दैनिक भास्कर आफिस के सामने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान सर्वेयर हाथ में तख्तियां लिए हुए थे और भास्कर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.

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फैजाबाद में अमर उजाला के पत्रकार तीन दिन से कलम बंद हड़ताल पर, नहीं सुन रहा प्रबंधन

फैजाबाद। दूसरों की सहायता और समस्याओं को उठाने वाले अमर उजाला के फैजाबाद शहर के रिपोर्टरों की कोई नहीं सुन रहा है। पिछले तीन दिनों से सभी रिपोर्टर विभिन्न समस्याओं को लेकर कलम बंद हड़ताल पर हैं। इसकी सूचना लखनऊ और नोयडा तक बैठे बड़े अधिकारियों के पास पहुंची है। लेकिन फैजाबाद में कलम बंद हड़ताल करने वाले पत्रकारों से वार्ता या उनके दुख-सुख की जानकारी लेने कोई नही पहुंचा है।

समझा जाता है कि फैजाबाद में गुटबाजी को लेकर यह अचानक हड़ताल हुई है। यहां के पत्रकारों का कहना है कि पिछले 6 साल से एक रुपया मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। मंहगाई पर आए दिन खबरें लिखते हैं लेकिन उनकी खुद की माली स्थिति और बढ़ी हुई मंहगाई से दूभर हुए जीवन को संस्थान नहीं देख रहा है। बताया जाता है कि हड़ताल से खबरों पर असर हुआ है। शहरी पत्रकारों के समर्थन में कई ग्रामीण पत्रकार भी चुपके से साथ आए हैं। खबरों की संख्या में गिरावट हुई है। लेकिन पत्रकारों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ दूसरे पत्रकार संगठन सामने नहीं आ रहे हैं।

फैजाबाद जिले के अमर उजाला कार्यालय में कल भी सारे स्टाफ के लोगों ने कार्य बहिष्कार कर हड़ताल कर दिया। सारे स्टाफ के लोग कार्यालय के बाहर आ गए। स्टाफरों का आरोप है कि 6 साल से मानदेय नहीं बढ़ाया गया। कोई पहचान पत्र नहीं दिया गया है। काम अधिक लिया जा रहा है। जब तक सम्पादक मानदेय नहीं बढ़ाएंगे तब तक कार्य बहिष्कार करते रहेंगे।

चर्चा है कि फैजाबाद के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा गुपचुप रूप से बाहरी पत्रकारों से खबर लेने का सिलसिला शुरू किया गया है, ताकि संस्थान को उनकी कमी न महसूस होने दिया जाए। लेकिन ऐसे लोग यह नहीं समझते हैं कि संस्थान किसी का नहीं होता है। आज उनके साथ है तो कल किसी और के साथ होगा। छोटे पत्रकारों का मानदेय बढ़ाया जाय, इसके लिए सभी को मिलजुल कर सामने आना चाहिए। चर्चा है कि एक दो दिन बाद हड़ताली पत्रकार धरना प्रदर्शन भी कर सकते हैं। इस समय फैजाबाद में अमर उजाला में गुटबाजी भी काफी तेज है। यहां की सूचना लखनऊ में बैठे नए सम्पादक के पास जाने से भी रोकी जा रही है, ऐसी जानकारी मिली है। संपादक और प्रबंधन को पत्रकारों की समस्याओं को ध्यान से सुनना चाहिए।

फैजाबाद से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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लखनऊ में कई दिन से हड़ताल पर हैं न्यूज पेपर हॉकर… काश ऐसी हिम्मत पत्रकारों में होती…

लखनऊ में न्यूज पेपर हॉकरों की हड़ताल का पांचवां दिन है। नम्बर 1, सबसे आगे और देश के सबसे बड़ा अखबार होने का दंभ भरने वाले समाचार पत्रों के बंडल रद्दी हो रहे हें। राजधानी लखनऊ ही नहीं बल्कि देशभर में पत्रकार कई गुटों में बंटे हैं। लखनऊ में कई गुट व धाराएं हैं। मान्यता प्राप्त व गैर प्राप्त का भेद अलग से है। चार दिन से राजधानीवासियों को अखबार का दीदार नहीं हुआ है। लखनऊ समाचार वितरक विकास मंच ने सरकार और पाठकों से अपील की है कि आजादी से पहले मिल रहा कमीशन आज भी बरकरार है। बीते 67 वर्षो में मंहगाई कई गुना बढ़ गई है। लेकिन उनका कमीशन नहीं बढ़ा है, उलटे घटा दिया है।

लखनऊ व देश के पत्रकार साथी हॉकर भाईयों से कुछ और नहीं तो कम से कम एकता का पाठ सीख लें तो, पत्रकार व पत्रकारिता दोनों का भला होगा। पिछले दिनों मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के समक्ष भी पत्रकार एकता खण्ड—खण्ड हुई, जिस पर मुख्यमंत्री ने टिप्पणी भी की। उप्र राज्य मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में पत्रकार दो गुटों में बंटे। दो समितियों का चयन हुआ। पत्रकार एकता ​बंटी। नतीजा, सूचना विभाग की डायरी से मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पदाधिकारियों का नाम छापना सरकार ने बदं कर दिया। नाम छपना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन एकता टूटते ही सरकारी अमले ने पत्रकारों को उनकी औकात बताने में देरी नहीं की।

तमाम मौकों पर मतभेद और मनभेद सार्वजनिक होते रहते हैं। मीडिया घरानों और अखबार मालिकों द्वारा पत्रकारों का शोषण पत्रकार संगठनों के नेताओं से छिपा नहीं है, लेकिन एकता खंड—खंड होने का लाभ अखबार मालिक वर्षों से उठा रहे हैं। लखनऊ में रिर्पोटिंग व डेस्क के सा​थियों का जमकर शोषण हो रहा है। अल्प वेतन, 10 से 12 घण्टे की डयूटी और नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा की कोई सुविधा न होना लखनऊ की पत्रकारों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

हॉकर भाईयों की भांति राजधानी लखनऊ में अगर रिपोर्टिंग और डेस्क के साथी चार दिन की हड़ताल पर चले जाएं तो पत्रकारों और पत्रकारिता दोनों का कल्याण हो जाएगा। लेकिन टुकड़ों में बंटी एकता, मतभेद और मनभेद शायद ऐसा होने में बड़ी बाधा है। देश—दुनिया की खबरों की कवरेज करने वाले, दूसरों की आवाज बुलंद करने वाले, सत्ता और शासन को कंपाने और हड़काने वाले, बड़े—बड़े दिग्गज पत्रकारों में अखबार की दुनिया में सबसे निचले पायदान पर खड़े हॉकरों जैसी हिम्मत भी नहीं है। एकता तो बरसों पहले ही स्वाहा हो चुकी है।

खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानने व बताने वाले पत्रकार अंदर से कितने कमजोर और बुजदिल हैं। जो अपने ही शोषण का विरोध करने की हिम्मत बरसों से नहीं जुटा पाये हैं। हम पत्रकारों से बेहतर तो हॉकर ही हैं, कम से कम उनमें एकता और अपने हक को मांगने की हिम्मत तो है। हॉकर भाईयों की एकता और हक की लड़ाई को सलाम।

लेखक डॉ0 आशीष वशिष्ठ लखनऊ के पत्रकार और पत्रकारिता शिक्षक हैं.

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सहारा मीडिया में पटना एडिशन को छोड़ बाकी कहीं नहीं छपा अखबार, चैनल पर भी नई खबरें नहीं चल रहीं

सेलरी के लिए सहारा कर्मियों की हड़ताल की वजह से सहारा मीडिया का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जानकारी के मुताबिक दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और वाराणसी में अखबार नहीं छप सका. सिर्फ पटना में सिर्फ रेलवे स्टेशन एडिशन व एक डाक एडिशन मात्र छपा. बताया जाता है कि गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के एडिशन निकालने की अपील पर अखबारकर्मियों ने कहा कि पटना वालों की तरह हम दोगलापन नहीं कर सकते.

पटना में सहारा इंडिया ग्रुप के पूर्व डायरेक्टर डी.के. श्रीवास्तव के नजदीकी किशोर केशव ने अखबार कर्मियों को हड़ताल के लिये पहले तो उकसाया फिर फिर लगे डाक एडिशन का अखबार निकालने में सहयोग करने. पटना में स्टेशन एडिशन देर रात की खबरों वाला एडिशन होता है, जिसे दूसरे प्रदेशों में सांध्य दैनिक कहा जाता है. इस हड़ताल में सहारा टीवी नोयडा के लोग सबसे आगे दिखे. चैनल के लोगों ने नई खबरें देना बंद कर दिया जिससे चैनल पर पुरानी खबरें चलाई जा रही हैं.

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सहारा प्रबंधन ने 28 तक सेलरी देने को कहा, कर्मी बोले- तब तक मास्टर एडिशन ही छपेगा

राष्ट्रीय सहारा अखबार में हड़ताल के कारण केवल मास्टर एडिशन का प्रकाशन हो रहा है. इस मास्टर एडिशन में स्थानीय खबरें नहीं होतीं. केवल सेंट्रलाइज पेज बनाकर उसे आल एडिशन छपवा दिया जा रहा है, मास्टर एडिशन के रूप में. हड़ताल के कारण लखनऊ में भी मास्टर एडिशन का प्रकाशन चल रहा है जिसमें लखनऊ की एक भी खबर नहीं है. हड़ताल को लेकर मैनेजमेंट सक्रिय हो गया है.

प्रबंधन की तरफ से कहा गया है कि 28 अप्रैल तक सेलरी दे दिया जाएगा, इसलिए सभी लोग काम पर लौटें. कर्मचारियों ने भी कह दिया है कि 28 तक यानि सेलरी मिलने तक वो लोग मास्टर एडिशन ही निकालेंगे. लखनऊ से खबर मिली है कि 28 तक मास्टर एडीशन निकालेंगे लखनऊ के राष्ट्रीय सहारा के कर्मचारी. मैनेजमेंट ने वादा किया कि 28 अप्रैल तक बैंक एकाउन्ट में फरवरी की सेलरी चली जाएगी. यदि नहीं तो 29 अप्रैल का अंक मार्केट में नहीं आएगा. कर्मचारी कह रहे हैं कि सबसे ज्यादा राजस्व लखनऊ यूनिट देता है तो फिर सेलरी क्यों नहीं.

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सेलरी न मिलने पर राष्ट्रीय सहारा अखबार की कई यूनिटों में हड़ताल

सहारा मीडिया से बड़ी खबर आ रही है कि साल भर से सेलरी न मिलने से नाराज राष्ट्रीय सहारा अखबार के कर्मियों ने हड़ताल कर दिया है. हड़ताल से नोएडा, लखनऊ, बनारस, कानपुर यूनिटें प्रभावित हैं. बताया जा रहा है कि गोरखपुर और पटना की यूनिटों में हड़ताल नहीं हुआ है. कार्य बहिष्कार के कारण सहारा मीडिया के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भागदौड़ तेज कर दी है. किसी तरह हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें हो रही हैं.

हड़ताल से जुड़े कर्मियों का कहना है कि सेलरी के लिए कई तारीखें देने के बाद भी जब प्रबंधन सेलरी नहीं दे पा रहा है तो उनके पास सिवाय हड़ताल के कोई चारा नहीं रह गया है. आर्थिक तंगी के कारण सहारा कर्मी बेहद परेशान हैं. स्कूल फीस से लेकर मकान किराए तक के लाले पड़ गए हैं. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय सेलरी के लिए पैसे रिलीज नहीं कर रहे हैं जिससे कर्मियों को तनख्वाह नहीं दिया जा रहा है. सहारा मीडिया के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मार्केट से पैसे निकाल कर सेलरी देने का वादा किए थे लेकिन यह भी नहीं हो पा रहा है. अंतत: सभी को सिर्फ आश्वासनों के भरोसे जीना पड़ रहा है. इन हालात से आजिज सहारा कर्मियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया.

कल दिन से ही आज की हड़ताल की तैयारी शुरू हो गई थी. आज दोपहर तीन बजे से लोग आफिस पहुंचने तो लगे लेकिन काम नहीं किया. इस कार्य बहिष्कार की आग राष्ट्रीय सहारा की कई यूनिटों में फैल गई. सूत्रों के मुताबिक मैनेजरों और अन्य वरिष्ठ लोगों को तो लिफाफे में पेमेन्ट किया जा रहा है लेकिन कर्मियों को कोई पैसा नही दिया जा रहा. चर्चा है कि बीते 18 अप्रैल को लखनऊ में मैनेजर रैंक के एक अफसर को 1.90 लाख का चेक दिया गया.

अखबार के डेस्क और फील्ड के कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा. 18 को नोएडा में लोगों ने वेतन को लेकर घेराव किया था और चेतावनी दिया था कि यदि 20 को पूरी सेलरी नहीं आई तो सभी लोग हड़ताल पर चले जाएंगे और अगला अंक यानि 21 अप्रैल का अंक नहीं निकलेगा. हड़ताली कर्मियों ने बताया कि राष्ट्रीय सहारा के नोएडा और लखनऊ यूनिट के लोगों ने काम करना बंद कर दिया है. कानपुर और वाराणसी यूनिट में भी काम का बहिष्कार कर दिया गया है. गोरखपुर और पटना यूनिट के लोगों का दोगलापन भरा रवैया इस बार भी कायम है.

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स्नैपडील ने 600 कर्मियों को निकाला, लड़कियों ने आफिस में कब्जा जमाया, मीडिया ने साधी चुप्पी

दिल्ली के सरित विहार से खबर है कि वहां स्नैपडील कंपनी के आफिस से छह सौ कर्मियों की छंटनी कर दी गई है. इन लोगों को अचानक कह दिया गया कि अब आपकी कोई जरूरत नहीं है. इससे खफा सैकड़ों कर्मियों ने आफिस के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. वहीं सैकड़ों लड़कियों ने आफिस के अंदर की कब्जा जमा रखा है. निकाले गए कर्मियों में आधे से ज्यादा लड़कियां हैं जो आफिस से बाहर नहीं निकल रही हैं.

इन लोगों का कहना है कि कंपनी को निकालने से पहले अनुबंध की शर्तों के हिसाब से नोटिस देना चाहिए था ताकि हर कोई अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर लेता. साथ ही तीन महीने की सेलरी देने का प्रावधान है जिसका कंपनी ने पालन नहीं किया. यहां तो हिटलरशाही वाला फरमान सुना दिया गया कि अब जाइए, कोई जरूरत नहीं है. स्नैपडील का आफिस ए 28 मथुरा कोआपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट, नियर सरिता विहार मेट्रो स्टेशन है. यहां सैमसंग की बिल्डिंग के बराबर वाली बिल्डिंग स्नैपडील की है. कंपनी से जुड़े कर्मियों का कहना है कि कंपनी ने पहले तो बेहद मुश्किल टास्क दिया सभी को ताकि कोई टास्क पूरा न कर पाए और इसी बहाने निकाल दिया जाए. लेकिन जब वह भी पूरा कर दिया गया तो अब बिना किसी चेतावनी के अचानक नौकरी से निकाल दिया गया.

आरोप है कि इलाकाई पुलिस कंपनी के अधिकारियों से मिली हुई है. आफिस में जो लड़कियां रुकी हुई हैं, उन्हें परेशान करने के लिए बिजली पानी की सप्लाई काट दी गई है. काफी सारे लोग बाहर कंपनी के गेट पर धरने पर बैठे हुए हैं. पुलिस इस इंतजार में है कि कब हल्ला गुल्ला हो और लाठीचार्ज करके वह आंदोलनकारियों को भगाए. कंपनी से जुड़े कर्मियों को आशंका है कि आफिस के भीतर बैठीं लड़कियों के साथ कोई हादसा हो सकता है क्योंकि वहां न तो पानी है न खाना है न बिजली है. बाहर से किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है. ऐसे में अगर कुछ होता है तो उसकी सारी जिम्मेदारी कंपनी के आला अधिकारियों और पुलिस की होगी.

मीडिया वाले चैनल वाले अखबार वाले इस पूरे कांड पर चुप्पी साधे हैं. कहीं कोई खबर नहीं और न ही कोई मीडिया टीम मौके पर मौजूद है. इतने बड़े पैमाने पर छंटनी और आंदोलन की खबर मीडिया वाले जान बूझ कर नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि कंपनी ने विज्ञापन आदि घोषित-अघोषित तरीकों से उनका मुंह बंद कर रखा है. पीड़ित कर्मियों ने भड़ास के माध्यम से मीडिया वालों से अपील की कि वे पीड़ितों के पक्ष में खड़ें हों और पूरे हालात के विजुवल फैक्ट लेकर सच्ची बात पब्लिक तक पहुंचाएं जिससे पीड़ितों को न्याय मिल सके.

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एकजुट होने लगे सहारा कर्मी, सेलरी के लिए किया प्रबंधन का घेराव

सहारा कर्मी अपनी सेलरी के लिए एकजुट होने लगे हैं. सहारा मीडिया में सेलरी संकट और कर्मचारियों की अंदरखाने एकजुटता की खबर भड़ास पर प्रकाशित होने के कुछ घंटे के बाद ही सहारा के नोएडा आफिस में कई महीने से सेलरी न मिलने से नाराज सहारा कर्मियों ने प्रबंधन का घेराव कर लिया. आंदोलनकारी कर्मियों ने भड़ास को एक मेल के जरिए जानकारी दी कि कर्मचारियों की एकजुटता और घेराव देखकर वहां मौजूद सभी एचओडी अपनी अपनी केबिन में भाग निकले.

सहारा कर्मियों ने सुब्रत राय के प्रतिनिधि के तौर पर बैठे प्रबंधन के एक शख्स गौतम सरकार का पकड़ लिया और उनका घेराव किया. गौतम सरकार से सहारा कर्मियों ने तुरंत सेलरी देने की मांग रखी. इस पर हड़बड़ाए गौतम सरकार ने अड़तालीस घंटे का समय मांगा और सेलरी देने का वादा किया. इस घटना से सहारा मीडिया के वरिष्ठों के भी कान खड़े हो चुके हैं.

दरअसल सुब्रत राय और सहारा के पास पैसे की दिक्कत नहीं है. जेल संकट के नाम पर सारा ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ने की रणनीति प्रबंधन ने बनाई हुई है. ये लोग सेलरी देने के लिए पैसे तभी निकालेंगे जब कर्मचारी एकजुट होकर वरिष्ठों के केबिन में धावा बोलेंगे, उनका घेराव करेंगे और बंधक बनाएंगे. माना जा रहा है कि देर सबेर नोएडा से लेकर लखनऊ, पटना, देहरादून हर जगह सहारा कर्मी अपने अपने मीडिया हेड, संपादक, प्रबंधक आदि का घेराव कर उन्हें बंधक बनाएंगे. ऐसी स्थिति में सहारा में देर सबेर सामूहिक हड़ताल होने की भी संभावना है. प्रत्येक यूनिट के कर्मी अब आपस में संपर्क कर एकजुट होने लगे हैं.

मूल खबर:

सुब्रत राय जेल में प्रसन्न, सहारा मीडिया कर्मी जेल के बाहर भीषण सेलरी संकट से खिन्न

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दीवाली के बाद आंदोलन तेज करेंगे जागरण कर्मचारी

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने पूरी एकजुटता के साथ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है। नोएडा के सेक्टर 62 स्थित पार्क में हुई बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि मजीठिया वेज बोर्ड के लिए चल रहे आंदोलन को और धार दी जायेगी। बैठक में लुधियाना, हिसार, जालंधर और धर्मशाला से आये कर्मचारियों ने भी कहा कि वे जागरण प्रबंधन के अत्याचार ले आगे कतई सिर नहीं झुकाएँगे।

बैठक में कर्मचारी नेता श्री रूपचंद ने कहा कि प्रबंधन मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ नहीं देना चाहता लेकिन हम इसे लेकर रहेंगे। उन्होंने अन्याय और जुल्म से लड़ने के लिए कर्मचारियों को बधाई दी और एकजुट रहने और धैर्य और साहस के साथ लड़ाई लड़ने का संकल्प दिलाया।

वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि प्रबंधन सारी चाल, हथकंडे अपनाकर देख चुका है लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में वह एक भी कर्मचारी को नहीं तोड़ पाया। उन्होंने कहा कि हम दीवाली के बाद आंदोलन को और धार देंगे। दिल्ली और नोएडा में व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रबंधन की साजिशों का मुहतोड़ जवाब देने की भी बात कही।

इधर, दैनिक जागरण प्रबंधन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कुछ लोगों ने लाखों के वारे न्यारे कर दिए हैं। ऐसे लोगों की कोशिश है कि इस आंदोलन को अधिक से अधिक खींचा जाये जिससे वे मालामाल होते रहें। ऐसे लोग अखबार के मालिकान को कर्मचारियों के बारे में पिछले डेढ़ वर्ष से गुमराह करते रहे हैं। इस कारण ही मुनाफा देने वाली नोएडा यूनिट आज रसातल में चली गयी है।

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दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल के एक माह हुए पूरे, कर्मचारियों ने कहा- डटे रहेंगे

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफरिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से अपने हक़ और इंसाफ के लिए आंदोलित कर्मचारी बेहद अनुशासित ढंग से पूरे महीने दिल्ली और नोएडा में प्रदर्शन करते रहे लेकिन जागरण प्रबंधन उनके आंदोलन को कुचलने में अपनी सारी ताकत खर्च करता रहा।

गौरतलब है कि यह दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल है।

कर्मचारियों की हड़ताल को दिल्ली के पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि दैनिक जागरण के कर्मचारी इतिहास लिखने जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रिंट मीडिया के इतिहास में कभी ऐसी जबरदस्त हड़ताल नहीं हुई और इसके पीछे जागरण प्रबंधन में बैठे वे धूर्त लोग जिम्मेदार हैं जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी कर्मचारियों के हक़ पर डाका डाले बैठे हैं।

दैनिक जागरण के नोएडा प्रबंधन में बैठे कुछ लोग कर्मचारियों की बरसों की मेहनत से खड़ी की गई इस यूनिट को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। कर्मचारी अब और ज्यादा उत्साह और ताकत के साथ आंदोलन को तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।

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जागरण प्रबंधन ने धर्मशाला यूनिट के 12 मीडियाकर्मियों को किया सस्पेंड

धर्मशाला। दैनिक जागरण ने अपने हक की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों के दमन की नीति पर चलते हुए बनोई स्थित धर्मशाला यूनिट के 12 कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इन कर्मियों ने उत्तर भारत की बाकी यूनिटों  साथियों के साथ शुक्रवार को काम का बहिष्कार किया था।

शुक्रवार रात को काम का बहिष्कार किए जाने के कारण जागरण प्रबंधन के हाथ-पांव फुल गए थे। उन्होंने दब्बू व चापलुस कर्मियों की मदद से जैसे-तैसे हिमाचल का काम एडिशन तैयार करवाकर अखबार तो छपवा ली थी, मगर इससे प्रबंधन ने सबक लेने के बजाय हिटलरशाही का रास्ता चुना।

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सेलरी की मांग को लेकर सहारा मीडिया के कर्मचारी 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाएंगे

सहारा मीडिया के कर्मचारी पूरा वेतन न मिलने सहित कई मांगों को लेकर 6 अक्टूबर 2015 से हड़ताल करने जा रहे हैं। यह हड़ताल फिलहाल सहारा कामगार संगठना के नेतृत्व में होने जा रही है। इस हड़ताल का समर्थन करते हुए उत्तर प्रदेश की यनिट हेड गीता रावत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, यूपी के सीएम सहित तमाम लोगों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए पत्र भेजा है।

इस हड़ताल के समर्थन में राष्ट्रीय सहारा उप्र की विभिन्न यूनिटों सहित उत्तराखंड के ढेर सारे मीडियाकर्मी भी शामिल होने जा रहे हैं। गौरतलब है कि सात अक्टूबर 2015 को सहारा सुप्रीमो सुब्रत राय के बुलावे पर मुंबई के विशाल मोरे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल मिलने जा रहा है। नियमित पूरा वेतन देने, बकाया देने, हड़ताल पर रहे कर्मचारियों को परेशान न करने और उनका तबादला न करने आदि की मांगें इसमें शामिल हैं।

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दैनिक जागरण नोएडा में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी

Pandey Parmanand : Today (03.10.2015) was the second day of the strike of Dainik Jagran employees of NOIDA and they came out in large number at Jantar Mantar to sit on dharna. I marvel at the enthusiasm of the employees who in spite of all threat and intimidation of the Management defied the dictate and struck the work.

I have been informed that the Management has somehow been able to publish a few thousand copies of the newspapers at the printing press of rival newspapers. This, in fact, is the major victory of the employees of the Dainik Jagran and huge defeat of the management, which is begging before its rivals to publish the newspaper..

The office-bearers of the ‘Jagran Prakashan Ltd. Employees Union’ -Isht Dev Sankritayan, Ratan Bhushan, Pradeep Singh, Narveer Singh, Dileep Dwidedi etc. deserve our kudos for organising such a peaceful and impressive agitation at Jantar Mantar. From tomorrow the place of agitation will move to some other place, which will cause the real headache to the management.

जाने माने पत्रकार और वकील परमानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.


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अभी भी कुछ कुत्‍ते चाट रहे हैं जागरण मैनेजमेंट के तलवे, सुनिए विष्णु त्रिपाठी के श्रीमुख से

 

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अभी भी कुछ कुत्‍ते चाट रहे हैं जागरण मैनेजमेंट के तलवे, सुनिए विष्णु त्रिपाठी के श्रीमुख से

Fourth Pillar : मजीठिया वेतनमान के समर्थन और दैनिक जागरण प्रबंधन के अत्‍याचारों के विरोध में नई दिल्‍ली स्थित जंतर-मंतर से दैनिक जागरण कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन, कैंडल मार्च और हड़ताल का बिुगल तो बजा दिया, लेकिन अभी भी कुछ कुत्‍ते जागरण मैनेजमेंट के तलवे चाट रहे हैं। शायद यही वजह है कि कुछ यूनिटों में दैनिक जागरण छप पाना संभव हो पाया। धर्मशाला, लुधियाना और हिसार यूनिटें पूरी तरह से ठप रहीं। एक ओर तमाम कर्मचारी अपनी नौकरी दांव पर लगाकर आंदोलन में कूद पड़े हैं और मजीठिया वेज बोर्ड इम्लिमिंटेशन संघर्ष समिति, केयूडब्‍ल्‍यूजे, आईएफडब्‍ल्‍यूजे, डीयूजे सहित कई मजदूर संगठन आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ कुत्‍ते टाइप के पत्रकार दैनिक जागरण प्रबंधन के तलवे चाटने में लगे हैं।

यही नहीं, कुछ तो ऐसे भी हैं जो अपने को क्रांतिकारी, जांबाज, निर्भीक और न जाने कितने गुणों से विभूषित करते रहते हैं, लेकिन वे मैनेजमेंट के तलवे तो चाटते ही हैं, क्रांतिकारियों की जासूसी करने से भी बाज नहीं आते। ऐसे ही जयचंदों के कारण देश गुलाम हुआ था और अब ये पत्रकारिता को भी गुलाम बनाने का षडयंत्र रच रहे हैं। ऐसे लोगों से आंदोलनकारियों को सतर्क रहने की जरूरत है। लुंज-पुंज लोगों को तो इतिहास अपने आप कचरे में डाल देगा। इनसे अच्‍छा तो विष्‍णु त्रिपाठी है, जिसने अपनी हरकतों से कर्मचारियों में आग लगा दी है। अभी भी वह भड़काने वाले बयान दे रहा है, मसलन आपरेटर नहीं हैं तो काम बड़ा ही स्‍मूथ चल रहा है।

फेसबुक के पेज फोर्थ पिलर पर प्रकाशित.


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IFWJ condemns the atrocities of DJ Management and supports the workers’ strike (देखें दैनिक जागरण कर्मियों के आंदोलन की तस्वीरें)

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IFWJ condemns the atrocities of DJ Management and supports the workers’ strike (देखें दैनिक जागरण कर्मियों के आंदोलन की तस्वीरें)

Thousands of journalists and non-journalists of various newspapers today staged adharna at Jantar Mantar in support of the struggling employees of Dainik Jagran against the atrocities of its Management. The Jagran Management, known for its anti labour trade practices, has unleashed the reign of terror and victimisation of the employees. This newspaper’s Management has firstly obtained signatures of employees by force and fraud on different dates to deny them Majithia Award is now suspending, transferring and terminating the employees so that they do not unionize and raise their voice for their genuine demands.  The shameless Jagran Management has summarily terminated the services of 16 employees of NOIDA without following the due process of law but strangely, the UP government’s Labour department is sitting silent. So much so, the Management is using the state police to oppress the agitation of the employees.

Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) has strongly condemned the managements’ action of victimization of employees and has extended its wholehearted support to their struggle. Addressing the rally, the IFWJ’s Secretary General Parmanand Pandey has asked the UP government to immediately prevail upon the Management to revoke the termination of all 16 employees; most of them are the office bearers and the active members of the Union. The government must start the prosecution of the Management for throwing the law of the land to the wind.

Employees of the NOIDA edition of Dainik Jagran have been compelled by the Management to go on strike against the provocative action of the Management, which has started from today itself. The employees of Dainik Jagran of other centres of Punjab, Himachal and Haryana also joined the agitation at Jantar Mantar. Among others who addressed the dharna of the Jagran employees were Swami Agnivesh of Bandhua Mukti Morcha, R P Yadav of the IFWJ,  Chandan Rai of the Delhi Union of Working Journalists, Prashanth Reghuvamsom  of the Kerala Union of Working Journalists and Piyush Bajpai of the Indian Express Employees Union.

Parmanand Pandey
Secretary General-IFWJ

दैनिक जागरण कर्मियों द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और धरने की ढेर सारी तस्वीरें देखने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करते जाएं…

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दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे, कई यूनिटों में हड़ताल (देखें वीडियोज)

Yashwant Singh : जंतर मंतर से लौट कर आ रहा हूं. दैनिक जागरण के साथी वहां धरने पर हैं. मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने की मांग को लेकर ये साथी लंबे समय से आंदोलनरत हैं. आज बड़ी संख्या में दैनिक जागरण कर्मियों को जंतर मंतर पर धरने पर बैठे देखकर दिल को बहुत ठंढक पहुंची. काश ऐसे ही हर मीडिया हाउस के लोग एकजुट होते. वहां पहुंचते ही तत्काल फोटो खींचना वीडियो बनाना शुरू किया. वीडियो बनाने के दौरान ही मंच संचालक साथी ने मुझे भाषण देने के लिए बुला लिया. खैर, वहां गया और तीन मिनट तक बोला. उनका उत्साहवर्द्धन किया. यह सब वीडियो अपन के पास है. बाद में जब लौटने लगा तो देखा कि बीएड टीईटी वाले इतनी बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर बैठे हैं लेकिन कहीं कोई मीडिया कवरेज नहीं. मुझसे रहा नहीं गया. मोबाइल को वीडियो मोड में किया और इन्हें रिकार्ड करने लगा.

रिकार्ड करते चलते चलाते जब मंच के पीछे पहुंचा तो देखा कि ढेर सारी महिलाएं मोदी जी को चूड़ियां पहनाने के लिए आह्वान कर रही हैं और नारे लगा रही हैं. वीडियो शूट करना जारी रखा. जब घर पर पहुंचा तो देखा सीढ़ियों के पास कुछ कुत्ते और कुछ आदमी एक साथ शांत भाव से सो रहे हैं. इसका भी वीडियो बनाया. ये सारे वीडियोज यूट्यूब पर अपलोड है. दरअसल जंतर मंतर पर जाना, वीडियो बनाना, अपलोड करना, आपको बताना..

ये सब मेरा कोई निजी काम नहीं है लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान समाज देश आम जन के लिए सोचने सक्रिय रहने लड़ने की जो लत लगी तो उससे उबर नहीं पाए, हां, तरीके फार्मेट अंदाज बदलते गए. और, लत लग जाने का मुझे अफसोस नहीं बल्कि गर्व है. मैं किसी पार्टी, किसी विचारधारा, किन्हीं लोगों से वाहवाह पाने के लिए नहीं लिखता पढ़ता, दरअसल मैं अपनी तसल्ली के लिए एक्टिव रहता हूं. आप लोग सारे वीडियोज भढ़ास के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं जिसका लिंक https://www.youtube.com/user/bhadas4media है. और हां, इस लिंक पर क्लिक करने के बाद पहले तो इसे सब्सक्राइब करिए और फिर शुरुआती सात आठ वीडियोज देख डालिए जो आज के ही हैं.

और, ताजी सूचना ये भी है कि दैनिक जागरण की नोएडा, हरियाणा और पंजाब की यूनिटों में हड़ताल हो चुकी है. इस आंदोलन को हम सबको सपोर्ट करने की जरूरत है.

जैजै.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


आंदोलन की ढेर सारी तस्वीरें देखने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें: 

IFWJ condemns the atrocities of DJ Management and supports the workers’ strike (देखें दैनिक जागरण कर्मियों के आंदोलन की तस्वीरें)

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मध्य प्रदेश के सागर में हॉकरों की हड़ताल, नहीं बंटे अखबार

सोमवार 21 सितंबर को मध्य प्रदेश के सागर जिले में अखबार नहीं बंटे। हॉकरों ने हड़ताल कर रखी है। वे अपना कमीशन बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो मध्य भारत के इस मशहूर शहर में पहली बार पाठकों को अखबार पढऩे से वंचित रहना पड़ा है। सबसे ज्यादा आघात दैनिक भास्कर को लगा है। पहली बार उसका प्रबंधन अपनी खबरी पोटली को पाठकों के समक्ष पेश कर पाने में नाकाम रहा है।

राजस्थान पत्रिका के तकरीबन साढ़े तीन सप्ताह पहले सागर से अपना प्रकाशन शुरू करने की वजह से यहां से निकलने वाले अखबारों में एक अलग और नई तरह की होड़ शुरू हो गई है। अभी तक यहां दैनिक भास्कर का वर्चस्व रहा है जिसमें पत्रिका ने बहुत बड़ा विघ्न डाल दिया है। खबरों के मामले में खींचतान, होड़, संघर्ष बढ़ा ही है, मार्केट कैप्चर करने की प्रतिद्वंद्विता भी जबर्दस्त ढंग से बढ़ी है। इस बीच अखबार लोगों तक पहुंचाने वालों यानी हॉकरों को भी अपनी कमाई में थोड़ा इजाफा करने की लालसा जागी है। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमीशन को बढ़ाने की मांग अखबार प्रबंधकों के सामने रख दी। हॉकरों की मांग अखबार मालिकों ने मानने से मना कर दिया। उल्टे अपनी हेकड़ी दिखाने लगे कि -देखते हैं हॉकर अखबार कैसे नहीं बांटते हैं! हॉकरों को यहां तक बोल दिया कि अखबार तुम नहीं बांटोगे तो हम अपने लोगों से बंटवा लेंगे।

लेकिन यह मैनेजमेंट की महज भभकी ही निकली और हॉकरों ने अखबार नहीं उठाया। इससे सबसे ज्यादा झटका दैनिक भास्कर को लगा है। भास्कर सोमवार को मार्केट में नजर ही नहीं आया। उसे लगा कि कर्मचारियों का रक्त चूसने की तरह वह हॉकरों की मेहनत को भी यूं ही लूटते रहेंगे और वे मौन धरे हमें सहते-बर्दास्त करते रहेंगे। पर हॉकरों ने लुटेरों-शोषकों को उनकी औकात दिखा दी। और मना कर दिया अखबारी गट्ठर पाठकों के दर पर फेंकना। साफ कह दिया- हमारा कमीशन हमारी अपेक्षा के अनुसार बढ़ाओ, तभी अखबार हम घर-घर डालेंगे।

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सहारा के जिस डिवीजन के लोग हड़ताल करेंगे, सहाराश्री उस डिवीजन को ही बंद कर देंगे… देखें नोटिस

सहारा अपने कर्मचारियों को लगभग डेढ़ साल से नियमित वेतन नहीं दे रहा है। एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, सिर्फ आधा वेतन दिया जा रहा है। वेतन न मिलने से लाखों कर्मचारी प्रभावित हैं। वेतन न मिलने की वजह से कई तो खुदा को प्यारे हो गए। पंद्रह सितंबर 2015 को सहारा के सभी कार्यालयों में सहारा सुप्रीमो का यह पत्र नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है। पत्र में वेतन न देने की बात करते हुए हड़ताल न करने की हिदायत दी गई है साथ ही चेतावनी या धमकी जो कह लीजिए, दी गई है कि उस विभाग को ही बंद कर दिया जाएगा जहां के कर्मचारी वेतन की मांग करेंगे। मसलन पैराबैंकिंग में हड़ताल होती है तो वह ही बंद कर दिया जाएगा।

हमारे संविधान ने हमें जुर्म के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए या अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का अधिकार दिया है। अंग्रेजों से आजादी भी हमारे पूर्वजों ने यूं ही हासिल नहीं की। इसके लिए धरना प्रदर्शन किया है। लेकिन पैसे के मद में चूर सहारा इंडिया के मुखिया सुब्रतो राय अपने कर्मचारियों से यह अधिकार भी छीन लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने बकायदे गश्ती पत्र जारी किया है।

इस पत्र में उन्होंने हड़ताल को अराजकतावादी कदम बताया है। इसका मतलब आजादी के आंदोलन के सारे के सारे क्रांतिकारी अराजक थे? राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन अराजकतावादी कदम था? इस तरह तो भगत सिंह सबसे बडे अराजक थे? इस पत्र में यह धमकी भी दी गई है कि जिस भी डिवीजन में हडताल हुई वह बंद कर दिया जाएगा। जैसे नियम कानून इनके अधिकारियों की तरह इनके आगे पीछे दुम हिलाते फिरते हैं।

प्रसंगवश जिस संस्थान में एक हजार या उससे अधिक कर्मचारी हैं वह बिना अनुमति के कारोबार नहीं समेट सकता। बीमार संस्थान को बंद करने के भी नियम हैं। हर नियमित कर्मचारी का पूरा ड्यूज देना होगा। जिसकी जितनी सेवाएं बची हैं उसको पूरा वेतन देना पडता है। कानपुर में एक नहीं दर्जनों फैक्ट्रियां/ मिलें बंद हुई हैं सभी ने पूरा बकाया दिया है। कांग्रेस का नेशनल हेरल्ड और नवजीवन इसके उदाहरण हैं। बंद होने को तो बंबई और कोलकाता में न जाने कितनी मिलें बंद हुई हैं सुब्रतों राय, लेकिन ऐसे नहीं जैसे तुम या तेरे गुर्गे समझ / समझा रहे हैं।

एक सहाराकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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कर्मचारियों की लिस्ट में अपना नाम न पाकर राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संवादसूत्र भड़के

इस बीच, ताजी सूचना ये है कि राष्ट्रीय सहारा देहरादून के कर्मचारियों की लिस्ट जो श्रम आयुक्त को प्रबंधन द्वारा सौंपी गई है, उस सूची में अपना नाम न पाकर संवादसूत्र भड़क उठे हैं। आठ-आठ साल से नियमित कर्मचारी की तरह काम कर रहे संवादसूत्रों का कहीं नाम ही नहीं है।

संवादसूत्र के रूप में काम कर रहीं समीना मलिक, राजकिशोर तिवारी, प्रदीप फर्सवाण, भगवती प्रसाद कुकरेती, भूपेंद्र कंडारी, ललित कुमार, दीपक बडथ्वाल (फोटोग्राफर) और अंकित (फोटोग्राफर) आदि में काफी नाराजगी है। समाचार लिखे जाने तक (यानि शाम सात बजे तक) कामकाज नहीं हुआ। सभी संवादसूत्र संपादक के चैंबर में डटे रहे। दो बजे से शुरू होने वाली शिफ्ट भी प्रभावित रही। उन्होंने काम रोक दिया।

मूल खबर…

सहारा प्रबंधन से आए लोग सुनवाई से पहले ही श्रमायुक्त कार्यालय देहरादून को कागजात रिसीव कराकर रफूचक्कर हुए (देखें दस्तावेज)

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दैनिक जागरण नोएडा के 18 मीडियाकर्मी टर्मिनेट, प्रबंधन ने बाउंसर बुलाया, पुलिस फोर्स तैनात

दैनिक जागरण नोएडा की हालत बेहद खराब है. यहां मीडियाकर्मियों का जमकर उत्पीड़न किया जा रहा है और कानून, पुलिस, प्रशासन, श्रम विभाग, श्रम कानून जैसी चीजें धन्नासेठों के कदमों में नतमस्तक हैं. बिना किसी वजह 18 लोगों को टर्मिनेट कर उनका टर्मिनेशन लेटर गेट पर रख दिया गया. साथ ही प्रबंधन ने बाउंसर बुलाकर गेट पर तैनात करा दिया है. भारी पुलिस फोर्स भी गेट पर तैनात है ताकि मीडियाकर्मियों के अंदर घुसने के प्रयास को विफल किया जा सके. टर्मिनेट किए गए लोग कई विभागों के हैं. संपादकीय, पीटीएस से लेकर मशीन, प्रोडक्शन, मार्केटिंग आदि विभागों के लोग टर्मिनेट किए हुए लोगों में शामिल हैं.

 दरअसल पूरा मामला मार्केटिंग की दो लड़कियों को टर्मिनेट किए जाने से शुरू हुआ. बिना कारण बताए जब दो लड़कियों को टर्मिनेट कर दिया गया तो विभिन्न विभागों के करीब दो दर्जन लोग एकजुट होकर सीजीएम नीतेंद्र श्रीवास्तव के पास गए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया पूरी किए टर्मिनेट किए जाने को अनुचित बताया. कर्मियों के दबाव में लड़कियों को आफिस में आने और काम करने की अनुमति तो दी गई लेकिन जैसे ही सब लोग अपने अपने काम पर लौटे, प्रबंधन ने इन दो दर्जन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा करा दिया.

उधर, मार्केटिंग की लड़कियों ने साफ साफ बताया कि दरअसल उन्हें टर्मिनेट परफारमेंट से कारण नहीं किया गया है बल्कि वे बासेज की कई अनुचित मांगों को पूरा नहीं कर रहीं थी, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. लड़कियों ने भी छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा लिखाया. इससे परेशान प्रबंधन ने खुद को वजनदार और दमदार दिखाने की कोशिश करते हुए 18 मीडियाकर्मियों को टर्मिनेट कर दिया. फिलहाल नोएडा स्थित दैनिक जागरण के गेट पर भारी तनाव पसरा हुआ है.

आगे की स्लाइड में पढ़ें : क्या है दैनिक जागरण कर्मियों की अगली रणनीति > नीचे लिखे Next पर या 2 पर क्लिक करें…

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हड़ताल बर्दाश्त नहीं, अब होंगे साइड इफेक्ट

हर चीज का असर होता है । बारिश का होता । आमतौर पर इसके बाद मौसम सुहाना हो जाता है तो आंधी का भी असर होता है। हर तरफ धूल ही धूल रहती है । कुछ हड़ताल का असर पहले होता है तो कुछ का बाद में लेकिन होता सबका है । मित्रो कहने का मतलब सहारा में हड़ताल समाप्त हो गई या टूट गई या तोड़वा दी, जो भी हो, यह आपकी एकजुटता के कारण हुआ। अब जरूरत है इसे स्थायी रूप से संगठित रूप देने की । स्थायी स्वरूप तभी हो सकता है, जब आप इसे यूनियन का रूप दें । आप दे सकते हैं। वह इसलिए कि जब आप अखबार का प्रकाशन ठप करा सकते हैं तो यूनियन भी बना सकते हैं । इसे बेहतर तरीके से चला सकते हैं । 

आप काम पर लौट आए हैं । आपसे भी कहा गया होगा कि सारा कहा सुना भूल जाइए , हम आपके लिए जो थे वही रहेंगे । मित्रों यह सब कहने की बात है । हड़ताल सरकारी/अर्द्ध सरकारी/आयोग या निजी संस्थान हो, हर जगह के साइड इफेक्ट कमोबेश एक जैसे होते हैं । हड़ताल क्या, उपवास करके देख लीजिए, अधिकारी आपको बर्दाश्त नहीं करेंगे। फिर आपके  ऊपर सिर्फ अधिकारी ही नहीं, मालिक भी सिर पर सवार रहता है। अब आप लोकतंत्र के तथाकथित चौथे खंभे हैं, तब भी आपके ऊपर गाज गिरेगी । हड़ताल में जिन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया होगा, वह निकाला जाएगा या इतनी दूर तबादला कर दिया जाएगा कि उसके लिए नौकरी करना मुश्किल हो जाए ।

मित्रों यह दरख्वास्त किसी एक साथी से नहीं है, सभी से है । पहले तो एकजुट होइए , संगठन बनाइए तो सिर्फ पत्रकारों का नहीं, सभी को शामिल करिए । जबरन इस्तीफा लेने पर पहले निकट के थाने में मामला दर्ज करायें फिर उसकी प्रति अपने वरिष्ठ अथिकारी को भेजें, उसके बाद ही कोर्ट जाएं हालांकि यह हम सबके लिए आसान नहीं है। बेहतर लड़ाई यूनियन के माध्यम से ही संभव है और वही अंतिम विकल्प है।

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सहारा में एक पत्र पर टूट गई हडताल

अपने परम आदरणीय प्रातः स्मरणीय सुब्रतो राय के एक खत पर चट्टानी मजबूती के साथ मोर्चे पर डटे कर्तव्य योगियों ने एक झटके में हडताल तोड़ दी. आखिर क्यों? देश के सबसे बडे न्याय के मंदिर सुप्रीम कोर्ट में अपने प्यारे प्यारे (इनके सहारा श्री का यही संबोधन है) के कष्टों के कारण वेतन का न दे पाना बताते हुए सहारा के वकील कपिल सिब्बल का कहना कि ”मेरे बैंक खाते आपने सीज कर रखे हैं, मैं उन्हें पैसे कहां से दूं, मैं पैसे नहीं दे पा रहा हूं, आप खाते पर से रोक हटाइए, तो मैं पैसे दूं”, यह इशारा करता है कि कहीं हड़ताल शुरू होना और खत्म होना प्रबंधन की प्लानिंग तो नहीं थी? क्या कोर्ट की तारीख और हड़ताल की तारीख का मिल जाना महज संयोग था या प्री-प्लांड रणनीति?

 

शुरुआती दिनों की मैनेजमेंट की भाषा और अंत की भाषा दोनों में जमीन आसमान का अंतर था. पहले बुधवार तक वेतन उसी माह मजीठिया वेतन आयोग संबंधी लेटर जिसमें सब कुछ पारदर्शिता के दर्शाने का वादा और कहा सिर्फ सब्जबाग। सूत्रों के अनुसार पहले अगले दिन पूरा वेतन फिर इसी बकाया देने का प्रलोभन दिया गया था। जब शाम को वास्तविक संदेश आया तो सारी तारीख गायब थी। वेतन जल्दी देने की बात कही गई। बकाया कब देंगे, इसका जिक्र नहीं है। पत्र में नये वेतन आयोग की भूले से चर्चा तक नहीं की गई। जबकि अवमानना की तारीख २८ जुलाई को है। बहरहाल, कर्मचारियों की जितनी दाद दी जाए कम है क्योंकि आंदोलन बिना लीडरशिप के, बिना तैयारी के और बिना किसी आह्वान के शुरू किया गया और डट के लडा गया। सब कुछ स्वतःस्फूर्त था। हाँ, कार्य बहिष्कार समाप्त होते ही यह सुगबुगाहट भी शुरू हो गई कि कहीं आंदोलन तोड़वाया तो नहीं गया?

एक सहाराकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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पांच दिनो की हड़ताल का बहाना लेकर सहारा के वकील सिब्बल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, नोएडा में मंगलवार शाम तक तनाव बरकरार

दिल्ली : एक तरफ कर्मचारियों को छह-छह महीने से तनख्वाह नहीं, दूसरी तरफ अथाह दौलत में खेलते मालिकान और ऊंची सैलरी से ऐशो आराम का जीवन जी रहे कंपनी के आला अधिकारियों का मीडिया तमाशा पांच दिनो की हड़ताल से अब लड़खड़ाने लगा है। कंपनी के सर्वेसर्वा दिल्ली के तिहाड़ जेल से अपना अंपायर चला रहे हैं। ऐसी विडंबनापूर्ण स्थिति शायद ही दुनिया भर में किसी भी मीडिया घराने की होगी। उधर, सहारा के वकील एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में सहारा में तालाबंदी का हवाला देते हुए हलफनामा दे दिया है। कोर्ट को बताया गया है कि मीडिया हाउस पर तालाबंदी पहले से है और इससे कर्मचारी गुस्से में हैं। संभवतः कोर्ट में कानूनी खेल खेलने के उद्देश्य से ऐसा कहा गया है। इससे ये भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि प्रेसर बनाकर ये कही सेबी के देय से मुक्त होने और सुब्रत रॉय को मुक्त कराने का षड्यंत्र तो नहीं है। मंगलवार को दिल्ली में सहारा प्रबंधन और कर्मियों से वार्ता हुई है। सहमति पर मतैक्य नहीं हो सका है। 

नोएडा मुख्यालय में हड़ताल और लखनऊ, देहरादून, पटना, वाराणसी यूनिटों में मीडिया कर्मियों के बहिष्कार का अब साफ असर सहारा के मीडिया तंत्र पर गहराने लगा है। समूह इन दिनो गर्दिश के दौर से गुजर रहा है। अखबार के अलावा न्यूज चैनलों पर भी सिर्फ पुराने फीचर प्रसारित हो रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी 11 जुलाई से अपडेट होना बंद हो चुका है। कर्मचारियों को जो आधा-तीहा सैलरी दी भी जा रही है, समय से नहीं। इससे उनका गुस्सा अब आसमान पर है। वे आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में हैं। 

गौरतलब है कि नोएडा मुख्यालय से अखबार के प्रमुख पेज अन्य यूनिटों में भेजे जाते हैं तो उनमें स्थानीय खबरों के पन्ने संलग्न कर पेपर प्रकाशित किया जाता रहा है। नोएडा में पूरी तरह प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन हड़ताल पर चले जाने से समूह की बाकी यूनिटों को प्रमुख पेज मिलने बंद हैं। वहां के मीडिया कर्मियों का कहना है कि जब नोएडा से पन्ने ही नहीं आ रहे तो वे अखबार कैसे बनाएं। इस तरह गत शनिवार से कानपुर अथवा पटना में जो मास्टर एडिशन प्रकाशित हुए भी हैं, वे पाठकों के किसी काम के न होने से इसका सहारा समूह के बाजार पर गंभीर असर पड़ा है। उसका पूरा मीडिया बाजार जैसे उजड़ता जा रहा है। 

सहारा वन मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट के शेयर दिन भर के कारोबार के दौरान 3 फीसदी टूटकर 71 रुपए पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त समूह हिंदी में पांच समाचार चैनलों का परिचालन करता था, जो सहारा समय ब्रैंड के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान की क्षेत्रीय खबरों का प्रसारण करते थे। इसके अतिरिक्त समूह आलमी समय नाम से उर्दू चैनल का भी परिचालन करता था। समूह की वेबसाइट के अनुसार उसके  प्रमुख हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा के 43 संस्करण थे और इसका प्रकाशन 7 केंद्रों से होता था। समूह रोजनामा राष्ट्रीय सहारा नाम से दैनिक उर्दू समाचार पत्र का भी प्रकाशन करता था, जिसके 15 संस्करण थे। उसका पूरा काम अस्तव्यस्त हो चुका है। 

उधर, सेबी मामले में सुब्रत रॉय का तिहाड़ में लंबे समय से कैद रह जाना भी समूह के विनाश का कारण बन चुका है। ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ के मुताबिक सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया है कि ग्रुप के टेलिविजन नेटवर्क व प्रेस बंद हो गए हैं और कर्मचारी समूह छोड़कर जा रहे हैं। सेबी को बकाया नहीं चुकाने के कारण रॉय पिछले साल मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। 

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सहारा नोएडा के हड़ताली मीडियाकर्मियों को रात में गिरफ्तार करने की तैयारी!

नोएडा से आ रही खबरों के मुताबिक सहारा मीडिया के आफिस के बाहर पुलिस ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी के लिए तैयारी की है. ये कार्रवाई देर रात की जा सकती है. उधर, पूरे ग्रुप में राष्ट्रीय सहारा अखबार का मास्टर एडिशन यानि एक ही अखबार हर जगह प्रकाशित करने की तैयारी चल रही है. इस काम में कुछ एक लोग ही सपोर्ट कर रहे हैं. देहरादून से राष्ट्रीय सहारा के कुछ कर्मियों ने फोन पर बताया कि वेतन के लिए कई दिनों से संघर्ष कर रहे देहरादून राष्ट्रीय सहारा के कर्मचारियों को यूनिट हेड मृदुल बाली ने जबरन गेट से बाहर कर दिया.

राष्ट्रीय सहारा देहरादून के हड़ताली मीडियाकर्मी

आफिस से बाहर किए गए हड़ताली कर्मियों ने बताया कि प्रबंधन ने उपस्थिति पंजिका को दरकिनार करते हुए एक अलग रजिस्टर रखवा दिया. इस रजिस्टर पर काम करने वालों की उपस्थिति ही मानने की बात कही जा रही है. इस रजिस्टर पर उन्हीं ने हस्ताक्षर किए जो अब तक अघोषित रूप से प्रबंधन के साथ हैं. हालांकि ऐसे लोगों की संख्या बमुश्किल 4 या 5 ही है.

ज्ञात हो कि वर्ष 2007 में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लांच हुआ राष्ट्रीय सहारा अपने कर्मयोगियों को वेतन न मिलने की वजह से सोमवार को प्रकाशित नहीं हो सका. कर्मयोगी पिछले कई महीने से लगातार वेतन के वजाय, सिर्फ आश्वासन मिलने से परेशान थे. उनके आगे परिवार के भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है, सोमवार को कई कर्मचारी, जिनमें संपादकीय टीम के लोग हैं, दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं, जबकि कई लोग फील्ड में अपने काम में लगे देखे गए हैं.

इस बीच DELHI UNION OF JOURNALISTS ने एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल नोएडा के डिप्टी लेबर कमिश्नर से मिला और इस मामले में मेमोरेंडम सौंपा. डीएलसी ने मंगलवार को सहारा प्रबंधन के लोगों को मीटिंग के लिए बुलाया है. प्रेस रिलीज इस प्रकार है…

Intervention of Dy. Labour Commission sought in Sahara wage issue
 
A delegation of plant unions and the Delhi Union of Journalists met the Dy. Labour Commissioner, Uttar Pradesh at his office at Noida today. The delegation handed over a memorandum to him. Expressing its serious concern about the non-payment of wages of the employees and journalists working at the Sahara media group, the delegation sought the intervention of the Dy. Commissioner. Based on the complaint, the Dy. Labour Commissioner has summoned the management of the Sahara group for a meeting on Tuesday at his office.

The memorandum  also brought to the notice of the Dy. Labour Commissioner that instead of paying the employees their due wages, the management was threatening the employees with the use of the police and other such measures and asking them to withdraw their peaceful protest. The delegation among others was led by DUJ General Secretary, S K Pande, Convenor of the Sahara Media Sangharsh Samiti, Charan Singh Rajput and Gangeshwar Dutt Sharma Secretary of the Noida unit of the CITU. The workers and journalists of Sahara have resolved to further intensify their struggle if their dues are not paid immediately.

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