रोहतक में अखबार विक्रेताओं की हड़ताल से व्यापारियों को दोहरा झटका

रोहतक शहर के अखबार विक्रेता अपनी मागों को लेकर तीसरे दिन भी हड़ताल पर बैठे रहे। इस हड़ताल के चलते समाचारपत्र कम्पनियों के पसीने छूट गए हैं। आलम ये है कि शहर के मुख्य चौराहों तथा पार्कों में अखबार के प्रतिनिधि खुद जाकर लोगों को अखबार बाँट रहे हैं। कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर वेंडर्स आज भी टस से मस नहीं हुए। इससे आज भी शहर के दुकानों तथा घरों में अखबार नहीं पहुंच पाया।

फिल्म और टीवी कामगारों ने महाराष्ट्र सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म करने की घोषणा की

मुंबई में फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल खत्म हो गई है। महाराष्ट्र के श्रममंत्री संभाजी निलंगेकर पाटिल के आश्वासन के बाद आज बुधवार को  फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज की ओर से आयोजित 22 यूनियनों की हड़ताल समाप्त कर दी गयी। यूनियन पिछले 14 अगस्त की रात 12 बजे से हड़ताल पर थी। इस हड़ताल में शामिल कामगारों को श्रममंत्री संभाजी निलंगेकर पाटिल तथा भाजपा के मुम्बई अध्यक्ष और विधायक आशीष शेलार और पूर्व विधायक तथा नगर सेवक अतुल शहा ने भरोसा दिया कि हड़ताली कामगारों की मांग को लेकर सरकार गंभीर है और कामगारों के पक्ष में सरकार ठोस कदम उठाने जा रही है।

भारी बारिश को देखते हुए फ़िल्म और टीवी के हड़ताली कामगारों को दिया गया 16 घंटे का ब्रेक

मुम्बई के गोरेगांव स्थित फिल्मसिटी स्टूडियो के बाहर डटे फ़िल्म-टीवी कामगारों की हड़ताल मंगलवार को 15वें दिन भी जहां जारी रही.  हड़ताली कामगार भारी बारिश में भी हड़ताल पर डटे थे. वहीं मंगलवार को मुम्बई में हो रही भारी बारिश और गणपति के पांचवे दिन के विसर्जन को देखते हुए फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा ने इस हड़ताल में शामिल सभी लोगों से दोपहर में निवेदन किया कि सभी लोग अपने घर चले जाएं। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कई कामगारों को निजी वाहन से उनके घर तक पहुंचाया ताकि किसी हड़ताली कामगार को किसी प्रकार की दिक्कत न हो लेकिन कुछ हड़ताली कामगार वहां से हटने को तैयार नहीं हुए तथा कैम्प में डटे रहे। बाद में किसी तरह समझा बुझाकर उन्हें वापस घर भेजा गया।

‘भाबीजी’ शिल्पा शिंदे बन गईं नेताजी, हड़ताली कर्मियों के पक्ष में दिया जोरदार भाषण (देखें वीडियो)

फ़िल्म-टीवी वर्कर्स की स्ट्राइक में एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे भी हुईं शामिल… मुम्बई के फिल्मसिटी स्टूडियो के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पिछले 9 दिन से हड़ताल पर बैठे सिनेमा और टेलीविजन कामगारों, टेक्नीशियन और महिला कलाकारों का उत्साह बढ़ाने ‘भाभी जी घर पर हैं’ की अभिनेत्री शिल्पा शिंदे भी पहुंचीं। शिल्पा शिंदे ने कामगारों द्वारा उठाई गयी मांग को जायज ठहराया और कहा निर्माता जानबूझकर अपनी शूटिंग इतनी दूर रखते हैं ताकि उनका पैसा बचे। उनके इतने दूर शूटिंग रखने से टेक्नीशियनों को कोई फायदा नहीं रहता।

हड़ताल से उड़ान, बढ़ो बहु, चिड़ियाघर, नामकरण आदि की शूटिंग बंद

मुख्यमंत्री ने बुलाई फेडरेशन और प्रोड्यूसरों की बैठक… फ़िल्म और टीवी कामगार तथा महिला कलाकार और टेक्नीशियन पिछले 7 दिन से हड़ताल पर… अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुम्बई के गोरेगांव पूर्व स्थित फिल्मसिटी स्टूडियो के बाहर भारी बारिश में आमरण अनशन और हड़ताल पर बैठे फ़िल्म और टीवी कामगारों की यूनियनों को नेतृत्व करने वाली फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज और प्रोड्यूसरों की संस्था को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक के लिए आमंत्रित किया है।

फिल्म और टीवी कामगारों की हड़ताल शुरू, 40 टीवी सीरियल्स और 10 फिल्मों की शूटिंग ठप

मुंबई : अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के कामगार और टेक्निशियन 14 अगस्त की रात से हड़ताल पर चले गये हैं। फेडरेशन आफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज संगठन के बैनर तले हो रही इस हड़ताल में २२ यूनियन शामिल हुयी हैं। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले 2.50 लाख कर्मचारी हड़ताल पर गये हैं। हड़ताल की वजह से फिल्म की शूटिंग के लिए स्टूडियो बुकिंग भी बंद हो गई है। जहां हमेशा चहलपहल रहती थी उन स्टूडियो में अब सन्नाटा पसर गया है।

सेलरी न मिलने से दैनिक भास्कर कोटा के सर्वेयरों ने किया हड़ताल

कोटा से खबर है कि दैनिक भास्कर के सर्वेयरों ने हड़ताल कर दिया है. ये दो महीने से सेलरी न मिलने से नाराज है. सर्वेयरों ने प्रबंधन से सेलरी के लिए बात की लेकिन जब उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो इन्होंने हड़ताल करने का ऐलान कर दिया. सभी सर्वेयरों ने एकजुट होकर दैनिक भास्कर आफिस के सामने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान सर्वेयर हाथ में तख्तियां लिए हुए थे और भास्कर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.

फैजाबाद में अमर उजाला के पत्रकार तीन दिन से कलम बंद हड़ताल पर, नहीं सुन रहा प्रबंधन

फैजाबाद। दूसरों की सहायता और समस्याओं को उठाने वाले अमर उजाला के फैजाबाद शहर के रिपोर्टरों की कोई नहीं सुन रहा है। पिछले तीन दिनों से सभी रिपोर्टर विभिन्न समस्याओं को लेकर कलम बंद हड़ताल पर हैं। इसकी सूचना लखनऊ और नोयडा तक बैठे बड़े अधिकारियों के पास पहुंची है। लेकिन फैजाबाद में कलम बंद हड़ताल करने वाले पत्रकारों से वार्ता या उनके दुख-सुख की जानकारी लेने कोई नही पहुंचा है।

लखनऊ में कई दिन से हड़ताल पर हैं न्यूज पेपर हॉकर… काश ऐसी हिम्मत पत्रकारों में होती…

लखनऊ में न्यूज पेपर हॉकरों की हड़ताल का पांचवां दिन है। नम्बर 1, सबसे आगे और देश के सबसे बड़ा अखबार होने का दंभ भरने वाले समाचार पत्रों के बंडल रद्दी हो रहे हें। राजधानी लखनऊ ही नहीं बल्कि देशभर में पत्रकार कई गुटों में बंटे हैं। लखनऊ में कई गुट व धाराएं हैं। मान्यता प्राप्त व गैर प्राप्त का भेद अलग से है। चार दिन से राजधानीवासियों को अखबार का दीदार नहीं हुआ है। लखनऊ समाचार वितरक विकास मंच ने सरकार और पाठकों से अपील की है कि आजादी से पहले मिल रहा कमीशन आज भी बरकरार है। बीते 67 वर्षो में मंहगाई कई गुना बढ़ गई है। लेकिन उनका कमीशन नहीं बढ़ा है, उलटे घटा दिया है।

सहारा मीडिया में पटना एडिशन को छोड़ बाकी कहीं नहीं छपा अखबार, चैनल पर भी नई खबरें नहीं चल रहीं

सेलरी के लिए सहारा कर्मियों की हड़ताल की वजह से सहारा मीडिया का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जानकारी के मुताबिक दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और वाराणसी में अखबार नहीं छप सका. सिर्फ पटना में सिर्फ रेलवे स्टेशन एडिशन व एक डाक एडिशन मात्र छपा. बताया जाता है कि गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के एडिशन निकालने की अपील पर अखबारकर्मियों ने कहा कि पटना वालों की तरह हम दोगलापन नहीं कर सकते.

सहारा प्रबंधन ने 28 तक सेलरी देने को कहा, कर्मी बोले- तब तक मास्टर एडिशन ही छपेगा

राष्ट्रीय सहारा अखबार में हड़ताल के कारण केवल मास्टर एडिशन का प्रकाशन हो रहा है. इस मास्टर एडिशन में स्थानीय खबरें नहीं होतीं. केवल सेंट्रलाइज पेज बनाकर उसे आल एडिशन छपवा दिया जा रहा है, मास्टर एडिशन के रूप में. हड़ताल के कारण लखनऊ में भी मास्टर एडिशन का प्रकाशन चल रहा है जिसमें लखनऊ की एक भी खबर नहीं है. हड़ताल को लेकर मैनेजमेंट सक्रिय हो गया है.

सेलरी न मिलने पर राष्ट्रीय सहारा अखबार की कई यूनिटों में हड़ताल

सहारा मीडिया से बड़ी खबर आ रही है कि साल भर से सेलरी न मिलने से नाराज राष्ट्रीय सहारा अखबार के कर्मियों ने हड़ताल कर दिया है. हड़ताल से नोएडा, लखनऊ, बनारस, कानपुर यूनिटें प्रभावित हैं. बताया जा रहा है कि गोरखपुर और पटना की यूनिटों में हड़ताल नहीं हुआ है. कार्य बहिष्कार के कारण सहारा मीडिया के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भागदौड़ तेज कर दी है. किसी तरह हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें हो रही हैं.

स्नैपडील ने 600 कर्मियों को निकाला, लड़कियों ने आफिस में कब्जा जमाया, मीडिया ने साधी चुप्पी

दिल्ली के सरित विहार से खबर है कि वहां स्नैपडील कंपनी के आफिस से छह सौ कर्मियों की छंटनी कर दी गई है. इन लोगों को अचानक कह दिया गया कि अब आपकी कोई जरूरत नहीं है. इससे खफा सैकड़ों कर्मियों ने आफिस के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. वहीं सैकड़ों लड़कियों ने आफिस के अंदर की कब्जा जमा रखा है. निकाले गए कर्मियों में आधे से ज्यादा लड़कियां हैं जो आफिस से बाहर नहीं निकल रही हैं.

एकजुट होने लगे सहारा कर्मी, सेलरी के लिए किया प्रबंधन का घेराव

सहारा कर्मी अपनी सेलरी के लिए एकजुट होने लगे हैं. सहारा मीडिया में सेलरी संकट और कर्मचारियों की अंदरखाने एकजुटता की खबर भड़ास पर प्रकाशित होने के कुछ घंटे के बाद ही सहारा के नोएडा आफिस में कई महीने से सेलरी न मिलने से नाराज सहारा कर्मियों ने प्रबंधन का घेराव कर लिया. आंदोलनकारी कर्मियों ने भड़ास को एक मेल के जरिए जानकारी दी कि कर्मचारियों की एकजुटता और घेराव देखकर वहां मौजूद सभी एचओडी अपनी अपनी केबिन में भाग निकले.

दीवाली के बाद आंदोलन तेज करेंगे जागरण कर्मचारी

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने पूरी एकजुटता के साथ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है। नोएडा के सेक्टर 62 स्थित पार्क में हुई बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि मजीठिया वेज बोर्ड के लिए चल रहे आंदोलन को और धार दी जायेगी। बैठक में लुधियाना, हिसार, जालंधर और धर्मशाला से आये कर्मचारियों ने भी कहा कि वे जागरण प्रबंधन के अत्याचार ले आगे कतई सिर नहीं झुकाएँगे।

दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल के एक माह हुए पूरे, कर्मचारियों ने कहा- डटे रहेंगे

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफरिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से अपने हक़ और इंसाफ के लिए आंदोलित कर्मचारी बेहद अनुशासित ढंग से पूरे महीने दिल्ली और नोएडा में प्रदर्शन करते रहे लेकिन जागरण प्रबंधन उनके आंदोलन को कुचलने में अपनी सारी ताकत खर्च करता रहा।

जागरण प्रबंधन ने धर्मशाला यूनिट के 12 मीडियाकर्मियों को किया सस्पेंड

धर्मशाला। दैनिक जागरण ने अपने हक की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों के दमन की नीति पर चलते हुए बनोई स्थित धर्मशाला यूनिट के 12 कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इन कर्मियों ने उत्तर भारत की बाकी यूनिटों  साथियों के साथ शुक्रवार को काम का बहिष्कार किया था।

सेलरी की मांग को लेकर सहारा मीडिया के कर्मचारी 6 अक्टूबर से हड़ताल पर जाएंगे

सहारा मीडिया के कर्मचारी पूरा वेतन न मिलने सहित कई मांगों को लेकर 6 अक्टूबर 2015 से हड़ताल करने जा रहे हैं। यह हड़ताल फिलहाल सहारा कामगार संगठना के नेतृत्व में होने जा रही है। इस हड़ताल का समर्थन करते हुए उत्तर प्रदेश की यनिट हेड गीता रावत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, यूपी के सीएम सहित तमाम लोगों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए पत्र भेजा है।

दैनिक जागरण नोएडा में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी

Pandey Parmanand : Today (03.10.2015) was the second day of the strike of Dainik Jagran employees of NOIDA and they came out in large number at Jantar Mantar to sit on dharna. I marvel at the enthusiasm of the employees who in spite of all threat and intimidation of the Management defied the dictate and struck the work.

अभी भी कुछ कुत्‍ते चाट रहे हैं जागरण मैनेजमेंट के तलवे, सुनिए विष्णु त्रिपाठी के श्रीमुख से

Fourth Pillar : मजीठिया वेतनमान के समर्थन और दैनिक जागरण प्रबंधन के अत्‍याचारों के विरोध में नई दिल्‍ली स्थित जंतर-मंतर से दैनिक जागरण कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन, कैंडल मार्च और हड़ताल का बिुगल तो बजा दिया, लेकिन अभी भी कुछ कुत्‍ते जागरण मैनेजमेंट के तलवे चाट रहे हैं। शायद यही वजह है कि कुछ यूनिटों में दैनिक जागरण छप पाना संभव हो पाया। धर्मशाला, लुधियाना और हिसार यूनिटें पूरी तरह से ठप रहीं। एक ओर तमाम कर्मचारी अपनी नौकरी दांव पर लगाकर आंदोलन में कूद पड़े हैं और मजीठिया वेज बोर्ड इम्लिमिंटेशन संघर्ष समिति, केयूडब्‍ल्‍यूजे, आईएफडब्‍ल्‍यूजे, डीयूजे सहित कई मजदूर संगठन आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ कुत्‍ते टाइप के पत्रकार दैनिक जागरण प्रबंधन के तलवे चाटने में लगे हैं।

IFWJ condemns the atrocities of DJ Management and supports the workers’ strike (देखें दैनिक जागरण कर्मियों के आंदोलन की तस्वीरें)

Thousands of journalists and non-journalists of various newspapers today staged adharna at Jantar Mantar in support of the struggling employees of Dainik Jagran against the atrocities of its Management. The Jagran Management, known for its anti labour trade practices, has unleashed the reign of terror and victimisation of the employees. This newspaper’s Management has firstly obtained signatures of employees by force and fraud on different dates to deny them Majithia Award is now suspending, transferring and terminating the employees so that they do not unionize and raise their voice for their genuine demands.  The shameless Jagran Management has summarily terminated the services of 16 employees of NOIDA without following the due process of law but strangely, the UP government’s Labour department is sitting silent. So much so, the Management is using the state police to oppress the agitation of the employees.

दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे, कई यूनिटों में हड़ताल (देखें वीडियोज)

Yashwant Singh : जंतर मंतर से लौट कर आ रहा हूं. दैनिक जागरण के साथी वहां धरने पर हैं. मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने की मांग को लेकर ये साथी लंबे समय से आंदोलनरत हैं. आज बड़ी संख्या में दैनिक जागरण कर्मियों को जंतर मंतर पर धरने पर बैठे देखकर दिल को बहुत ठंढक पहुंची. काश ऐसे ही हर मीडिया हाउस के लोग एकजुट होते. वहां पहुंचते ही तत्काल फोटो खींचना वीडियो बनाना शुरू किया. वीडियो बनाने के दौरान ही मंच संचालक साथी ने मुझे भाषण देने के लिए बुला लिया. खैर, वहां गया और तीन मिनट तक बोला. उनका उत्साहवर्द्धन किया. यह सब वीडियो अपन के पास है. बाद में जब लौटने लगा तो देखा कि बीएड टीईटी वाले इतनी बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर बैठे हैं लेकिन कहीं कोई मीडिया कवरेज नहीं. मुझसे रहा नहीं गया. मोबाइल को वीडियो मोड में किया और इन्हें रिकार्ड करने लगा.

मध्य प्रदेश के सागर में हॉकरों की हड़ताल, नहीं बंटे अखबार

सोमवार 21 सितंबर को मध्य प्रदेश के सागर जिले में अखबार नहीं बंटे। हॉकरों ने हड़ताल कर रखी है। वे अपना कमीशन बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो मध्य भारत के इस मशहूर शहर में पहली बार पाठकों को अखबार पढऩे से वंचित रहना पड़ा है। सबसे ज्यादा आघात दैनिक भास्कर को लगा है। पहली बार उसका प्रबंधन अपनी खबरी पोटली को पाठकों के समक्ष पेश कर पाने में नाकाम रहा है।

सहारा के जिस डिवीजन के लोग हड़ताल करेंगे, सहाराश्री उस डिवीजन को ही बंद कर देंगे… देखें नोटिस

सहारा अपने कर्मचारियों को लगभग डेढ़ साल से नियमित वेतन नहीं दे रहा है। एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, सिर्फ आधा वेतन दिया जा रहा है। वेतन न मिलने से लाखों कर्मचारी प्रभावित हैं। वेतन न मिलने की वजह से कई तो खुदा को प्यारे हो गए। पंद्रह सितंबर 2015 को सहारा के सभी कार्यालयों में सहारा सुप्रीमो का यह पत्र नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है। पत्र में वेतन न देने की बात करते हुए हड़ताल न करने की हिदायत दी गई है साथ ही चेतावनी या धमकी जो कह लीजिए, दी गई है कि उस विभाग को ही बंद कर दिया जाएगा जहां के कर्मचारी वेतन की मांग करेंगे। मसलन पैराबैंकिंग में हड़ताल होती है तो वह ही बंद कर दिया जाएगा।

कर्मचारियों की लिस्ट में अपना नाम न पाकर राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संवादसूत्र भड़के

इस बीच, ताजी सूचना ये है कि राष्ट्रीय सहारा देहरादून के कर्मचारियों की लिस्ट जो श्रम आयुक्त को प्रबंधन द्वारा सौंपी गई है, उस सूची में अपना नाम न पाकर संवादसूत्र भड़क उठे हैं। आठ-आठ साल से नियमित कर्मचारी की तरह काम कर रहे संवादसूत्रों का कहीं नाम ही नहीं है।

दैनिक जागरण नोएडा के 18 मीडियाकर्मी टर्मिनेट, प्रबंधन ने बाउंसर बुलाया, पुलिस फोर्स तैनात

दैनिक जागरण नोएडा की हालत बेहद खराब है. यहां मीडियाकर्मियों का जमकर उत्पीड़न किया जा रहा है और कानून, पुलिस, प्रशासन, श्रम विभाग, श्रम कानून जैसी चीजें धन्नासेठों के कदमों में नतमस्तक हैं. बिना किसी वजह 18 लोगों को टर्मिनेट कर उनका टर्मिनेशन लेटर गेट पर रख दिया गया. साथ ही प्रबंधन ने बाउंसर बुलाकर गेट पर तैनात करा दिया है. भारी पुलिस फोर्स भी गेट पर तैनात है ताकि मीडियाकर्मियों के अंदर घुसने के प्रयास को विफल किया जा सके. टर्मिनेट किए गए लोग कई विभागों के हैं. संपादकीय, पीटीएस से लेकर मशीन, प्रोडक्शन, मार्केटिंग आदि विभागों के लोग टर्मिनेट किए हुए लोगों में शामिल हैं.

हड़ताल बर्दाश्त नहीं, अब होंगे साइड इफेक्ट

हर चीज का असर होता है । बारिश का होता । आमतौर पर इसके बाद मौसम सुहाना हो जाता है तो आंधी का भी असर होता है। हर तरफ धूल ही धूल रहती है । कुछ हड़ताल का असर पहले होता है तो कुछ का बाद में लेकिन होता सबका है । मित्रो कहने का मतलब सहारा में हड़ताल समाप्त हो गई या टूट गई या तोड़वा दी, जो भी हो, यह आपकी एकजुटता के कारण हुआ। अब जरूरत है इसे स्थायी रूप से संगठित रूप देने की । स्थायी स्वरूप तभी हो सकता है, जब आप इसे यूनियन का रूप दें । आप दे सकते हैं। वह इसलिए कि जब आप अखबार का प्रकाशन ठप करा सकते हैं तो यूनियन भी बना सकते हैं । इसे बेहतर तरीके से चला सकते हैं । 

सहारा में एक पत्र पर टूट गई हडताल

अपने परम आदरणीय प्रातः स्मरणीय सुब्रतो राय के एक खत पर चट्टानी मजबूती के साथ मोर्चे पर डटे कर्तव्य योगियों ने एक झटके में हडताल तोड़ दी. आखिर क्यों? देश के सबसे बडे न्याय के मंदिर सुप्रीम कोर्ट में अपने प्यारे प्यारे (इनके सहारा श्री का यही संबोधन है) के कष्टों के कारण वेतन का न दे पाना बताते हुए सहारा के वकील कपिल सिब्बल का कहना कि ”मेरे बैंक खाते आपने सीज कर रखे हैं, मैं उन्हें पैसे कहां से दूं, मैं पैसे नहीं दे पा रहा हूं, आप खाते पर से रोक हटाइए, तो मैं पैसे दूं”, यह इशारा करता है कि कहीं हड़ताल शुरू होना और खत्म होना प्रबंधन की प्लानिंग तो नहीं थी? क्या कोर्ट की तारीख और हड़ताल की तारीख का मिल जाना महज संयोग था या प्री-प्लांड रणनीति?

पांच दिनो की हड़ताल का बहाना लेकर सहारा के वकील सिब्बल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, नोएडा में मंगलवार शाम तक तनाव बरकरार

दिल्ली : एक तरफ कर्मचारियों को छह-छह महीने से तनख्वाह नहीं, दूसरी तरफ अथाह दौलत में खेलते मालिकान और ऊंची सैलरी से ऐशो आराम का जीवन जी रहे कंपनी के आला अधिकारियों का मीडिया तमाशा पांच दिनो की हड़ताल से अब लड़खड़ाने लगा है। कंपनी के सर्वेसर्वा दिल्ली के तिहाड़ जेल से अपना अंपायर चला रहे हैं। ऐसी विडंबनापूर्ण स्थिति शायद ही दुनिया भर में किसी भी मीडिया घराने की होगी। उधर, सहारा के वकील एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में सहारा में तालाबंदी का हवाला देते हुए हलफनामा दे दिया है। कोर्ट को बताया गया है कि मीडिया हाउस पर तालाबंदी पहले से है और इससे कर्मचारी गुस्से में हैं। संभवतः कोर्ट में कानूनी खेल खेलने के उद्देश्य से ऐसा कहा गया है। इससे ये भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि प्रेसर बनाकर ये कही सेबी के देय से मुक्त होने और सुब्रत रॉय को मुक्त कराने का षड्यंत्र तो नहीं है। मंगलवार को दिल्ली में सहारा प्रबंधन और कर्मियों से वार्ता हुई है। सहमति पर मतैक्य नहीं हो सका है। 

सहारा नोएडा के हड़ताली मीडियाकर्मियों को रात में गिरफ्तार करने की तैयारी!

नोएडा से आ रही खबरों के मुताबिक सहारा मीडिया के आफिस के बाहर पुलिस ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी के लिए तैयारी की है. ये कार्रवाई देर रात की जा सकती है. उधर, पूरे ग्रुप में राष्ट्रीय सहारा अखबार का मास्टर एडिशन यानि एक ही अखबार हर जगह प्रकाशित करने की तैयारी चल रही है. इस काम में कुछ एक लोग ही सपोर्ट कर रहे हैं. देहरादून से राष्ट्रीय सहारा के कुछ कर्मियों ने फोन पर बताया कि वेतन के लिए कई दिनों से संघर्ष कर रहे देहरादून राष्ट्रीय सहारा के कर्मचारियों को यूनिट हेड मृदुल बाली ने जबरन गेट से बाहर कर दिया.

राष्ट्रीय सहारा देहरादून के हड़ताली मीडियाकर्मी