मनोज तोमर को राष्ट्रीय सहारा अखबार का ग्रुप एडिटर बनाया गया

लखनऊ से सहारा मीडिया से खबर है कि राष्ट्रीय सहारा अखबार के लखनऊ के संपादक मनोज तोमर को प्रमोट करके अखबार का ग्रुप एडिटर बना दिया गया है. इस बाबत एक इनटरनल आदेश जारी कर दिया गया है. Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मांगा था मजीठिया का हक, इसलिए नहीं छापा निधन का समाचार

जिनके साथ 25 साल गुजारा उनका भी मर गया जमीर, नहीं शामिल हुए अंतिम यात्रा में, यह है सहारा परिवार का सच…  वाराणसी : सहारा समूह के हुक्मरान सुब्रत राय सहारा एक तरफ जहां सहारा को एक कंपनी नहीं बल्कि परिवार मानने का दंभ भरते हैं, वहीं इसी सहारा समूह के पत्रकार रह चुके जयप्रकाश श्रीवास्तव के निधन की एक लाईन की खबर इसलिये राष्ट्रीय सहारा अखबार में नहीं लगायी गयी क्योंकि जयप्रकाश ने अखबार प्रबंधन से जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपना बकाया मांग लिया था।

राष्ट्रीय सहारा अखबार के वरिष्ठ पत्रकार कुणाल ने कर दी ये भयंकर गलती, मचा हाहाकार

राष्ट्रीय सहारा अखबार के नेशनल ब्यूरो हेड और राजनीतिक संपादक कुणाल ने एक बड़ी गलती कर दी है. इसे लेकर पूरे समूह में हाहाकार मचा हुआ है. ह्वाट्सअप पर सहारा मीडिया के न्यूज चैनलों और अखबारों के मीडियाकर्मियों का एक आफिसियल ग्रुप ‘समय रिपोर्टर्स’ के नाम से संचालित किया जाता है. इस ग्रुप में सहारा में काम करने वाली महिला मीडियाकर्मी भी शामिल हैं. कल रात इसी ग्रुप पर कुणाल की तरफ से दस सेकेंड का एक पोर्न वीडियो डाल दिया गया. इसके बाद तो हड़कंप मच गया.

सहारा प्रबंधन के दमन से दम तोड़ गया सहाराकर्मी!

राष्ट्रीय सहारा में दमनात्मक नीति का हाल यह है कि हक मांगने पर 47 कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। काम कर रहे कर्मचारियों को इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं। प्रबंधन कर्मचारियों को बुला-बुलाकर इस्तीफा लिखवाने की धमकी दे रहा है। नौकरी लेने की नीयत से बहुत सारे कर्मचारियों का दूर-दराज स्थानों पर स्थानांतरण कर दिया गया है। यह सब तब किया जा रहा है कि जब प्रबंधन कर्मचारियों को बकाया पैसा देने को तैयार नहीं। प्रबंधन के इस दमन के आगे प्रोसेस विभाग में काम कर रहा बी.एम. यादव दम तोड़ गया।

सहारा का हाल : अय्याशी के लिए पैसा है पर कर्मचारियों के लिए नहीं!

चरण सिंह राजपूत

सुना है कि पैरोल पर जेल से छूटे सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय ने 18 जनवरी की शाम को दिल्ली के मौर्य होटल में भव्य कार्यक्रम आयोजित कर अपनी शादी की वर्षगांठ मनाई। इस कार्यक्रम में करोड़ों का खर्च किया गया। जनता के खून-पसीने की कमाई पर मौज-मस्ती करना इस व्यक्ति के लिए कोई नयी बात नहीं है। गत दिनों लखनऊ में अपनी पुस्तक ‘थिंक विद मी’ के विमोचन पर भी करोड़ों रुपए बहा दिए। अखबारों में विज्ञापन छपवाया कि देश को आदर्श बनाओ, भारत को महान बनाओ। दुर्भाग्य देखिए, यह सुब्रत राय अपनी संस्था और अपने आप को तो आदर्श व महान बना नहीं पाए लेकिन देश को आदर्श और महान बनाने चल पड़े हैं। गरीब जनता को ठगेंगे। कर्मचारियों का शोषण और उत्पीड़न करेंगे पर देशभक्ति का ढकोसला करेंगे। यह व्यक्ति कितना बड़ा नौटंकीबाज है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि आप सहारा के कार्यालयों में जाएंगे तो आपको वहां पर भारत माता की तस्वीर दिखाई देगी।

हाड़ कंपाती ठंड में सहारा के मेन गेट पर बैठे ये बर्खास्त 25 कर्मी किसी को नहीं दिख रहे!

किसी को नहीं दिखाया दे रहा सहारा का यह अन्याय… नोएडा में बड़ी संख्या में राजनीतिक व सामाजिक संगठन हैं। ट्रेड यूनियनें भी हैं। देश व समाज की लड़ाई लड़ने का दंभ भरने वाले पत्रकार भी हैं। पर किसी को इस हाड़ कंपाती ठंड में गेट पर बैठे बर्खास्त 25 कर्मचारी नहीं दिखाई दे रहे हैं। 17 महीने का बकाया वेतन दिए बिना सहारा प्रबंधन ने इन असहाय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया पर इनकी पीड़ा समझने को कोई तैयार नहीं।

सहारा मीडिया में सेलरी संकट से त्रस्त कर्मियों ने शुरू किया मेन गेट पर धरना-प्रदर्शन (देखें वीडियोज)

सहारा मीडिया के नोएडा स्थित मुख्य आफिस के गेट पर सहारा कर्मियों ने सेलरी के लिए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कई महीने की सेलरी दबाए बैठे सहारा प्रबंधन ने अपने कर्मियों को भूखे मरने के लिए छोड़ दिया है. इससे परेशान कई कर्मचारी अब गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं. दूसरे मीडिया हाउसेज इस आंदोलन को इसलिए कवर नहीं कर रहे क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई के तहत वे एक दूसरे के घर में चलने वाले उठापटक को इग्नोर करते हैं. धरना प्रदर्शन सात जनवरी से चल रहा है. धरने में करीब 25 कर्मचारी खुल कर हिस्सा ले रहे हैं.

स्वामी अग्निवेश ने खोला सहारा के खिलाफ मोर्चा!

राष्ट्रीय सहारा में टर्मिनेट किए गए कर्मचारियों को फोन पर किया संबोधित, डीएम को लिखा पत्र

सहारा मीडिया में हो रहे शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ समाज सुधारक और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने मोर्चा खोल दिया है। जहां उन्होंने नोएडा के सेक्टर 11 स्थित राष्ट्रीय सहारा के मेन गेट पर चल रहे बर्खास्त 25 कर्मचारियों के धरने को मोबाइल फोन से संबोधित किया, वहीं इस मामले को लेकर गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा है। अपने संबोधन में उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनके हक की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी। 17 माह का बकाया वेतन रहते हुए कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उन्होंने अपराध करार दिया।

सहारा मीडिया से रणविजय सिंह को टर्मिनेट किए जाने की खबर!

सहारा मीडिया से एक बड़ी सूचना है कि दशकों से वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे रणविजय सिंह को प्रबंधन ने टर्मिनेट कर दिया है. उन्हें काफी समय से अधिकार विहीन कर साइडलाइन कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि रणविजय सिंह पर कई किस्म के आरोप थे जिसमें पद का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण करना भी शामिल है. उन पर अवैध संपत्ति बनाने और आर्थिक भ्रष्टाचार करने के भी आरोप हैं. उनको लेकर सहारा में आंतरिक जांच कराई गई जिसमें वह सहारा मीडिया के लिए अयोग्य पाये गये. उन पर स्टाफ में असंतोष को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय के खासमखास ओपी श्रीवास्तव उनसे इन दिनों सख्त नाखुश थे. चर्चा है कि तीन चार बड़े विकेट और गिरेंगे बहुत ज़ल्द. उधर, रणविजय खुद यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें टर्मिनेट नहीं किया गया, बल्कि वह खुद हटे हैं. 

सहारा मीडिया में उपेन्द्र राय द्वारा कांट्रैक्ट पर रखे गए सभी 89 लोग टर्मिनेट

सहारा मीडिया ग्रुप (राष्ट्रीय सहारा और सहारा समय न्यूज चैनल) से एक बड़ी खबर आ रही है. उपेन्द्र राय ने अपने छोटे से कार्यकाल में संपादक से लेकर यूनिट हेड, डिप्टी न्यूज एडिटर, विशेष संवाददाता, प्रमुख संवाददाता आदि पदों करीब 89 लोग भर्ती किए थे जिन्हें टर्मिनेट कर दिया गया है. इन दिनों सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय से सख्त नाराज चल रहा है क्योंकि उन्होंने जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं किए, उलटे अपनी ब्रांडिंग खूब कर ली और अपने खास लोगों को जमकर ओबलाइज कर दिया.

उपेंद्र राय और सहारा मीडिया ने खूब चूतिया बनाया इन कर्मियों को!

एक कहावत है कि मछली मर जाती है लेकिन उसकी गंध मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ती। कुछ ऐसा ही हाल उपेंद्र राय का है। उनके जाने के बाद भी उनकी दुर्गंध से सहारा मीडिया के लोग बेहाल हैं। उपेंद्र राय ने अपने समय में राष्ट्रीय सहारा से आंदोलनकारी लोगों को सेफ एग्जिट प्लान के तहत संस्थान से बाहर निकल जाने को कहा। इस प्लान के तहत संस्था को अलविदा कहने वाले कर्मचारियों को कोई न्याय नहीं मिल रहा है। इस कारण इन कर्मचारियों के अंदर भारी बेचैनी है।

सहारा प्रबंधन ने 28 तक सेलरी देने को कहा, कर्मी बोले- तब तक मास्टर एडिशन ही छपेगा

राष्ट्रीय सहारा अखबार में हड़ताल के कारण केवल मास्टर एडिशन का प्रकाशन हो रहा है. इस मास्टर एडिशन में स्थानीय खबरें नहीं होतीं. केवल सेंट्रलाइज पेज बनाकर उसे आल एडिशन छपवा दिया जा रहा है, मास्टर एडिशन के रूप में. हड़ताल के कारण लखनऊ में भी मास्टर एडिशन का प्रकाशन चल रहा है जिसमें लखनऊ की एक भी खबर नहीं है. हड़ताल को लेकर मैनेजमेंट सक्रिय हो गया है.

राष्ट्रीय सहारा में हड़ताल के कारण मास्टर एडिशन छपा

राष्ट्रीय सहारा में कल हड़ताल होने के कारण प्रबंधन किसी तरह मास्टर एडिशन छापने में कामयाब रहा. बताया जा रहा है कि नोएडा में मास्टर पेज तैयार कर उसे लखनऊ व अन्य सेंटरों को भेज दिया गया. लखनऊ से सूचना है कि वहां हड़ताल के कारण राष्ट्रीय सहारा की फाइल कापी यानि मास्टर एडिशन ही प्रकाशित करना पड़ा. इस फाइल कापी में लखनऊ की एक भी खबर नही हैं. ऐसा ही अन्य सेंटर्स पर भी हुआ.

वेतन मांगने पर बाहर कर दिए गए सहाराकर्मी का एक खुला पत्र उपेंद्र राय के नाम

प्रतिष्ठार्थ
श्री उपेंद्र राय,
एडिटर इन चीफ
सहारा मीडिया
नोएडा

विषय- आपकी कथनी और करनी में अंतर के संर्दभ में

महोदय

मैं सहारा राष्ट्रीय सहारा देहरादून से विगत आठ साल से जुड़ा एक कर्मचारी हूं। इस दौर में मैंने देखा जो मौज सहारा के अफसर और उनके चमचे लेते रहे हैं, वह किसी की नहीं है। हम कुछ लोग खच्चर की तरह सहारा के लिए काम करते रहे और बाकी मौज लेते रहे। महोदय, यह सही है कि पहले सहारा में नौकरी को सरकारी माना जाता था और एक तारीख को वेतन एकाउंट में आ जाता था। विगत डेढ़ साल से सहारा में वेतन भुगतान संबंधी समस्या है। तर्क दिया जा रहा है कि कंपनी संकट में है तो कृपया आप हमें बता दें कि जब कंपनी संकट में नहीं थी तो प्रबंधन ने कितनी बार हमारी सेलरी बढ़ाई?

अब कर्मचारियों को बेवकूफ बना रहा सहारा

निवेशकों के बाद अब कर्मचारियों / भूतपूर्व कर्मचारियों को बेवकूफ बना रहा है सहारा प्रबंधन। अपने मुखिया सुब्रतो राय के धरे जाने के बाद कथित रूप से आर्थिक तंगी झेल रहे समूह ने बचे खुचे कर्मचारियों से “पिंड” छुडाने के लिए सेल्फ या सेफ ऐक्जिट प्लान लाने की घोषणा की, और उसे दो चरणों में ले आए। हो सकता है कि उसका तीसरा चरण भी शीघ्र आये। याद रहे कि प्लान हमेशा सामान्य से बेहतर होता है।

सहारा से सेफ एग्जिट लेने वालों का पैसा फंसा, कर्मियों ने लेबर आफिस में की लिखित शिकायत (पढ़ें पत्र)

सेफ एग्जिट लेने के बाद भी सहारा मीडिया के कर्मचारियों का पूरा भुगतान नहीं किया गया है. पहली बारी में सेफ एग्जिट लेने वालों का पीएफ और ग्रेच्युटी कंपनी नहीं दे रही है, दूसरी बारी में सेफ एग्जिट लेने वालों का पूरा का पूरा वेतन भी फंसा हुआ है और कंपनी द्वारा तय की गई समय-सीमा भी खत्म हो गई है. वहीं कॉमर्शियल प्रिंटिंग के कर्मचारियों को तो एक पैसा भी नहीं दिया गया है. दफ्तर में काम कर रहे तमाम कर्मचारी हालात के आगे मजबूर हैं.

राष्ट्रीय सहारा नोएडा और लखनऊ में सेलरी के लिए कर्मियों ने कई घंटे काम ठप रखा

एक बड़ी खबर सहारा मीडिया से आ रही है. राष्ट्रीय सहारा अखबार में आज शाम से कर्मियों ने कई घंटे तक काम ठप रखा. जनवरी से सेलरी न मिलने के कारण सहाराकर्मी बेहद परेशान हैं. होली में बस कुछ दिन ही शेष हैं. छुट्टियों के कारण बैंक वगैरह कई दिन तक बंद रहने वाले हैं. ऐसे में अगर सेलरी आजकल में नहीं आई तो फिर ये मार्च महीना बिना सेलरी के बीत जाएगा और सबकी होली बेरंग हो जाएगी. इसी को देखते हुए कर्मी आज शाम कई घंटे तक कलमबंद हड़ताल पर रहे.

सहारा के कर्मचारी अपने मालिकों के सब कुछ समेटने, बांधने और भागने की योजनाओं के क़िस्से सुनते-सुनाते दिन काट रहे हैं!

(अनिल यादव, वरिष्ठ पत्रकार)

अपने चढ़ते दिनों में नई योजनाएं शुरू करते वक़्त सहारा इंडिया के संस्थापक चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा की टाइमिंग अचूक हुआ करती थी. लेकिन कामयाबी के नुस्ख़े बताने वाली अपनी ताज़ा किताब “लाइफ़ मंत्रा” के मामले में वक़्त का ख़्याल नहीं रखा गया है. हताशा में इस तथ्य की भी परवाह नहीं की गई है कि उस किताब से कौन प्रेरित होना चाहेगा, जिसका लेखक ग़रीब निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोपों में दो साल से जेल में है?. ज़मानत की बड़ी रक़म का इंतज़ाम करने में हलकान कंपनी में कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हुए हैं. हमेशा विश्वस्त समझे जाने वाले व्यापारिक साझेदार और राजनेता पल्ला झाड़ चुके हैं. ऐसे में किताब की जानकारी रखने वाले साधारण पाठकों के मुंह से “ख़ुद मियां फ़ज़ीहत, औरों को नसीहत” कहावत सुनाई दे रही है.

सहारा मीडिया में ‘सेल्फ एक्जिट’ योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू!

एक बुरी खबर सहारा मीडिया से आ रही है. यहां प्रबंधन ने ‘सेल्फ एक्जिट’ नाम से एक स्कीम लागू की है. इसके तहत खुद कंपनी छोड़ने के लिए आप्शन दिया गया है. लेकिन बताया जा रहा है कि इस स्कीम के नाम पर बड़े पैमाने पर छंटनी की शुरुआत कर दी गई है. करीब तीन सौ लोगों को स्वत: या जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है या दिखाने की तैयारी है. सूत्रों से मिली खबरों के मुताबिक 80 लोगों ने दो दिन में किया सहारा की सेफ एग्जिट पालिसी से रिजाइन.

सहारा मीडिया में साठ साल से ज्यादा उम्र वाले करीब अस्सी लोगों को हटाया गया, दो संपादक भी इसी दायरे में आकर नपे

संकट से जूझ रहे सहारा समूह के मीडिया सेक्टर की कमान संभालने के बाद उपेन्द्र राय ने एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले लेते हुए सहारा मीडिया को सुगठित करने और आत्मनिर्भर बनाने की कवायद तेज कर दी है. सहारा मीडिया को सरकारी कंपनी की बजाय युवा प्रोफेशनल्स की टीम के रूप में पुनर्गठित करने हेतु साठ साल से ज्यादा उम्र के करीब 80 लोगों को हटाने का आदेश जारी किया है.

उपेंद्र राय, विजय राय, देवकीनंदन मिश्रा, योगेश मिश्रा, रमेश अवस्थी, पीयूष बंका, मनोज तोमर, मुनीश सक्सेना के बारे में सूचनाएं

सहारा मीडिया बहुत बड़े बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रहा है. सहारा प्रबंधन ने उपेंद्र राय पर पूरी तरह भरोसा करके उनके हवाले सहारा मीडिया कर दिया है. इसके बाद उपेंद्र राय हर मोर्चे पर बदलाव की कवायद में जुटे हैं. राष्ट्रीय सहारा अखबार का समूह संपादक विजय राय को बनाया गया है. प्रिंट लाइन में इनका नाम भी जाने लगा है. पहले समूह संपादक के पद पर रणविजय सिंह हुआ करते थे. प्रिंट लाइन में उपेंद्र राय का पद ग्रुप सीईओ और एडिटर इन चीफ के बतौर जा रहा है. उपेंद्र राय ग्रुप सीईओ होने के साथ साथ टीवी और अखबार दोनों के एडिटर इन चीफ हैं. विजय राय को सिर्फ अखबार का ग्रुप एडिटर बनाया गया है.

संकट के दौर में सहारा को फिर याद आए उपेंद्र राय, सहारा मीडिया की सौंपी कमान

उपेंद्र राय को सहारा समूह ने संकट में फिर याद किया है. उन्हें अबकी पूरे पावर के साथ सहारा मीडिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उपेंद्र राय को सहारा मीडिया और सहारा नेटवर्क का एडिटर इन चीफ के साथ-साथ सीईओ भी बनाया गया है. अब तक सहारा मीडिया के हेड रहे राजेश सिंह के बारे में चर्चा है कि उन्हें बाहर निकाल दिया गया है. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि राजेश सिंह अपने पुराने काम की ओर लौट गए हैं यानि जयब्रत राय के पीए हुआ करते थे और फिर से वही पीए वाला काम करने लगे हैं.

सहारा मीडिया के कर्मचारियों ने आफिस के अंदर सामूहिक धरना दिया लेकिन प्रबंधन मस्त

सहारा मीडिया के कर्मचारियों के बुरे दिन जारी हैं. जब हड़ताल के कारण प्रबंधन इनके दबाव में था तब ये लोग प्रबंधन के लुभावने प्रस्ताव के आगे झुक गए. अब दुबारा जब धरना दिया है तो प्रबंधन इनकी तरफ कान नहीं दे रहा है. सहारा मीडिया के नोएडा आफिस से खबर है कि सैकड़ों मीडियाकर्मियों ने सेलरी के लिए सामूहिक धरना आफिस के अंदर दिया. पर इस धरने का नतीजा कुछ नहीं निकला. सेलरी संकट जारी है. प्रबंधन मस्त है. कर्मचारी बुरी तरह त्रस्त हैं.

सहारा मीडिया में सांकेतिक हड़ताल आज से, सहाराश्री ने कर्मियों को भेजी चिट्ठी

सहारा मीडिया में नई बनी यूनियन ने कई राउंड वार्ता बेनतीजा रहने और प्रबंधन के उदासीन रवैये से मजबूर होकर सेलरी व बकाया के लिए फिर से आंदोलन की राह पर चलने का फैसला किया है. इसके तहत 21 अक्टूबर यानि आज से अखबार का एक एडिशन छापने और चैनलों पर एक लाइव बुलेटिन चलाने का फैसला किया गया है. सहारा कर्मी अब सांकेतिक रूप से ही काम करेंगे. सहारा मीडिया में पिछले आठ महीनों से सेलरी संकट है.

कर्मचारियों की लिस्ट में अपना नाम न पाकर राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संवादसूत्र भड़के

इस बीच, ताजी सूचना ये है कि राष्ट्रीय सहारा देहरादून के कर्मचारियों की लिस्ट जो श्रम आयुक्त को प्रबंधन द्वारा सौंपी गई है, उस सूची में अपना नाम न पाकर संवादसूत्र भड़क उठे हैं। आठ-आठ साल से नियमित कर्मचारी की तरह काम कर रहे संवादसूत्रों का कहीं नाम ही नहीं है।

सहारा प्रबंधन से आए लोग सुनवाई से पहले ही श्रमायुक्त कार्यालय देहरादून को कागजात रिसीव कराकर रफूचक्कर हुए (देखें दस्तावेज)

देहरादून में राष्ट्रीय सहारा अखबार के कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा कर रखा है। यह मुकदमा श्रमायुक्त आफिस में किया गया है। सुनवाई के दिन सहारा प्रबंधन की तरफ से कोई नहीं आ रहा है। हां, आश्वासन के कागजात जरूर सौंप जाते हैं। सहारा प्रबंधन के लोग इस बार भी सुनवाई के दौरान सहायक श्रम आयुक्त देहरादून के कार्यालय में नहीं पहुंचे। इसके पहले भी 18 अगस्त 2015 को जब वेतन संबंधी मामले की पहली सुनवाई थी तब भी प्रबंधन पक्ष के लोग तय समय तक नहीं पहुंचे थे।

सहारा छोड़ने के बाद एलएन शीतल ने नव भारत (मध्य प्रदेश) ज्वाइन किया

LN Shital : प्रिय मित्रों, मैं अब सहारा इण्डिया परिवार में नहीं हूँ . मैंने आज 7 सितम्बर से नव भारत (मध्य प्रदेश) पत्र-समूह में सीनिअर ग्रुप एडिटर एवं इस समाचार पत्र समूह की प्रकाशक कम्पनी- ‘Engage Media Pvt. Ltd.’ के Director के रूप में ज्वाइन कर लिया है. मेरी अपने सर्वस्व तथा परम ईष्ट देव हनुमान जी से दण्डवत प्रार्थना है कि वे अपनी कृपा बनाये रखें. आप सबसे अपना स्नेह और शुभ कामनाएं बनाये रखने की गुज़ारिश है. (LN Shital के फेसबुक वॉल से.)

सेलरी संकट से परेशान सहारा मीडिया के कर्मियों ने प्रिंटिंग मशीन से लेकर न्यूज प्रिंट गोदाम तक में लगा दी आग!

पटना से एक बड़ी खबर आ रही है. कुछ रोज पहले वहां राष्ट्रीय सहारा की प्रिंटिंग मशीन से लेकर न्यूज प्रिंट गोदाम तक धू धू करके जल उठा. इस बारे में सहारा अखबार में खबर भी छपी है. लेकिन अंदर कई किस्म की कहानियां चल रही हैं. कुछ का कहना है कि सेलरी न मिलने से नाराज कुछ सहाराकर्मियों ने सहारा समूह के असंवेदनशील रवैये के प्रति विरोध प्रकट करने के लिए सहारा के न्यूज प्रिंट गोदाम में आग लगा दी और आग ने देखते ही देखते प्रिंटिंग मशीन से लेकर स्टोर, जनरेटर रूम को अपने घेरे में ले लिया.

राष्ट्रीय सहारा देहरादून के यूनिट हेड एलएन शीतल का इस्तीफा, पटना एडिशन के प्रभारी मैनेजर प्रदीप सिन्हा भी गए

राष्ट्रीय सहारा देहरादून से खबर है कि नए आए यूनिट हेड एलएन शीतल ने भी इस्तीफा दे दिया है. इस संस्थान से हर महीने कोई न कोई विकेट गिर रहा है. यूनिट हेड के पद से लगभग एक पखवाड़े में दो-दो लोग गए. हालिया यूनिट हेड एलएन शीतल दो वर्ष पहले तक इसी यूनिट में स्थानीय संपादक की जिम्मेदारी सम्भालते रहे. लोग सवाल उठा रहे हैं कि वो जिस यूनिट में संपादक रह चुके हैं, उसी यूनिट में मैनेजर बनकर क्यों गए. असल में सहारा जिस गंभीर संकट से जूझ रहा है, उससे निजात दिला पाना अब किसी के वश की बात नहीं. ऐसे में लोग टेंशन खुद लेने की जगह इस्तीफा दे देना उचित समझ रहे.

पत्रकारिता के दौरान यह दिन देखना पड़ेगा, सोचा न था

एक सहाराकर्मी ने लगातार सेलरी न मिलने के कारण पत्र लिखकर बिना वेतन अवकाश की मांग की है ताकि वह बाहर किसी दूसरी जगह कुछ कामधाम करके पैसे कमा सके और अपने परिजनों का पेट पाल सके. सहारा मीडिया में काम करने वाले रवि कुमार (इंप्लाई कोड 054004) लखनऊ में राष्ट्रीय सहारा अखबार में वरिष्ठ उप संपादक के बतौर कार्यरत हैं. पढ़िए उनकी चिट्ठी और जानिए मीडिया के भीतर का एक खौफनाक सच.