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PTI में आठ साल पूरे कर चुके प्रियभांशु रंजन बोले- योगी के बाल, गोशाला की गाय, मोदी की नींद जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया

Priyabhanshu Ranjan : 8 Years In Journalism. 8 Years With The Press Trust of India. योगी के बाल नहीं बढ़ने की वजह जानने, गोशाला की गायें गिनने या मोदी के सोने के घंटे जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया था। पूरी तरह सोच समझकर असल खबरों से जुड़ा काम करने के लिए जर्नलिज्म में आया था। ये काम आज भी कर रहा हूं। शान से कर रहा हूं। शायद इसलिए 8 साल बाद भी PTI में हूं। मीडिया में जब तक रहूंगा, PTI या इसकी तरह ही गंभीर काम में यकीन रखने वाली किसी संस्था में रहूंगा।

<p>Priyabhanshu Ranjan : 8 Years In Journalism. 8 Years With The Press Trust of India. योगी के बाल नहीं बढ़ने की वजह जानने, गोशाला की गायें गिनने या मोदी के सोने के घंटे जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया था। पूरी तरह सोच समझकर असल खबरों से जुड़ा काम करने के लिए जर्नलिज्म में आया था। ये काम आज भी कर रहा हूं। शान से कर रहा हूं। शायद इसलिए 8 साल बाद भी PTI में हूं। मीडिया में जब तक रहूंगा, PTI या इसकी तरह ही गंभीर काम में यकीन रखने वाली किसी संस्था में रहूंगा।</p>

Priyabhanshu Ranjan : 8 Years In Journalism. 8 Years With The Press Trust of India. योगी के बाल नहीं बढ़ने की वजह जानने, गोशाला की गायें गिनने या मोदी के सोने के घंटे जानने के लिए जर्नलिज्म में नहीं आया था। पूरी तरह सोच समझकर असल खबरों से जुड़ा काम करने के लिए जर्नलिज्म में आया था। ये काम आज भी कर रहा हूं। शान से कर रहा हूं। शायद इसलिए 8 साल बाद भी PTI में हूं। मीडिया में जब तक रहूंगा, PTI या इसकी तरह ही गंभीर काम में यकीन रखने वाली किसी संस्था में रहूंगा।

ऐसा नहीं है कि मैंने PTI को छोड़कर कहीं और नौकरी करने की कोशिश नहीं की। बिल्कुल की। जब जर्नलिज्म में बमुश्किल दो साल हुए थे, उस वक्त दो बड़े न्यूज़ चैनलों के एडिटर से मिला था। पर बात बनी नहीं और फिर मैंने कभी कहीं कोशिश भी नहीं की।

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कोशिश नहीं करने की एक वजह शायद ये भी रही कि PTI देश के उन चुनिंदा मीडिया हाउस में है, जहां Working Journalist Act पर बहुत हद तक अमल होता है, जिससे सैलरी, इंक्रीमेंट, प्रमोशन और छुट्टियों के लिए मगजमारी नहीं करनी पड़ती। बहरहाल, मोदी को PM कैंडिडेट घोषित करने के बाद जिस तरह न्यूज़ चैनलों में मोदी भक्ति का दौर शुरू हुआ, उससे शायद मेरा मोहभंग हो गया और मुझे गंभीर काम की जरूरत और अहमियत समझ आ गई। लिहाज़ा, अब तय किया है कि जब तक जर्नलिज्म में हूं, अपने काम के स्तर से समझौता नहीं करूंगा।

Note: ये भाषण उनके लिए लिखा जो मिलते ही सवाल दागते हैं कि अरे प्रियभांशु, अभी भी PTI में ही हो।

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पीटीआई में आठ साल पूरा कर चुके युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार प्रियभांशु रंजन की एफबी वॉल से.

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