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बादल परिवार के सामने नतमस्तक अमित शर्मा!

करीब दो महीने पहले की बात है। अमर उजाला में संपादक के तौर पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार निशीथ जोशी जी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा था कि पंजाब में दैनिक जागरण जैसे बड़े अखबार को पंजाब का तेज तर्रार पत्रकार अमित शर्मा मिल गया है। जोशी जी ने अमित शर्मा को दलाली बट्टे से दूर हर समय पत्रकारिता में जीने वाला पत्रकार बताते हुए खूब तारीफ के पुल बांधे थे। यह भी कहा था कि अब लगता है कि पंजाब में हिंदी पत्रकारिता में नई ईबारत लिखी जाएगी। अब काम करने वाली टीम के सुखद दिन और दलाली करने वालों की शामत जागरण में तो तय है। परंतु दो माह के अंदर ही श्री जोशी की भविष्यवाणी पर लगता है कि ग्रहण लग गया है। अमित शर्मा भी अब वही कर रहे हैं जैसा पहले हो रहा था। पंजाब में मजबूत बादल परिवार के सामने अमित शर्मा ने भी लगता है घुटने टेक दिये है।

करीब दो महीने पहले की बात है। अमर उजाला में संपादक के तौर पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार निशीथ जोशी जी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा था कि पंजाब में दैनिक जागरण जैसे बड़े अखबार को पंजाब का तेज तर्रार पत्रकार अमित शर्मा मिल गया है। जोशी जी ने अमित शर्मा को दलाली बट्टे से दूर हर समय पत्रकारिता में जीने वाला पत्रकार बताते हुए खूब तारीफ के पुल बांधे थे। यह भी कहा था कि अब लगता है कि पंजाब में हिंदी पत्रकारिता में नई ईबारत लिखी जाएगी। अब काम करने वाली टीम के सुखद दिन और दलाली करने वालों की शामत जागरण में तो तय है। परंतु दो माह के अंदर ही श्री जोशी की भविष्यवाणी पर लगता है कि ग्रहण लग गया है। अमित शर्मा भी अब वही कर रहे हैं जैसा पहले हो रहा था। पंजाब में मजबूत बादल परिवार के सामने अमित शर्मा ने भी लगता है घुटने टेक दिये है।

कुछ दिन पहले बादल परिवार की बसों से हुई दुर्घटनाओं की कवरेज से यही साबित हो रहा है। सभी समाचार पत्रों ने खुलकर लिखा कि लुधियाना में बादल परिवार की बसों ने बाप-बेटे को कुचल डाला। परंतु दैनिक जागरण ने बिलकुल सामन्य तरीके से छापा। हेडिंग में नाम भी नहीं दिया गया। इस घटना के दो दिन बाद जालंधर के नकोदर में भी बादल की बस ने दूसरे बस को टक्कर मार दी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना की कवरेज भी सभी अखबारों ने ठोक कर की। सभी ने साफ लिखा बादल की बस ने चार लोगों की जान ली। परंतु दैनिक जागरण ने सिर्फ निजी बस ने टक्कर मारी लिख कर खानापूर्ति कर दी।

मतलब स्पष्ट है कि जिस जोश के साथ निशीथ जोशी जी ने अमित शर्मा की निरभीक पत्रकारिता का दम भरा था, उसकी कुछ ही दिनों में हवा निकल गयी। अमित शर्मा ने भी पंजाब के शक्तिशाली बादल परिवार के सामने एक तरह से घुटने टेक दिये। अब हिमाचल दस्तक अखबार का भविष्य संवारने में जुटे जोशी जी शायद भविष्य में इस तरह की गलती नहीं दोहरायें। जोशी जी ने भले ही अमित के साथ लुधियाना में लंबे समय तक काम किया हो पर वे शायद यह भूल गए कि उनके लुधियाना से जाने के बाद अमित शर्मा भी सुखबीर बादल के करीबी बन गए थे। अमित ने बादल परिवार के हिस्सेदारी वाले समाचार पत्र डेली पोस्ट में लुधियाना से रिपोटर के तौर पर नौकरी की है। जब समाचार पत्र बंद हो गया तो अमित ने कंबल व्यापारी शीतल विज के अखबार में कुछ दिनों तक काम किया। उसके बाद अमित को दैनिक जागरण के अधिकारियों का आर्शीवाद मिल गया।

Raghvender Singh
[email protected]

भड़ास तक अपनी बात [email protected] पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.

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