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दिव्यांगों की अलग से जनगणना कराने की जरूरत, इसके लिये बने आयोग : प्रो. निशीथ राय

सभी दिव्यांगों के लिये आजीविका की टिकाऊ व्यवस्था करके ही उन्हें स्वावलंबी बनाया जा सकता है। इसके लिये दिव्यांगों के बारे में सही आंकड़ों का होना एक बुनियादी जरूरत है। अभी तक के अनुमान दिव्यांगों की सही स्थिति को प्रकट नहीं करते। अतः सरकार को चाहिए कि दिव्यांगों की जनगणना के लिये अलग से एक विशेष आयोग का गठन किया जाय जो दिव्यांगता के विभिन्न पहलुओं के बारे में व्यापक रिपोर्ट तैयार करे।

सभी दिव्यांगों के लिये आजीविका की टिकाऊ व्यवस्था करके ही उन्हें स्वावलंबी बनाया जा सकता है। इसके लिये दिव्यांगों के बारे में सही आंकड़ों का होना एक बुनियादी जरूरत है। अभी तक के अनुमान दिव्यांगों की सही स्थिति को प्रकट नहीं करते। अतः सरकार को चाहिए कि दिव्यांगों की जनगणना के लिये अलग से एक विशेष आयोग का गठन किया जाय जो दिव्यांगता के विभिन्न पहलुओं के बारे में व्यापक रिपोर्ट तैयार करे।

यह बात कुलपति प्रो. (डॉ.) निशीथ राय ने आज ने विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित रोजगार मेला के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जो दिव्यांग पढ़ाई करते हैं उन्हें यह चिन्ता सताती है कि उनकी योग्यता के मुताबिक रोजगार कैसे मिलेगा। यदि उन्हें प्रशिक्षण दिया जाय तब उनके रोजगार की सम्भावना बढ़ जाती है। दिव्यांगों के जीवन से जुड़ी सभी अड़चनों को दूर करने के लिये गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। दिव्यांगों के लिये असरदार नीतियां बने और उनका फूलप्रूफ कार्यान्वयन हो इसके लिये जरूरी है कि सरकार और समाज मिलजुल कर काम करें। प्रो. राय ने सुझाव दिया कि एक वृहद प्लेसमेन्ट डायरेक्टरी तैयार की जाय जिसमें सारी सूचनाएं संकलित हों। इससे दिव्यांगों को रोजगार देने में बड़ी मदद मिलेगी।

इस मौके पर बोलते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री लव वर्मा ने कहा कि दिव्यांगों के लिये नई उम्मीदों और विश्वास का दौर शुरू हो चुका है। दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिये चैरिटी नहीं बल्कि अधिकार के नजरिये से काम करना होगा। रोजगार के लिये दिव्यांगों को समान अवसर मिले यह उनका अधिकार है। यदि वह आत्मविश्वास के साथ काम करें तब उनके लिये कोई काम मुश्किल नहीं है। उनमें अधिक कार्यदक्षता और समर्पण का भाव पाया जाता है। जरूरत इस बात की है कि उनकी छिपी हुई प्रतिभा का विकास करने के लिये सकारात्मक माहौल तैयार किया जाय। उन्होंने दिव्यांगों के लिये डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय एवं सार्थक संस्था के साझा प्रयासों की सराहना की।

सार्थक संस्था के सीईओ डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा दिव्यांगों को प्रशिक्षित कर रोजगार मुहैया कराने के लिये पांच सौ कार्पोरेट कंपनियों से जुड़कर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय और सार्थक संस्था द्वारा संयुक्त रूप में इस प्रकार के रोजगार मेले भविष्य में भी आयोजित किये जायेंगे। संचालन डॉ. निष्ठा त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर वित्त अधिकारी श्री शिवाकान्त शुक्ल, डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी, प्रॉक्टर प्रो. पी राजीवनयन, सहायक कुलसचिव बृजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय एवं सार्थक एजूकेशनल ट्रष्ट द्वारा संयुक्त रूप में आयोजित रोजगार मेले में जिन कंपनियों ने भाग लिया वह हैंः एजिस, स्पेन्सर, विशाल मेगा मार्ट, स्काई हिल्टन, एम.आर.वी. ट्रेडिंग, बंधन ग्रुप एवं ए.के. इन्टरप्राइजे़ज। इसमें 295 दिव्यांगों ने पंजीयन कराया। कंपनियों द्वारा इन्टरव्यू के बाद 105 दिव्यांगों को प्लेसमेन्ट दिया गया।

द्वारा जारी
प्रो. ए.पी. तिवारी
मीडिया प्रवक्ता एवं
कुलपति के शैक्षणिक सलाहकार

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