यशवंत सिंह-
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी से मिलना लखनऊ के सात दिन के प्रवास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। कल सुबह अपने ग़ाज़ीपुर ज़िले वाले मनीष लालू भाई (Manish Yadav) मिलने आये और बोले- आज अखिलेश जी की प्रेस कांफ्रेंस है, चलिए घुमा लायें भइया।
मुझ घुमक्कड़ को और क्या चाहिए। मैं तैयार।
लखनऊ के समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में एक बड़ा ऑडिटोरियम अंडरग्राउंड है। वहाँ कल दोपहर बारह बजे पहुँचे। अखिलेश जी की टीम के कर्ताधर्ताओं आशीष भाई और सोनू भाई से मुलाक़ात हुई। सबने बेहद उत्साह से स्वागत किया। साढ़े बारह बजे पीसी शुरू हुई।
भेड़िया पीड़ित परिवारों को अखिलेश जी ने सपा की तरफ़ से मदद दी और सरकारी मदद की विसंगतियों को रेखांकित किया।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दर्जनों सवाल पत्रकारों ने पूछे। असहज करने वाले सवाल भी बहुत सारे थे। अखिलेश यादव सहज भाव से जवाब देते रहे, कभी व्यंग्य करते, कभी हंसते मुस्कुराते।
प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के पीछे सपा नेताओं कार्यकर्ताओं की काफ़ी भीड़ थी। मतलब ऑडिटोरियम पूरा खचाखच भरा हुआ था। एबीपी न्यूज़ के वरिष्ठ और प्रतिभाशाली पत्रकार वीरेश पांडेय मेरे बग़ल में थे। वे बताने लगे- “अखिलेश यादव बहुत अपग्रेड हुए हैं। हर वक़्त आत्मविश्वास से भरे लगते हैं। जैसे तप कर निखर गये हों। अब वो किसी बात पर भड़कते नहीं। उकसाने वाली बातों / स्थितियों को चुटीले अन्दाज़ में काउंटर कर माहौल तनावमुक्त कर देते हैं। इस कारण उनकी छवि अब सर्वप्रिय नेता की हो गई है।”

प्रेस कॉन्फ़्रेंस ख़त्म होने के बाद भेड़िया पीड़ितों के साथ अखिलेश जी की फोटो / वीडियो के लिये पत्रकारों की टीम एकदम आगे पहुँच गई। मोबाइल फ़ोन और कैमरों से घिरे अखिलेश यादव। कहीं कोई बैरिकेड नहीं। सुरक्षा कर्मी बहुत दूर दूर खड़े टुकुर टुकुर ताकते रहे।
मैंने मनीष को ध्यान दिलाया- “पेजर, मोबाइल अब सुरक्षित नहीं रह गये हैं। ये लेबनान धमाकों से सिद्ध हो गया है। ऐसे में सबसे बड़े राज्य के एक जन उम्मीदों और सरोकारों से भरे नेता को यूँ दर्जनों चाइनीज़ फोनों के बीच निर्बाध नहीं छोड़ा जाना चाहिए।”
मनीष मेरी तरफ़ टकटकी लगाये ध्यान से सुनते रहे और चिंतक-सी मुद्रा में सहमति में सिर हिलाते हुए बोले- “पॉइंट नोटेड भइया! आपकी बात को आगे बढ़ाऊँगा।“
प्रेस कांफ्रेंस के बाद मनीष भाई अखिलेश जी के निजी कक्ष में ले गये।
जारी….


