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सुख-दुख

कोविड का दूसरा टीका लगवाने के बाद मैं पहले जैसा नहीं रह गया था!

सुमंत विद्वांस-

2021 में कोविड का दूसरा टीका लगवाने के बाद मुझे भीषण स्वास्थ्य समस्याएं हुई थीं। उसके दुष्परिणाम कई महीनों तक भुगतने पड़े।

पहले तो तीन-चार दिनों तक भारी थकान, बेचैनी, साँस लेने में तकलीफ आदि समस्याएं रहीं। ऑक्सीजन का स्तर भी थोड़ा कम हो गया था। पीठ के बल आराम से लेटने पर भी ऐसा लगता था कि साँस नहीं ले पा रहा हूँ। बंद कमरे में घुटन महसूस होती थी और बार-बार घर से बाहर खुली हवा में जाना पड़ता था। दो-तीन बार चिकित्सक से सहायता लेने के बाद एकाध हफ्ते में ये समस्याएं थोड़ी कम हुईं।

लेकिन फिर भी थकान की समस्या बहुत समय तक बनी रही। अगले कई माह तक यह हाल था कि थोड़ा-बहुत भी शारीरिक श्रम या व्यायाम करते ही सीने में दर्द होने लगता था। थोड़ी-सी भागदौड़ में भी साँस फूल जाती थी और बात करना भी कठिन हो जाता था।

फिर एकाध वर्ष बाद जब लॉक डाउन धीरे धीरे खत्म हो गया और यात्राएं फिर से शुरू हुईं, तो मेरी समझ में आया कि मैं पहले जैसी सक्रियता खो चुका हूँ। छोटी-सी हवाई यात्राओं से भी मैं बहुत थक जाता था। कई बार लगता था कि मैं कुछ भूल रहा हूँ। कभी-कभी तो एकाध क्षण के लिए यही भूल जाता था कि मैं किस हवाई अड्डे पर हूँ या किस देश में हूँ। मुझे वास्तव में ऐसा लगने लगा था, जैसे कि मेरा शरीर और मन दोनों ही अचानक आठ-दस वर्ष बूढ़े हो गए हैं।

ऐसी समस्याएं अगले एकाध वर्ष तक बनी रहीं। फिर 2023 में धीरे-धीरे सीने में दर्द की समस्या खत्म हुई। बार-बार साँस फूलने और जल्दी-जल्दी थकान हो जाने की समस्या भी धीरे-धीरे कम हुई।

इस वर्ष लगा था कि अब मैं फिर से सामान्य हो गया हूँ। लेकिन एक बार हल्के-से बुखार के लिए मैंने एक सामान्य दवा खाई, जो मैं पहले भी कई बार ले चुका था। लेकिन इस बार न जाने कैसे उसका ऐसा कुछ रिएक्शन हुआ कि फिर चिकित्सक के पास भागना पड़ा और कुछ इंजेक्शन लगवाने के बाद स्थिति सामान्य हुई।

तब मुझे वास्तव में लगा कि अभी भी कोई समस्या है और मुझे अपने खान-पान, व्यायाम, नींद और स्वास्थ्य-संबंधी हर बात पर ध्यान देना पड़ेगा।

ऐसा लगता है कि इन सब बातों का पर्याप्त प्रभाव पड़ा है और शायद अब जाकर मेरा स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य हो पाया है। कई बदलाव इतनी स्पष्टता से महसूस होते हैं, जैसे मेरा शरीर अचानक दस वर्ष बूढ़ा हो गया था और अब जाकर वापस अपनी सही आयु में लौटा है। अब न कोई थकान होती है और न कोई अन्य शारीरिक कष्ट होता है।

यह सब आज इसलिए याद आया क्योंकि पिछले दो हफ्तों के दौरान सात देशों में भटक चुका हूँ और अपना कामकाज निपटाने के साथ-साथ हजारों किमी की इस यात्रा में न जाने कितने हवाई अड्डों से गुजरते हुए, कितने टाइम जोन, कितने अलग-अलग मौसम और परिवर्तन झेलने के बाद भी कोई थकान महसूस नहीं कर रहा हूँ। पहले यह बात मेरे लिए बिल्कुल सामान्य और स्वाभाविक थी, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में इसकी कल्पना भी असंभव लगने लगी थी। बहुत समय के बाद आज ऐसा महसूस हुआ है कि मैं अब जाकर पूरी तरह ठीक हुआ हूँ।

ये सब इसलिए भी लिख रहा हूँ क्योंकि यदि आपको भी किसी स्वास्थ्य समस्या की थोड़ी भी आहट महसूस होती हो, तो उसे अनदेखा न करें। यह वास्तविकता है कि स्वास्थ्य से बढ़कर जीवन में कुछ भी नहीं है क्योंकि स्वास्थ्य के बिना जीवन ही नहीं है। इसलिए अपनी जीवन शैली और अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।

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