
कैलाश सिंह-
लखनऊ/दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच अब एक नया मोड़ सामने आया है। सूत्रों की मानें तो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम इस अहम पद के लिए जोर पकड़ रहा है। पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं, और खट्टर का नाम एक ऐसे चेहरे के रूप में उभर रहा है जो दोनों संगठनों के बीच बेहतरीन तालमेल स्थापित करने में सक्षम माना जा रहा है।
एक साल का इंतजार खत्म होने को
बीजेपी के कार्यकर्ताओं को पिछले एक साल से जिस घड़ी का इंतजार था, वह अब नजदीक आती दिख रही है। मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लोकसभा चुनाव से पहले से ही एक्सटेंशन पर हैं। नए अध्यक्ष के नाम पर सहमति न बन पाने के कारण यह फैसला अधर में लटका था, लेकिन अब 18 अप्रैल से बेंगलुरु में होने वाली बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसकी औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह नाम राम नवमी तक या उसके तुरंत बाद कभी भी घोषित हो सकता है।
खट्टर क्यों हैं प्रबल दावेदार?

हालांकि खट्टर का नाम शुरूआती चर्चाओं में ज्यादा सुर्खियों में नहीं रहा, लेकिन उनके संगठन कौशल और संघ-बीजेपी के बीच तालमेल बनाने की क्षमता को लेकर कोई विवाद नहीं है। हरियाणा में मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खट्टर का नाम भले ही कम चर्चित रहा हो, लेकिन उनकी कार्यशैली और अनुभव ऐसा है कि न तो पार्टी में और न ही संघ में उनके नाम पर किसी को ऐतराज होगा।
अन्य नामों का क्या?
पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नेताओं के नाम इस पद के लिए चर्चा में रहे। संजय जोशी, जिनके संगठन संचालन के अनुभव को कोई नकार नहीं सकता, शीर्ष नेतृत्व की पसंद से बाहर रहे। इसके अलावा वसुंधरा राजे सिंधिया, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य जैसे नाम भी कयासों में शामिल रहे, लेकिन ये संघ और बीजेपी की संयुक्त पसंद नहीं बन पाए। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम भी टीआरपी का हिस्सा बना, लेकिन खट्टर की तरह वह भी बाद में चर्चाओं से बाहर हो गए थे। अब कम चर्चित नाम के तौर पर खट्टर का उभरना कईयों के लिए आश्चर्यजनक हो सकता है।
घोषणा के साथ बड़े बदलाव संभव
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी संगठन और सरकार में बदलाव तय माना जा रहा है। बीजेपी में परंपरा रही है कि बड़े फेरबदल के दौरान संगठन से कुछ लोग मंत्रिमंडल में जाते हैं और मंत्रिमंडल से कुछ लोग संगठन की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ होने के आसार हैं।
इंतजार की घड़ियां खत्म
चूंकि नाम तय हो चुका है, अब घोषणा की उलटी गिनती शुरू हो गई है। अगर मनोहर लाल खट्टर के नाम पर मुहर लगती है, तो कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक में यह चर्चा होगी कि “इन पर ध्यान कैसे नहीं गया?” खट्टर के नेतृत्व में बीजेपी संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अब सबकी नजरें बेंगलुरु बैठक और राम नवमी के आसपास होने वाली संभावित घोषणा पर टिकी हैं।


