विनीत अग्रवाल-
अमरोहा : मनरेगा फर्जीवाड़े के मामले में अमरोहा जिले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना, उनके पति गजनबी और अन्य परिजनों पर फर्जी तरीके से मनरेगा मजदूरी का पैसा हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। खास बात यह है कि इस घोटाले में शमी की बहन की सास और ग्राम पलौला की प्रधान गुले आयशा से प्रशासन ने 8.68 लाख रुपये की रिकवरी शुरू कर दी है, जबकि शमी के बहन-बहनोई और अन्य परिजनों के खिलाफ अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।
क्या मोहम्मद शमी का रसूख प्रशासन पर हावी है?
गंभीर सवाल यह उठता है कि जब फर्जीवाड़े में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर FIR दर्ज की जा चुकी है, तो फिर मोहम्मद शमी की बहन शबीना, उनके पति गजनबी और सास गुले आयशा जैसे प्रमुख नामों को क्यों अब तक बचाया जा रहा है? क्या प्रशासन पर क्रिकेटर मोहम्मद शमी के प्रभाव का असर है?
DM का सख्त रुख, आठ सरकारी कर्मचारी निलंबित
DM निधि गुप्ता वत्स को जैसे ही जांच रिपोर्ट मिली, उन्होंने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
• 8 सरकारी कर्मचारी निलंबित
• पूर्व BDO प्रतिभा अग्रवाल के खिलाफ शासन को विभागीय कार्रवाई हेतु पत्र
• एक पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि
• डिडौली कोतवाली में आठ कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज


FIR में जिन सरकारी कर्मियों के नाम शामिल हैं:
तीन पंचायत सचिव (उमा, अंजुम, पृथ्वी), एपीओ ब्रजभान सिंह समेत कुल 8 अधिकारी व कर्मचारी।
जांच में सामने आए फर्जी लाभार्थी (परिवार से जुड़े):
• शबीना (शमी की बहन) – ₹71,013
• गजनबी (शमी के जीजा) – ₹66,584

• गुले आयशा (प्रधान) – ₹8,68,344 (संपूर्ण घोटाला इसी के नाम से)
• आमिर सुहेल (प्रधान का पुत्र) – ₹63,851
• शेखू, नेहा परवीन, सारिया, सबा रानी, नसरुद्दीन, जब्बार, मोहम्मद वासिफ, आकिब जावेद, अजीम, शजर, कमरे आलम, मोहम्मद अहमद, मोहम्मद फैद, मोहम्मद अरमान, जैद — सभी पर फर्जी मजदूरी लेकर पैसे निकालने का आरोप है।
प्रशासन की ‘चुप्पी’ पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में अब तक सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर FIR हुई है, जबकि जांच में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि मोहम्मद शमी की बहन, बहनोई और सास ने भी फर्जीवाड़े में हिस्सा लिया।
CO अरुण कुमार की पुष्टि
CO अरुण कुमार ने बताया कि फर्जीवाड़े में सम्मिलित सरकारी कर्मचारियों पर डिडौली कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं, जोया ब्लॉक के BDO की तहरीर पर कार्रवाई की जा रही है। परिजनों के खिलाफ कार्रवाई पर उन्होंने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं दी।
अब सवाल यह है:
• क्या अमरोहा प्रशासन मोहम्मद शमी के प्रभाव के चलते इस मामले को दबाना चाहता है?
• जिनके नाम स्पष्ट रूप से जांच रिपोर्ट में हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों?
• क्या इस मामले में पक्षपात नहीं हो रहा?
जनता और मीडिया की मांग:
अभियुक्त कोई भी हो – चाहे वह रसूखदार परिवार से हो या आम नागरिक – कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए। जनता और मीडिया अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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रिपोर्ट: विनीत अग्रवाल, अमरोहा


