अभिषेक उपाध्याय-
पानी न पहुंचने, ज़मीनों पर क़ब्ज़ा आदि को लेकर योगी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह बुरी तरह घिर गए हैं। समाचारों में चल रहा है कि उन्हें बंधक तक बना लिया गया है।

बीजेपी के अपने विधायक गुड्डू राजपूत ने खुलेआम मंत्री जी की पगड़ी उछाल दी। उन्हें सार्वजनिक तौर पर घेर लिया है। चारों तरफ जमा लोगों में पानी न मिलने, अवैध क़ब्ज़े की चीख पुकार है।
सीएम की परछाई कहे जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह पर आरोप है कि ये अपने मंत्रालय के कामकाज से उसी तरह दूर रहते हैं, जैसे जल जीवन मिशन के नलों में पानी। नतीजा देख लीजिए।
मंत्रीजी की भयावह कुव्यवस्था के बीच उनके अपने ही लोगों का धैर्य जवाब दे गया है। स्थिति विस्फोटक है!!
तस्वीरें महोबा की हैं। उसी बुंदेलखंड का महोबा जिसके नाम पर स्वतंत्र देव सिंह मंत्री बने हुए हैं!!
वीडियो में बंधक बनाए गए स्वतंत्र देव सिंह की हालत देखिए। जैसे दाना चुगने में मशगूल चिड़िया अचानक ही शिकारी के जाल में आ गई हो!! वजह ज़बरदस्त भ्रष्टाचार, जल जीवन मिशन के तहत खोदी अधूरी सड़कें, नलों से पानी गायब…!
एक से बढ़कर एक गंभीर आरोप!! और उधर मंत्री जी धूप-दीप और अगरबत्ती जलाकर सुबह-शाम सत्ता की गणेश परिक्रमा में व्यस्त हैं!! उस पर राजा बेटे का सरकारी प्रोटोकॉल में घूमना अलग!!
हालात ये है कि इन्हें खुद अपने बीजेपी विधायक गुड्डू राजपूत ने घेर लिया है!! आक्रोश का फोड़ा फूट चुका है!! मवाद सरेआम छलछला कर बह रहा है!!
ये है वीडियो-
https://x.com/bhadasmedia/status/2017220027746017618?s=46
यूपी के महोबा जिले में बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत और मंत्री स्वतंत्र देव में सड़क पर ही भिड़ंत हो गई।
मंत्री जी युवा उद्घोष कार्यक्रम से लौट रहे थे। रास्ते में विधायक ने 100 ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर बीच सड़क पर गाड़ियां लगाकर मंत्री के काफिले को रोक लिया। कहने लगे कि यहाँ सड़कें टूटी हैं।
बस, फिर क्या था? संतकबीर नगर वाली घटना दोहराए जाने से रह गई, बाक़ी तो बहुत कुछ हुआ।
संतकबीर नगर वाली घटना इनडोर थी, महोबा में कुछ हुआ होता तो आउटडोर होता। और शायद जमकर होता! वीरों की धरती जो है!
-समीरात्मज मिश्रा
ताजा अपडेट ये है-
https://x.com/upadhyayabhii/status/2017222093268762726?s=46
महोबा में जलशक्ति मंत्री के कार्यक्रम में बवाल, BJP विधायक ने 100 प्रधानों संग रोका काफिला
महोबा में उस वक्त सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई जब स्वतंत्र देव सिंह के कार्यक्रम के दौरान भारी बवाल खड़ा हो गया। ब्रजभूषण राजपूत ने अपने समर्थकों और करीब 100 ग्राम प्रधानों के साथ मंत्री का काफिला रोक दिया। मामला गांवों में पानी न पहुंचने और सड़कों की अंधाधुंध खुदाई से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से नाराजगी बताई जा रही थी।
विधायक ब्रजभूषण राजपूत सीधे तौर पर अधिकारियों पर भयानक भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सामने आए। उनका कहना था कि जिले में अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, जबकि हर घर नल से जल योजना के नाम पर लगभग सभी सड़कों को खोद दिया गया है और महीनों बीतने के बाद भी सड़कें जस की तस पड़ी हैं। विधायक ने कहा कि गांवों के लोग उनसे सवाल कर रहे हैं, लेकिन वे जनता को क्या जवाब दें।
हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच मंत्री और विधायक के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालात इतने गर्म हो गए कि जलशक्ति मंत्री विधायक को लेकर सीधे डीएम कार्यालय पहुंच गए। इसके बाद सभी ग्राम प्रधानों को भी डीएम कार्यालय बुलाया गया, जहां देर शाम तक बैठक चलती रही।
बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम जल जीवन मिशन के तहत कराए जा रहे कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर फूटा जनाक्रोश है। सड़कों की खुदाई, पानी की आपूर्ति में विफलता और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विधायक ने साफ कर दिया कि जब तक हालात नहीं सुधरेंगे, वे चुप नहीं बैठेंगे।
महोबा की सियासत में यह घटनाक्रम बड़ा संदेश दे गया है। सत्ता पक्ष के भीतर ही सरकार और प्रशासन पर लगे आरोपों ने न सिर्फ जल जीवन मिशन के कामकाज को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि आने वाले दिनों में जिले की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी असर डालने के संकेत दिए हैं।
इन दागी मंत्री जी की आजतक ने की थी पड़ताल : जल जीवन मिशन का सच… कागज़ों में हर घर नल, जमीन पर पानी का सूना वादा
आजतक की विशेष जांच “ऑपरेशन जिंदगी” ने देश के सबसे बड़े ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम जल जीवन मिशन के दावों की पोल खोल दी है। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारें बार-बार घोषणा करती रही हैं कि ‘हर घर नल से जल’ का लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन वास्तविकता इससे एकदम अलग है। राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में जांच में सामने आया है कि घरों के बाहर नल और पाइप लाइनें तो बिछा दी गई हैं, पर पानी का एक बूंद भी नहीं आ रहा है और लाखों ग्रामीण प्यासे हैं।
राजस्थान के जयपुर जिले के गणेशपुरा गांव में आधे दशक पहले पाइपलाइन बिछी, कागज़ों पर काम पूरा दिखाया गया, लेकिन अब तक पानी नहीं पहुंचा। स्थानीय महिलाएं बताती हैं कि हर रोज पानी के लिए दूर-दराज से टैंकर खरीदना पड़ता है। सरकार के बड़े दावों और तस्वीरों के बीच यह सच सामने आया कि योजनाओं की जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है।
गुजरात के महिसागर जिले में “हर घर नल से जल” योजना में 123 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला उजागर हुआ है। यहां 600 से अधिक गांवों में पाइप-लाइनें बिछाई गईं, भुगतान हो गया, लेकिन नलों से पानी अभी तक नहीं आया। कई गांवों में लाखों के वर्क ऑर्डर के बावजूद भी पानी का सप्लाई शुरू नहीं हो सका। जांच में कई ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन ग्रामीण जनता के प्यासे रहने के सवाल का कोई जवाब नहीं मिला है।
उत्तर प्रदेश में भी हालत निराशाजनक है। कानपुर जिले के पचौर और शादीपुर गांवों में घर-घर नलों के नाम पर टंकी और पाइपलाइन बिछा दी गई, जबकि लाखों रूपए खर्च होने के बावजूद पानी की एक बूंद तक नहीं आई। ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहां बड़े दावों के बीच काम सिर्फ कागज़ों और बोर्डों तक सीमित रह गया। योजना के जिम्मेदार मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित अन्य अधिकारियों से जब जवाब मांगा गया, तो केवल यह कहा गया कि बजट की कमी है और 2028 तक काम पूरा होगा — एक ऐसा जवाब जो लाखों लोगों की प्यास को रोक नहीं पा रहा है।
अब सवाल यह है कि जब टंकी, पाइप और नल तो सांचे में फिट हैं, लेकिन ज़मीन पर पानी नहीं आ रहा, तो ऐसे में योजनाओं के बड़े-बड़े दावों की क्या औक़ात है? उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में यह स्थिति दर्शाती है कि “हर घर नल से जल” का सपना गरीबों के लिए एक सूखा वादा बनकर रह गया है।


