शीतल पी सिंह-
गौतम अडानी ने अमेरिका में उनके रिश्वतकांड मामले में बचाव के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वकील रॉबर्ट गिउफ्रा जूनियर को नियुक्त किया है।
राबर्ट गिउफ्रा जूनियर वॉल स्ट्रीट की मशहूर लॉ फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल (Sullivan & Cromwell) के सह-अध्यक्ष (को-चेयर) और सीनियर पार्टनर हैं। वे बड़े-बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और सिक्योरिटीज के मामलों में विशेषज्ञ हैं और हाईप्रोफाइल क्लाइंट्स ही सँभालते हैं।
गिउफ्रा वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कानूनी टीम का हिस्सा हैं। वे ट्रंप की 2024 की आपराधिक सजा (बिजनेस रिकॉर्ड्स में फर्जीवाड़ा) को चुनौती देने / अपील करने में मदद कर रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में इन्हें “ट्रंप के वकील” के रूप में ही उल्लेख किया गया है।
गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने उन्हें अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा नवंबर 2024 में दायर सिविल फ्रॉड मुकदमे में अपना बचाव करने के लिए रखा है।SEC का आरोप है कि अडानी ग्रुप ने निवेशकों को गुमराह किया और भारत में सोलर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2,200 करोड़ रुपये) की कथित रिश्वतखोरी की साजिश छिपाई। यह आरोप अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़ा है। (इसके अलावा ब्रुकलिन में अमेरिकी अभियोजकों द्वारा अलग आपराधिक आरोप भी हैं, लेकिन यह खबर मुख्य रूप से SEC के सिविल केस पर है।)
कई महीनों से केस रुका हुआ था क्योंकि भारत में अडानी को कानूनी नोटिस (सम्मन) पहुंचाने में भारत सरकार सहयोग नहीं कर रही थी।
30 जनवरी 2026 को गिउफ्रा ने अदालत को सूचित किया कि वे गौतम और सागर अडानी की ओर से मुकदमे की सेवा (नोटिस स्वीकार) करने को तैयार हैं। इससे केस आगे बढ़ सकेगा। अडानी को अब औपचारिक जवाब देने के लिए समय (कुछ रिपोर्ट्स में 90 दिन) मिलेगा, और वे ज्यूरिस्डिक्शन जैसी चुनौतियां भी दे सकते हैं।
यह कदम दिखाता है कि अडानी ग्रुप अमेरिकी अदालतों में मजबूत और हाई-प्रोफाइल बचाव की तैयारी कर रहा है। यह मामला अभी चल रहा है और कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
यह जानकारी ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स, द हिंदू, ट्रिब्यून इंडिया और अन्य विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है।


