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आज के अखबार : एआई सम्मेलन में प्रदर्शन की खबर छोटी सी और अमेरिकी टैरिफ रद्द होने की खबर लीड

संजय कुमार सिंह

आज एआई सम्मेलन के घोषणा पत्र की खबर, उसका फॉलोअप पहले पन्ने पर है लेकिन सम्मेलन में युवक कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की खबर नहीं के बराबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर विरोध प्रदर्शन की खबर नहीं है, इससे ‘सरकार’ के नाराज हो जाने की खबर है। हालांकि, बंगाल में एसआईआर के लिए न्यायिक सेवा के अधिकारियों को तैनात करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश आज की बड़ी खबर है लेकिन ज्यादातर अखबारों की लीड अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रम्प टैरिफ को खारिज कर दिए दाने की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर यह लीड है। मेरे 10 अखबारों में कुछेक को छोड़कर ज्यादातर में अमेरिकी अदालत द्वारा ट्रम्प टैरिफ को खारिज कर दिए जाने की खबर लीड है। देशबन्धु की आज की लीड का शीर्षक है, बंगाल में एसआईआर के लिए तैनात करें न्यायिक अधिकारी। खबर है कि पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच गतिरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। आज यह खबर देशबन्धु की लीड है और वैसे ही है जैसे कल द हिन्दू की अकेली लीड थी, देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से एसआईआर की उम्मीद। आप जानते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण देश में पहली बार हो रहा है और बिहार से शुरुआत के बाद इसका लाभ जाने (या बताए) बगैर देश भर में इसका विस्तार किया जा रहा है। वह भी तब जब बंगाल जैसे राज्य में एसआईआर करवा पाने वाले अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की मनमानी नहीं चलने दी और अब न्यायिक अधिकारी तैनात करने के आदेश हुए हैं। मेरा मानना है कि एआई के जमाने में आधार कार्ड के डाटा से यह काम अपेक्षाकृत आसानी से किया जा सकता है। खर्च तो कम होगा ही काम भी बढ़िया होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग भी (कम से कम बिहार में) पहले की मतदाता सूची का उपयोग नहीं कर रहा था।

चुनाव लड़ने वाले दलों को डिजिटल मतदाता सूची नहीं देने का नियम है ही और बंगाल में ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है जो गलतियां कर रहा है। लॉजिकल डेसक्रिपेंसी के मामले बढ़ा दे रहा है। इस कारण चुनाव आयोग और मतदाताओं के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा हुई, लाखों लोगों को परेशान होना पड़ा और अब न्यायिक सेवा के अधिकारियों को चुनाव के काम में लगाने के आदेश की खबर है। दूसरी ओर, आज द हिन्दू में छपी खबर के अनुसार, एक साथ चुनाव आवश्यक हैं। भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा है कि आर्थिक नजरिए से और मानव शक्ति की बर्बादी रोकने के लिए एक साथ चुनाव जरूरी है। एक देश, एक चुनाव से संबंधित विधेयक के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति के प्रमुख पीपी चौधरी ने द हिन्दू माइंड से बात करते हुए कहा कि एक साथ चुनाव कराना राष्ट्रीय हित का मुद्दा है और यह ऐसा सुधार नहीं है जिसके लिए केवल भाजपा जोर दे रही है। “इसके लिए राजनीतिक विचारधाराओं को अलग रखना होगा। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों में मेरे कई मित्र हैं जो मानते हैं कि इस विधेयक को जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024, अपने वर्तमान स्वरूप में कई कमियों से ग्रस्त है।

मीडिया के पक्षपाती रुख के कारण आज अखबारों में एआई सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन की खबर को कम महत्व मिला है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को लीड बनाया गया है जिसका भारत पर असर बताया ही नहीं गया है। अकेले इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है – (अमेरिकी) सुप्रीम टम्प ने टैरिफ खारिज किए उसके बाद ट्रम्प ने कहा, भारत के साथ करार जारी है। इसके साथ एक और खबर का शीर्षक है, व्यापार करार कुछ हफ्ते दूर, भारत इंतजार करेगा और ट्रम्प के अगले कदम पर नजर रखेगा। अमर उजाला में शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ किया निरस्त ट्रम्प ने थोपा 10 प्रतिशत अस्थायी शुल्क। खबर के अनुसार, अमेरिकी कोर्ट ने फैसला दिया है कि आपात शक्तियों में राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है और यह अवैध है। जाहिर है, भारत में इस खबर को इतना महत्व देने का कोई मतलब नहीं है और एसआईआर वाली खबर निश्चित रूप से लीड हो सकती थी। देशबन्धु में है ही। यहां नहीं है तो कारण समझना मुश्किल नहीं है। अमर उजाला ने यह भी बताया है कि फैसले में भारत पर कम किए गए शुल्क का भी जिक्र है। दैनिक भास्कर में यह खबर ज्यादा व्यवस्थित ढंग से है। यह सूचना भी है कि, भारत के 55 प्रतिशत निर्यात पर 18 फीसदी टैरिफ खत्म, रिफंड का रास्ता भी खुला। खबर के साथ यह भी बताया गया है कि ट्रम्प के पास दो विकल्प है। नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है, टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट से भड़के ट्रम्प सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क। इसमें यह भी बताया गया है कि फैसले के बाद ट्रम्प ने क्या-क्या कहा। एक बिन्दु है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। एकआई सम्मलेन में युवक कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की खबर यहां फोटो के साथ तीन कॉलम के शीर्षक से है।   

दि एशियन एज ने ट्रम्प टैरिफ की खबर को सेकेंड लीड बनाया है जबकि लीड का शीर्षक है, मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख, श्रीलंका के राष्ट्रपति और अन्य नेताओं से वार्ता की। दि एशियन एज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ पीयूष गोयल के हवाले से छापा है, अमेरिकी व्यापार करार अप्रैल से लागू होगा। द टेलीग्राफ का मुख्य शीर्षक है, सर्वोच्च अदालत ने ट्रम्प टैरिफ को रोका। राष्ट्रपति ने 10 प्रतिशत लेवी से जवाब दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की खबर लीड है। अखबार ने लाल स्याही से ट्रम्प का कहा भी छपा है, भारत के साथ करार लागू है। द हिन्दू की लीड का शीर्षक भी ऐसा ही है, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को रोका। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे बैनर बनाया है और शीर्षक है – टैरिफ रद्द, ट्रम्प ने नया रास्ता पकड़ा। एआई सम्मेलन में युवक कांग्रेस के प्रदर्शन की खबर नवोदय टाइम्स में फोटो के साथ तीन कॉलम के शीर्षक के साथ है। द टेलीग्राफ और इंडियन एक्सप्रेस में खबर अंदर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी ऐसी सूचना पहले पेज से पहले के अधपन्ने पर है।   

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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