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युद्ध का असर: भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर नया नियम लागू किया

प्राथमिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए जारी हुआ आदेश, उद्योगों की गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है

वरुण उपाध्याय-

नई दिल्ली, 9 मार्च 2026 : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने के लिए नया आदेश जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 9 मार्च 2026 को “प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026” लागू किया है, जिसका उद्देश्य देश में गैस की उपलब्धता को प्राथमिक क्षेत्रों तक सुनिश्चित करना है। 

सरकार द्वारा जारी राजपत्र के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के रास्ते आने वाली एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति को देखते हुए आपूर्तिकर्ताओं ने “फोर्स मेज्योर” लागू कर दिया है, जिससे भारत में गैस की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे हालात में सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत गैस आपूर्ति को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। 

नए आदेश के तहत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में बांटा जाएगा। सबसे पहले घरेलू पीएनजी आपूर्ति, परिवहन क्षेत्र के लिए सीएनजी, उर्वरक उत्पादन और पाइपलाइन संचालन से जुड़े आवश्यक कार्यों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद गैस आधारित बिजली संयंत्रों, उद्योगों और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति की जाएगी। 

सरकार ने यह भी तय किया है कि गैस आधारित बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों को गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों के औसत उपयोग के आधार पर सीमित की जा सकती है, ताकि प्राथमिक क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित न हो। इसी तरह शहर गैस वितरण कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्धता के अनुसार ही आपूर्ति करें। 

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैस उत्पादक कंपनियां, आयातक, विपणन कंपनियां और पाइपलाइन ऑपरेटर सभी इस नियमन के दायरे में आएंगे। उन्हें उत्पादन, आयात, आपूर्ति और उपभोग से जुड़ी पूरी जानकारी केंद्र सरकार या अधिकृत एजेंसियों को उपलब्ध करानी होगी। 

सरकार के इस कदम को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो उद्योगों और वाणिज्यिक क्षेत्रों को गैस आपूर्ति में कटौती का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर उत्पादन लागत और बाजार पर भी पड़ सकता है।

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