वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बनने का स्थान हासिल कर लिया है। अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान पांचवें नंबर पर पहुंच गया है, जबकि भारत एक पायदान नीचे खिसककर छठे स्थान पर आ गया है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, ताइवान के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत का बाजार मूल्य लगभग 4.92 ट्रिलियन डॉलर रह गया।
AI और चिप सेक्टर ने बदल दिया खेल
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई तेज़ी है। दुनिया भर में AI टेक्नोलॉजी और चिप कंपनियों में निवेश बढ़ा है, जिसका सबसे बड़ा फायदा ताइवान को मिला।
ताइवान की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) ने इस उछाल में निर्णायक भूमिका निभाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स में अकेले TSMC की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। कंपनी के शेयरों में 2026 के दौरान 40 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है।
TSMC दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियों में गिनी जाती है और AI से जुड़ी कई बड़ी वैश्विक कंपनियां इसके सेमीकंडक्टर पर निर्भर हैं। AI बूम का सीधा असर ताइवान के बाजार पर पड़ा और वहां विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ा।
भारत को क्यों हुआ नुकसान?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय बाजार में फिलहाल ऐसी बड़ी AI या चिप आधारित कंपनियां नहीं हैं, जो वैश्विक टेक रैली का बड़ा फायदा उठा सकें। इसी वजह से तकनीकी सेक्टर से आने वाली तेज़ी भारतीय बाजार को उतना लाभ नहीं दे पा रही।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कमजोर कॉरपोरेट आय और वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया। 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से अरबों डॉलर की निकासी की है।
एक कंपनी पर ज्यादा निर्भरता को लेकर भी बहस
हालांकि ताइवान की इस उपलब्धि के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि वहां का बाजार काफी हद तक सिर्फ एक कंपनी TSMC पर निर्भर हो गया है। सोशल मीडिया और निवेशक मंचों पर कई लोगों ने इसे “TSMC इफेक्ट” बताया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में चिप सेक्टर में गिरावट आती है तो इसका बड़ा असर ताइवान के बाजार पर पड़ सकता है।
फिलहाल AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैश्विक मांग ने ताइवान को दुनिया के शीर्ष शेयर बाजारों की सूची में नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जबकि भारत के लिए यह संकेत माना जा रहा है कि टेक और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत उपस्थिति अब वैश्विक बाजारों में बेहद अहम हो चुकी है।
ताइवान स्टॉक मार्केट पहली बार दुनिया के पाँच सबसे बड़े बाज़ारों की सूची में शामिल हुआ है. भारत एक पायदान नीचे आकर छठे स्थान पर पहुँच गया है. अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग शीर्ष के चार मार्केट हैं.
एआई और चिप्स को लेकर तमाम बाज़ारों में भारी हलचल है. भारतीय इंडेक्स में ऐसी बड़ी कंपनियाँ नहीं हैं. इस वजह से तकनीक के आधार पर होने वाली बढ़त भारतीय स्टॉक मार्केट के हिस्से नहीं आ पा रही है. ताइवानी स्टॉक मार्केट में ताइवान सेमीकंडक्टकर मैनुफ़ैक्चरिंग कंपनी की अकेले की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत है. -प्रकाश के रे, वरिष्ठ पत्रकार
Taiwan जो भारत के केरल राज्य से भी छोटा है आज विश्वगुरु बनने की दिशा में India से आगे निकल चुका है।
इंडिया की आबादी 1.5B
Taiwan की आबादी सिर्फ 2.3 करोड़
सिर्फ 2.3 करोड़ आबादी वाला एक देश ताइवान भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का पाँचवां सबसे बड़ा शेयर बाज़ार बन गया है।
India — 4.92 trillion USD
Taiwan — 4.95 trillion USD
आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनने की सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होता है उसके लिए एक विजन और मिशन होना चाहिए
मगर सब को चुनाव जीतना है बाकी मुद्दे जाए ठंडे बस्ते में। -मो. जियाउल्लाह



