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उत्तर प्रदेश

श्रीराम की चार किलो चांदी चंपत राय का चेला टिन्नू खड़े-खड़े पी गया, मंदिर निर्माण के वक्त 200 बोरी सीमेंट बिल 300 बोरी का बनता था!

Close-up of silver bullion bars inscribed 'India Bullion and Jewellery Association Ltd.' with flower petals laid on them, next to a decorated statue image.

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा गबन प्रकरण की जांच के बीच अब मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े एक इंजीनियर के गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मंदिर निर्माण से जुड़े रहे प्रयागराज निवासी इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं और कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं।

दीनानाथ वर्मा का दावा है कि मंदिर निर्माण के दौरान सामग्री की वास्तविक खपत और उसके बिलों में बड़ा अंतर रखा जाता था। उनके अनुसार कई मामलों में जितनी सामग्री साइट पर पहुंचती थी, उससे कहीं अधिक का बिल तैयार किया जाता था।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “यदि निर्माण स्थल पर 200 बोरी सीमेंट पहुंचती थी, तो उसका बिल 300 बोरी का बनाया जाता था।” वर्मा का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में संबंधित ठेकेदारों से सवाल किया तो जवाब मिला कि ट्रस्ट के प्रभावशाली पदाधिकारियों को कमीशन देना पड़ता है।

वर्मा ने दावा किया कि निर्माण सामग्री की खरीद और भुगतान प्रक्रिया में लंबे समय तक ऐसी व्यवस्था चलती रही। उनका आरोप है कि कम सामग्री मंगाकर अधिक मात्रा का बिल पास कराया जाता था, जिससे निर्माण लागत कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती थी।

इंजीनियर का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार इन कथित अनियमितताओं का विरोध किया, लेकिन इसके बाद उन्हें प्रताड़ना और दबाव का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार जब उन्होंने कथित कमीशनखोरी और फर्जी बिलिंग पर सवाल उठाए तो उन्हें कामकाज से अलग-थलग कर दिया गया।

दीनानाथ वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में कुछ ठेके और सप्लाई का काम परिचित लोगों को दिलवाया गया। जब संबंधित लोगों ने भी कथित रूप से बढ़े हुए बिलों पर आपत्ति जताई तो उन्हें बताया गया कि व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।

ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब राम मंदिर में चढ़ावे और दानराशि के प्रबंधन को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। एसआईटी द्वारा चढ़ावा गबन मामले की जांच जारी है और इसी बीच निर्माण कार्य से जुड़े व्यक्ति के इन आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

हालांकि, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। लेकिन यदि जांच एजेंसियां इन दावों की पड़ताल करती हैं और आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल चढ़ावे के प्रबंधन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि मंदिर निर्माण की वित्तीय पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।


Hindi newspaper article about engineer Dr. Anil Mishra accused of taking 40% commission; includes a portrait of him.

अयोध्या जी में रामलाल के मंदिर निर्माण में 40 प्रतिशत कमीशन ट्रस्टी माँगता था। 200 बोरी सीमेंट आती थी और बिल 300 बोरी का होता था। मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों कि आर्थिक स्थिति की जांच भी होन चाहिए, ताकि हकीकत सामने आए। आज “दैनिक जागरण” में सनसनीखेज खुलासा।
-आशुतोष चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार


राजेश साहू-

अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया, ‘जौनपुर (मुंगराबादशाहपुर) के रहने वाले अनिल विश्वकर्मा मुंबई के बड़े कारोबारी और हमारे शिष्य हैं। उन्होंने रामलला को चांदी का हार और चरण पादुका चढ़ाने का संकल्प लिया था। महीन कारीगरी से बना चांदी का हार करीब 3 किलो का और 64 दिव्य चिह्नों वाली चरण पादुका लगभग 1 किलो वजन की थी।’

Two large silver bars with the India Bullion and Jewellers Association Ltd. logo, decorated with flower petals and a red thread; Hindi caption about donation visible.

‘परिवार सबसे पहले मेरे आश्रम आया, जहां दोनों वस्तुओं का पूजन हुआ। फिर परिवार इन्हें थाल में सजाकर, सिर पर रखकर रामलला के दरबार पहुंचा था। मैं भी उनके साथ गया था। गेट पर हमें रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव मिला, जो VVIP रास्ते से हमें सीधे गर्भगृह ले गया। वहां पुजारियों ने कुछ देर के लिए उन वस्तुओं को प्रभु के चरणों में रखा और फिर टिन्नू ने उन्हें अपने पास रख लिया।’

जब पीड़ित परिवार ने हार पहनाए जाने की तस्वीर और चढ़ावे की रसीद मांगी, तो टिन्नू ने बहाना बनाया। उसने कहा, ‘पहले बैंक के अधिकारी हार की शुद्धता जांचेंगे, फिर इसे प्रभु को पहनाया जाएगा। तब आपको सूचना देकर फोटो-वीडियो उपलब्ध करा देंगे।’ रसीद के सवाल पर उसने कहा कि एक बार ‘भाई साहब’ (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय) देख लें, फिर रसीद मिल जाएगी।

महंत विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया, ‘ट्रस्ट ने न तो कभी हार पहनाया और न ही परिवार को कोई सूचना दी। जब भी मैं टिन्नू से रसीद मांगता, वह टालमटोल करता। बाद में उसने दावा किया कि दोनों आभूषणों को बंगाल भेजकर गलवा दिया गया है और उनकी ईंटें बनवा दी गई हैं। ताकि जरूरत के अनुसार भगवान के बर्तन बनाए जा सकें। इस धांधली की खबर सुनकर श्रद्धालु परिवार बेहद आहत है।’

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