नीरेंद्र नागर-
कर्नाटक के नए गृह मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे Priyank Kharge का नाम इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखा है और इस संस्था को पंजीकृत करने का आग्रह किया है।
इस ख़बर को प्रकाशित करते हुए हिंदी मीडिया में उनका नाम और सरनेम अलग-अलग तरह से लिखा गया। किसी ने प्रियंक लिखा, किसी ने प्रियांक। सरनेम भी दो तरह से लिखा जा रहा है – खड़गे और खरगे।
आइए, आगे बढ़ने से पहले देखें, कौन क्या लिख रहा है।
- प्रियंक खड़गे – जनसत्ता।
- प्रियांक खड़गे – आजतक, भास्कर, जनसत्ता।
- प्रियंक खरगे – हिंदुस्तान, वायर, प्रिंट।
- प्रियांक खरगे – जागरण, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स।
सही नाम क्या है, इसके बारे में ख़ुद मंत्री महोदय या उनके पिता ही बता सकते हैं लेकिन उन तक मेरी पहुँच नहीं है। इसलिए कन्नड़ वेबसाइटों के ज़रिए उनके नाम का पता लगाने की कोशिश की। वहाँ मुझे हर साइट पर ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ (प्रियांक) ही मिला। इस लिहाज़ से प्रियांक ही सही है।
हिंदी में कई साइटें उनका नाम प्रियंक लिख रही हैं। कारण शायद यह कि प्रियंका गाँधी और प्रियंका चोपड़ा जैसे नाम मीडिया में सालों से चल रहे हैं और प्रियंक प्रियंका का ही पुंल्लिंग रूप है। इसलिए प्रियंक।
परंतु यह कन्फ़्यूश्ज़न केवल नाम तक सीमित नहीं है। उनके सरनेम में भी घपला है। प्रियांक के पिता और कांग्रेस के बड़े नेता मल्लिकार्जुन के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले अधिकतर मीडिया संस्थान उनका सरनेम खड़गे ही लिख रहे थे। लेकिन पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उनकी उम्मीदवारी और चयन के बाद कई संस्थान खड़गे की जगह खरगे लिखने लगे क्योंकि कांग्रेस की विज्ञप्तियों में उनका सरनेम खरगे ही लिखा जा रहा था। परंतु कुछ हिंदी संस्थान आज भी खड़गे ही लिख रहे हैं चाहे ज़िक्र पिता का हो या बेटे का।
वैसे कन्नड़ वेबसाइटों में मुझे खरगे नहीं, खर्गे (ಖರ್ಗೆ) मिला – ख (ಖ) के बाद र् और ग संयुक्त हैं, उसके बाद ए की मात्रा है (ರ್ಗೆ)। इस हिसाब से खर्गे लिखना ही सही है। पूरा नाम लिखा जाएगा प्रियांक खर्गे।
इस नाम पर खोजबीन करते समय मैंने संस्कृत और हिंदी के कोश भी देखे कि वहाँ से मुझे सही शब्द का कोई सुराग़ मिल जाए। परंतु कोशों में मुझे न तो प्रियंक मिला, न ही प्रियांक।
मेरे मन में एक सवाल यह भी था कि अगर मल्लिकार्जुन जी के बेटे का नाम प्रियांक है तो उसका अर्थ क्या है। कारण, संधि विच्छेद करने पर प्रियांक का बहुत ही अटपटा अर्थ निकलता है प्रिय/प्रिया+अंक यानी प्रिय/प्रिया की गोद।
इसके मुक़ाबले प्रियंक मुझे अधिक सार्थक लगता है क्योंकि अगर प्रियंकर के अर्थ से जोड़कर देखा जाए तो उसका मतलब होगा दया दिखानेवाला या स्नेह करनेवाला।
अब कन्नड़ में प्रियांक का कोई और अर्थ हो या हिंदी का प्रियंक वहाँ प्रियांक बोला और लिखा जाता हो तो मुझे मालूम नहीं। इसके बारे में कोई कन्नड़भाषी ही बता सकता है।
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