दैनिक भास्कर की खबर , सब कुछ सहज तो नहीं था जैसा ज्यादातर ने बताया है
संजय कुमार सिंह
आज ज्यादातर अखबारों की लीड-सेकेंड लीड नीट की पुनर्परीक्षा ठीक-ठाक हो जाने की खबर है। आप जानते हैं कि 2024 में प्रश्नपत्र लीक हुए थे लेकिन परीक्षा रद्द नहीं हुई थी। सीबीआई ने जांच की, कई लोगों को गिरफ्तार भी किया लेकिन 2026 में प्रश्न पत्र फिर लीक हो गए। एनटीए ने स्वीकार नहीं किया लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। कल पुनर्परीक्षा थी। 2025 में लीक की बात नहीं हुई थी लेकिन बाद की खबरों से पता चला कि इस साल भी लीक होने के पर्याप्त आधार हैं भले लाभ कम लोगों को हुआ हो या माना ही नहीं जाए। इस लिहाज से इस बार का नीट खासा महत्वपूर्ण था और आज ज्यादातर अखबारों ने बता दिया है कि नीट ठीक-ठाक संपन्न हो गया। इसके लिए कल एक खबर गढ़ी गई थी। डिजिटल और सोशल मीडिया पर यह खबर उड़ाई गई कि परीक्षार्थियों की सुविधा का ख्याल रखते हुए प्रधानमंत्री ने 45 मिनट हवाई अड्डे पर इंतजार किया। दिन में सवा बजे जब उनसे कहा गया कि हवाई अड्डे से निकलने की व्यवस्था हो गई है तो उन्होंने कहा कि रास्ते में जो व्यवधान हैं उन्हें हटा दिया जाए ताकि आम लोगों को परेशानी नहीं हो क्योंकि दो बजे से नीट की पुनर्परीक्षा थी। प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए वायु सेना लगाई गई थी आदि। इन्हीं लोगों ने यह खबर भी दी कि बैंगलोर में कांग्रेस की रैली के कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। जाहिर है, पूरे मामले में राजनीति हो रही थी। अपने चार हिन्दी और छह अंग्रेजी के अखबारों से मैंने महसूस किया कि हिन्दी में यह प्रधानमंत्री की छवि बनाने या खराब होती छवि को संभालने की कोशिश हो सकती है। खासकर दैनिक भास्कर की खबर पढ़ने के बाद।
इसलिए आज मैंने हिन्दी के कुछ और अखबार देखे। जो नहीं जानते हैं उनके लिए पहले यह बताना जरूरी है कि एक खबर गढ़ी गई और आज उसे भरपूर प्रचार दिया गया है। हिन्दी अखबार इसमें बेशर्मी से बहुत आगे हैं। इसमें नीट की गड़बड़ियों का जिक्र नहीं करना शामिल है। अगर सोशल मीडिया की ही खबरें अखबारों में छपनी है तो देर रात एक खबर री-नीट का पेपर लीक होने की भी थी। एनटीए ने इनकार किया है लेकिन पत्रकारिता तब होती जब दोनों खबरें छपतीं। अगर नीट के दावे में दम नहीं है तो उसे छोड़ा भी जा सकता था लेकिन आरोप तो छपना ही चाहिए था। खासकर इसलिए कि लीक की खबर टेलीग्राम ऐप्प पर ही थी और सरकार ने टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया था। तकनीकी तौर पर यह बेमतलब था और टेलीग्राम की ओर से कहा गया कि प्रतिबंध लगाने वाले जज साहब पहले उसके प्रतिद्वंद्वी के वकील रह चुके हैं। अच्छे दिन आने से पहले जज ऐसे मामलों से अलग हो जाते थे। लेकिन हमलोगों ने अरविन्द केजरीवाल का मामला, उससे जुड़े तथ्य, जज और सीबीआई के साथ सरकारी वकील के तेवर देखे हैं। प्रसंगवश आज खबर है कि सरकारी वेतन लेकर सरकार की ही सेवा करने वाले सोलीसिटर जनरल तुषार मेहता को एक्सटेंशन मिल गया है।
आइए, आज के हेडलाइन मैनेजमेंट को समझने के लिए पहले मूल खबर को जान लें। कल सोशल और डिजिटल मीडिया पर चल रही खबरों के अनुसार, 1.15 बजे प्रधानमंत्री ने एसपीजी से कहा कि एयरपोर्ट से घर तक की उनकी यात्रा के लिए जो सुरक्षा व्यवधान लगाए गए हैं उन्हें हटा लिया जाए क्योंकि दो बजे से परीक्षा है और वे नहीं चाहते हैं कि उनकी इस यात्रा के कारण बच्चों को परेशानी हो। खबरों के अनुसार उन्होंने 45 मिनट इंतजार किया और 2.00 बजे के बाद निकले होंगे। लेकिन तथ्य यह है कि परीक्षा भले दो बजे से थी, रिपोर्टिंग टाइम 1.30 बजे ही था। प्रधानमंत्री का समय महत्वपूर्ण है इसका ख्याल पहले ही नहीं रखा गया। आखिर क्यों? मुझे लगता है कि 1.15 का समय इसीलिए रखा गया होगा क्योंकि यही उचित समय था। वैसे भी, प्रधानमंत्री जिस काम के लिए गए थे उसे करके ही लौटते। विशेष विमान से आने वाला समय आगे-पीछे कर ही सकता है। इसलिए अगर रुके तो वह भी पहले से तय होगा। प्रचार जबरदस्ती है। बैंगलुरू में कांग्रेस की रैली के कारण बच्चों को परेशानी का प्रचार भी सरकार समर्थक ही कर रहे हैं। इसके जरिए यह दिखाने-बताने की कोशिश की जा रही कि बच्चों का ख्याल प्रधानमंत्री ही रखते हैं। कांग्रेस (असल में राहुल गांधी) तो राजनीति ही करते हैं। मुझे लगता है, बच्चों का ख्याल रख रहे होते या रखना ही होता तो धर्मेन्द्र प्रधान को हटा देते। उन्हें कोई और मंत्रालय भी दिया जा सकता है और ऐसा नहीं हो सकता है कि धर्मेन्द्र प्रधान की टक्कर का योग्य (या अयोग्य) भाजपा में दूसरा न हो। सीबीएसई के मामले में आईएएस अफसरों के साथ ऐसा किया ही गया है। एनटीए के मामले में 2024 में किया ही गया था।
खबरों में धर्मेन्द्र प्रधान के जरिए ही परीक्षा करवाना या परीक्षा की राजनीति करने पर कुछ नहीं है। उल्टे आज सब सामान्य दिखाया गया है। कांग्रेस की आलोचना जरूर है और यह कांग्रेस से हो रही परेशानी के कारण भी हो सकता है। कॉक्रोच जनता पार्टी और उसका आंदोलन अलग परेशानी है और धर्मेन्द्र प्रधान को नहीं हटाने का कारण यह भी हो सकता है कि तय नहीं हो रहा हो कि इसे कैसे लिया, देखा या समझा जाएगा। पर यह अलग मुद्दा है। सोशल और डिजिटल मीडिया पर कल के प्रचार से ऐसा लग रहा था जैसे कांग्रेस के कार्यक्रम से बंगलुरू में नीट के परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। दिल्ली में प्रधानमंत्री ने 45 मिनट इंतजार करके बच्चों का ख्याल रख लिया। अब धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की क्या जरूरत?

दिलचस्प यह भी है कि दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉक्रोच जनता पार्टी का धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसकी मुख्य मांग धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा है लेकिन दिल्ली के अखबारों में इसकी खबर पहले पन्ने पर नहीं है। मुझे सिर्फ देशबन्धु में यह खबर पहले पन्ने पर दिखी। कड़ी सुरक्षा में नीट के आयोजन की खबर है लेकिन प्रधानमंत्री के इंतजार की खबर नहीं है। बताया गया है कि शिक्षा मंत्री ने व्यवस्था की समीक्षा की। हैदराबाद में छात्रा की आत्महत्या और तमिलनाडु में छात्र द्वारा तनाव नहीं झेल पाने की खबर भी पहले पन्ने पर प्रमुखता से है।
अमर उजाला में आज नीट की खबर के साथ पहले पन्ने पर चर्चा है। अंदर विवरण होने की सूचना। नवोदय टाइम्स में नीट की खबर लीड है। इसके साथ दो कॉलम की खबर है। इसका शीर्षक रिवर्स में है। पहले खबरें थी की री-नीट की निगरानी प्रधानमंत्री खुद कर रहे थे। लेकिन नवोदय टाइम्स ने बताया है, शिक्षा मंत्री प्रधान ने की समीक्षा। दैनिक जागरण में यह खबर दो कॉलम में अलग रंग में हाईलाइट की हुई है। शीर्षक खबर के साथ ही है और अपेक्षाकृत छोटे फौन्ट में है। हिन्दुस्तान में नीट ठीक-ठाक हो गया – लीड है। इसके साथ यह दो कॉलम की अच्छी-भली खबर है। दैनिक भास्कर में नीट की खबर लीड है, प्रधानमंत्री ने 45 मिनट इंतजार किया भी है। ऊपर जो स्क्रीन शॉट है उसमें इसे लाल से हाईलाइनट मैंने किया है, अखबार में नहीं है। लेकिन अखबार की खबर बताती है कि सब ठीक-ठाक नहीं रहा। क्या-क्या हुआ आप देख सकते हैं जो दूसरे अखबारों में नहीं हैं या प्रमुखता से नहीं हैं। तथ्य यह है कि सुरक्षा के नाम पर परीक्षार्थियों के लिए ड्रेस निर्धारित था। लड़कियों को बुर्का में जाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, कान की बाली तक खुलवा दी गई लेकिन दैनिक भास्कर की खबर बताती है कि एक परीक्षार्थी मोबाइल लेकर चली गई। अगर ऐसा है तो बच्चों को लेवल प्लेइंग फील्ड कहां मिला? प्रतिभा की सही पहचान कैसे हुई होगी और एनटीए का काम भी चुनाव आयोग जैसा ही रहा।
नीट के आयोजन में कल की चूक के बारे में द टेलीग्राफ में भी खबर है। अंग्रेजी अखबारों में नीट के आयोजन की खबर दि एशियन एज में है। इसका शीर्षक है, 20 लाख से ज्यादा बच्चों ने 5440 केंद्रों में कड़ी सुरक्षा में परीक्षा दी। इसमें प्रधानमंत्री के इंतजार की खबर नहीं है और उसे हाईलाइट नहीं किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया में नीट की खबर लीड है। खास खबरों के बॉक्स में सबसे ऊपर है, प्रधानमंत्री का 45 मिनट इंतजार। बाकी खबरों में घायल परीक्षार्थी के लिए विशेष व्यवस्था, नियम बताने पर परीक्षार्थी को बुर्का में इजाजत मिली। टेलीग्राम पर बैन के बाद वीपीएन डाउनलोड में वृद्धि, 17 जून को गए हफ्ते के औसत के मुकाबले 76 प्रतिशत की वृद्धि। द हिन्दू में खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, 20 लाख से ज्यादा बच्चों ने नीट दी। इस खबर में कुछ भी हाईलाइट नहीं है, लाइन में खड़े परीक्षार्थियों की फोटो है। हिन्दुस्तान टाइम्स में खबर, फोटो और शीर्षक सेकेंड लीड है। शीर्षक, हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, नीट रीटेस्ट कड़ी निगरानी में हुआ। फोटो एक परीक्षा केंद्र की है। प्रधानमंत्री के इंतजार की खबर नहीं है लेकिन यह बताया गया है कि सीबीएसई पुनर्परीक्षा के नीतजे आ गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस में नीट की खबर लीड है। मुख्य शीर्षक यही है कि 20 लाख से ज्यादा लोगों ने परीक्षा दी। दो खबरों में एक का शीर्षक है, 5400 से ज्यादा केंद्रों पर सहज परीक्षा के लिए भारतीय वायु सेना से लेकर केंद्रीय बलों तक सब लगे। दूसरी खबर का शीर्षक है, कुछ घबड़ाए हुए थे, ज्यादातर राहत में थे : छात्रों और अभिभावकों के लिए एक बाधा टली।
आइए, अब आज की दूसरी-तीसरी खबरें भी देख लें। पहले हिन्दी अखबारों की बात। अमर उजाला की लीड सरकारी प्रचार है। लीड का फ्लैग शीर्षक है, नौसेना को मिले तीन युद्धपोत – दूनागिरी, संशोधक व अग्रे…. प्रधानमंत्री ने देश को किए समर्पित। मुख्य शीर्षक है, ब्रह्मोस से लैस दूनागिरी दुश्मन के रडार को देगा चकमा, समुद्र की थाह लेगा संशोधक। सेकेंड लीड भी सरकारी प्रचार ही है, पीएम मोदी की अगुआई में हजारों लोगों ने किया योग। नीट की खबर बॉटम है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, सीसीटीवी और ड्रोन की निगरानी में शांति से हुआ नीट री एग्जाम। सेकेंड लीड, तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्ध राष्ट्र को समर्पित किए जाने की खबर है। मुख्य शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा – समुद्री सामर्थ्य को मजबूत कर रहा है भारत। कहने की जरूरत नहीं है कि भारत जब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का सामर्थ्य खोता दिख रहा है और परीक्षा की गंभीरता खत्म हो चुकी है, स्वतंत्र और निष्पक्ष परीक्षा कराने की इच्छा शक्ति नहीं दिख रही है तब समुद्री सामर्थ्य मजबूत करने का प्रचार किया जा रहा है। देशबन्धु की लीड भी मोदी का दावा है। शीर्षक है, योग दिवस सबसे बड़ा उत्सव बना। कॉकरोच जनता पार्टी की खबर सिर्फ यहीं पहले पन्ने पर है। दैनिक भास्कर की सेकेंड लीड तो नीट है ही पर लीड का फ्लैग शीर्षक है, शांति फिर खतरे में। लेबनान पर हमले के विरोध में ईरान ने शांति वार्ता बीच में छोड़ी। मुख्य शीर्षक है – सुधर जाओ, वरना फिर हमले : ट्रम्प; वो गरजते हैं, हम बरसते हैं : ईरान। अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस की लीड अमेरिका-ईरान के वार्ताकारों के स्विटजरलैंड में होने की खबर है। फ्लैग शीर्षक, ईरान को ट्रम्प की चेतावनी है। वार्ता का नेतृत्व अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वांस और ईरान की तरफ से मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ कर रहे हैं। वांस नई शुरुआत की संभावना टटोल रहे हैं। खबर के अनुसार ईरान ने इस दिशा में प्रगति को लेबनान से जोड़ा है जबकि अमेरिका का फोकस तेहरान की परमाणु योजना है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, ट्रम्प की नई धमकियों से ईरान-अमेरिका पर संकट के बादल। द टेलीग्राफ और दि एशियन एज ने योग पर प्रधानमंत्री के विचारों को लीड बनाया है जबकि द हिन्दू ने तमिलनाडु की सीफ़ूड इकाई में अमोनिया गैस लीक होने से दो लोगों की मौत की खबर को लीड बनाया है। लीक के बाद 60 से ज़्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें ज्यादातर ज़्यादातर प्रवासी मज़दूर हैं। मुख्यमंत्री ने तीन सदस्यों वाली जांच कमेटी बनाई है और मृतकों (दोनों उड़ीशा के रहने वाले थे) के परिवारों के लिए दो लाख रुपये के मुआवज़े का एलान किया है। कंपनी के मालिक और मैनेजर को गिरफ़्तार कर लिया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू की लीड और सेकेंड लीड बदल गई हैं। यहां नीट लीड है और अमोनिया लीक की खबर की खबर सेकेंड लीड है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


