Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

मध्य प्रदेश

मैं चंपत राय की कसम खाकर कहता हूँ; बेईमानी, भ्रष्‍टाचार, लूट, दगाबाजी, टोपीबाजी जैसे काम भाजपा के लोग कर ही नहीं सकते हैं!

अनिल कुमार-

मैं जमीन खरीदने के मामले में मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री मोहन यादव के साथ हूं. वो भाजपा के नेता हैं, वह लूट चोरी तो कर ही नहीं सकते. जैसे चंपत राय जी बसंल भाई साहब राम मंदिर चढ़ावा लुट जाने के बाद भी चोर नहीं कहे जा सकते, वैसे ही मोहन यादव पर भी कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता है.

मुझे तो खुशी है कि आज कल लोग खुद अकेले ही सब कुछ लूटने की कोशिश में रहते हैं, उस दौर में मोहन यादव जी ने पूरे परिवार का ख्‍याल रखा है. आज जब भाई-भाई का नहीं हो रहा है, मोहन यादव जी ने भाई और भतीजों का भी पूरा ख्‍याल रखा है. इसकी जितनी तारीफ की जाये उतना कम है.

अगर 2020 में उनके मंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने जमीन खरीदी है तो इसमें गलत क्‍या है? पैसे रहेंगे तभी तो कोई जमीन खरीदेगा, जब पैसे ही नहीं रहेंगे तो आदमी या परिवार जमीन कहां से खरीदेगा? इसमें इतना हल्‍ला गुल्‍ला करने वाली कौन सी बात हो गई? जब पैसे आये तो जमीन खरीदी गई.

वह अगर अपने परिवार के द्वारा खरीदी गई जमीन के आसपास विकास करा रहे हैं तो इसमें तो उज्‍जैनवासियों को खुश होना चाहिये, बल्कि कोशिश करके उज्‍जैन की समूची जमीन उनके परिवार को खरीदवा देनी चाहिये या दान दे देनी चाहिये ताकि उन इलाकों का भी सरकार के द्वारा विकास कराया जा सके.

संघ और भाजपा से जुड़े लोग बेहद ईमानदार होते हैं. जो लोग भी इन पर आरोप लगायेगा, उनके लिये मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. मैं बंसल जी भाई साहब की कसम खाकर कहता हूं कि बेईमानी, भ्रष्‍टाचार, लूट, दगाबाजी, टोपीबाजी जैसे काम भाजपा के लोग कर ही नहीं सकते हैं. ये दूसरे लोग होते हैं, जो ऐसा करते हैं.

मैं मोहन जी यादव और उनके परिवार के साथ खड़ा हूं. जब आईएएस और आईपीएस बनने के बाद जमीन खरीदना गुनाह नहीं है तो मंत्री या मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जमीन खरीदना भी कोई पाप नहीं है. जब भी किसी व्‍यक्ति के पास पैसे आयेंगे, वो तभी जमीन खरीदेगा, आज के समय में बिना पैसे के कोई कुछ नहीं खरीद सकता है.


जादू देखिए… मोहन यादव मुख्यमंत्री क्या बने, मानो रिश्तेदारों की जमीन पहचानने की दिव्य शक्ति जाग उठी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पत्नी, बहू, भाई, बेटे और अन्य परिजनों ने उज्जैन में कई जमीनें खरीदीं।
संयोग देखिए, ज्यादातर जमीनें उन्हीं इलाकों में थीं जहाँ सरकारी प्रोजेक्ट आने वाले थे। अब कोई इसे अंदरूनी जानकारी, प्रभाव का इस्तेमाल या भ्रष्टाचार कहे, तो वह गलत होगा। इसे “विकास की भविष्यवाणी” कहिए। कुछ लोग मौसम का हाल पहले से जान लेते हैं, कुछ लोग शेयर मार्केट का रुख पहचान लेते हैं, और कुछ लोग सरकारी प्रोजेक्ट कहाँ आएंगे, यह भी पहले से जान लेते हैं।
-नयन शर्मा कौशिक

Map of Ujjain area showing roads, neighborhoods and numbered markers (blue, brown and red) for navigation or points of interest.

Related News…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. Subodh Singh

    June 23, 2026 at 10:27 pm

    शांति से इलेक्टोरल बॉन्ड से काम चल रहा था, किसी को कुछ लेना देना नहीं था, सब पर्दे के पीछे आराम से हो जाता था, वो आप लोगों को बर्दाश्त नहीं हुआ तो अब पैसा कहां से आएगा, अब पुराने तरीके ही अपनाने होंगे, इसमें गलत क्या है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन