रवीश कुमार-
चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया? राम मंदिर के चढ़ावे में डकैती का मामला है, चंपत राय को कौन बचा रहा है? एक मिनट, कहीं ऐसा तो नहीं कि चंपत राय किसी को बचा रहे हैं।
ED, NIA, CBI का जैकेट पहन कर किसी विपक्षी नेता के घर के बाहर दिखने वाली टीम कहाँ है? ED का छापा क्यों नहीं पड़ा?
डकैती की पुष्टि होते ही FIR क्यों नहीं हुई? कैश बरामद करन वाले कौन थे? अयोध्या में कितनी ज़मीन की ख़रीद बिक्री कैश में हुई है? सबका हिसाब कौन देगा?
मन्दिरों में चढ़ावे की चोरी कोई नई बात नहीं है। ये बात इन धर्मस्थलों के संचालकों से लेकर दान देने वाले भक्तों तक सभी को मालूम होती है। महत्वपूर्ण बात ये है कि राम मन्दिर निर्माण के ढाई साल के भीतर ही इस तरह लाखों – करोड़ों के वारे-न्यारे होने की ख़बरें खुले आम चर्चा में हैं।
-हृदयेश जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
राजेश साहू-
लवकुश मिश्रा 6 महीने पहले राम मंदिर में ड्यूटी करना शुरू किया। दान में आए पैसों को गिनने का काम मिला।
6 महीने में ही उसने अयोध्या में 40 लाख का प्लॉट लिया। उसपर निर्माण शुरू करवा दिया। घर में 10 लाख कैश मिला। इसके अलावा इसके बारे में अभी और खुलासा होना बाकी है।
अब आप सोचिए कोई व्यक्ति महज 6 महीने पहले मंदिर से जुड़ा और इतनी बड़ी चोरी कर गया। लवकुश के जैसे दर्जनों लोग हैं, कुछ और के बारे में भी पता चला कि उन्होंने करोड़ों के प्लॉट खरीदे हैं।
अभी तक न किसी के खिलाफ FIR हुई है और न ही मंदिर की तरफ से इस पूरे गबन पर अपनी बात कही गई। दान गिनती का सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट है। साल में एकाध बार ये लोग बताते हैं। जबकि दूसरे मंदिर में इससे ज्यादा पारदर्शिता है।
इस पूरे मामले ने राम मंदिर की व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। इसके पहले ट्रस्ट ने जब जमीनें खरीदी थी तब भी ऐसे मामले सामने आए थे। कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
आशुतोष शुक्ला-
ऑटो ड्राइवर से करोड़पति..
अयोध्या राम जन्मभूमि ट्रस्ट में शामिल चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव और उन पर आरोप लगाने वाले संतोष दुबे संस्थापक (धर्म सेना) हैं. श्री राम मंदिर में चढ़ावे-और दान के पैसों के चढ़ाया घोटाले को लेकर विवाद शुरू हुआ है तब आरोप-प्रत्यारोप का यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब तक जो चेहरे सामने आए हैं उनमें सबसे अहम किरदार है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू जो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का खास सहयोगी है।
टिन्नू से जुड़े लोग बताते हैं कि वो 28 साल से चंपत राय के साथ है. उससे पहले ऑटो चलाता था, लेकिन अब उसके पास आलिशान घर, बच्चों के लिए हॉस्टल, लखनऊ में एक मकान और देवरिया जिले में करोड़ों की संपत्ति है। चढ़ावा चोरी मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका क्या रही और ऑटो चलाने वाला टिन्नू करोड़पति कैसे बना इन बातों को लेकर धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे ने बताया कि टिन्नू का तीन मंजिला पुश्तैनी घर अयोध्या में राम मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर है. यूपी के देवरिया करोड़ों की संपत्ति, अयोध्या में एयरपोर्ट से सटे आलीशान मकान जहां तीन फ्लोर में बच्चों का हॉस्टल बनाया गया है. आखिर ट्रस्ट ट्रस्ट से ₹22 हजार पाने वाला व्यक्ति 4 सालों में इतना कुछ कैसे बना सकता है. टिन्नू ने राम मंदिर में चढ़ने वाले सोने-चांदी में हेरफेर किया है।
टिन्नू साल 1998-99 में चंपत राय के संपर्क में आया था। उनकी गाड़ी चलाने की वजह से वो उनके विश्वस्त लोगों में शामिल हो गया।इसके बाद साल 2019 में टिन्नू ट्रस्ट का काम देखने लगा। उसकी पावर को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े लोगों को मिलने वाला वॉकी-टॉकी उसके पास है. मंदिर परिसर का मैनपावर मैनेजमेंट टिन्नू ही संभालता है. साथ ही दानपेटी का चढ़ावा बैंक में टिन्नू जमा कराता था।
सबसे अहम ये था कि सोने-चांदी के जेवरों को बिना तौले सिर्फ अनुमान के आधार पर रखा जाता था। जानकारी टिन्नू और चंपत राय को ही होती थी। इन जेवरों के बैंक में जमा होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है!
यूपी सरकार ने चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय SIT का गठन कर दिया है. 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.


