पहाड़ सचमुच आदमी की उम्र बढ़ा देते हैं. खुली हवा, भरपूर ऑक्सीजन, हरियाली और प्रकृति के सान्निध्य में जीवन की रफ्तार धीमी हो जाती है, लेकिन उम्र की मियाद बढ़ जाती है. सुबह-शाम पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना, देवदार और चीड़ के जंगलों के बीच शुद्ध हवा में सांस लेना, शरीर और मन दोनों को तरोताज़ा रखता है. शायद यही वजह है कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों की सेहत और स्फूर्ति अक्सर हैरान कर देती है.
Ambrish Kumar के सौजन्य से आज रामगढ़ में श्रीवास्तव दंपत्ति से मुलाकात हुई. श्रीवास्तव जी इंडियन एयरलाइंस में पायलट रहे हैं और 1981 तक विमान उड़ाते रहे.
नौकरी से निवृत्त होने के बाद उन्होंने रामगढ़ की एक पहाड़ी पर लंबी-चौड़ी जमीन खरीदी और अपनी पत्नी के साथ मिलकर अपने सपनों का घर बनाया. खुद ही पूरा मकान बनाया क्योंकि उन दिनों कारीगर नहीं मिलते थे.
दिलचस्प बात यह है कि उनके घर तक आज भी गाड़ी नहीं पहुंचती. लगभग चार सौ मीटर का पैदल रास्ता तय करके ही वहां पहुंचा जा सकता है.
मूल रूप से गोंडा के रहने वाले श्रीवास्तव दंपत्ति कई वर्षों तक लगातार यहीं रहे. पहाड़ों पर रोज़ाना कई किलोमीटर पैदल चलने की आदत ने उन्हें अद्भुत रूप से स्वस्थ रखा है. आज श्रीवास्तव जी लगभग 91 वर्ष के हैं और उनकी पत्नी 85 वर्ष की उम्र पार कर चुकी हैं, लेकिन दोनों को देखकर उम्र का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है. चेहरे पर चमक, बातचीत में उत्साह और स्मरण शक्ति ऐसी कि कई युवाओं को मात दे दें.
उनसे बात करते हुए महसूस हुआ कि लंबी उम्र का कोई जादुई रहस्य नहीं होता. प्रकृति के करीब रहना, सक्रिय जीवन जीना और मन को शांत रखना ही शायद उसकी सबसे बड़ी कुंजी है.
आज उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा. पहाड़ों ने एक बार फिर सिखाया कि जीवन को लंबा ही नहीं, बेहतर भी कैसे बनाया जा सकता है.
Ajit Anjum रामगढ़ गांव में हैं. सुबह उनके साथ वाक करते हैं फिर देर शाम मिलते हैं. सत्संग होता है. भोजन भात होता है .नब्बे के दशक को याद करते हैं जब वे दिल्ली के पटपड़गंज स्थित आशीर्वाद अपार्टमेंट में मेरे पड़ोसी थे.मैं जनसत्ता में था और वे अमर उजाला में. पिछले एक दशक से वे हमारे इस पहाड़ी गांव में आ रहें हैं.पर बहुत अनुशासित जीवन जीते है शाम सात बजे रात का हल्का भोजन फिर दूसरे दिन सुबह दस बजे के बाद चाय आदि.अमूमन शाकाहारी भोजन और अपना अलग किस्म का मोटे अनाज का आटा, चावल आदि लेकर ही चलते हैं. कल एक वीडियों बनाया अलग तकनीक से.
-अम्बरीश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)
पहाड़ में बस चुके रिटायर पुलिस अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह के घर पहुंचे अजीत अंजुम ने क्या बताया दिखाया, सुनिए-
घोड़ाखाल में आज उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओ.पी. सिंह जी से आत्मीय मुलाकात हुई . वादियों के बीच हिल टॉप पर बने उनके खूबसूरत बंगले से सामने फैला भीमताल झील का अद्भुत दृश्य मन मोह लेने वाला है .बादलों, पहाड़ों और झील के बीच बसा यह ठिकाना प्रकृति और सुकून का अनोखा संगम है .
पुलिस सेवा के लंबे और बेहद चुनौतीपूर्ण सफर के दौरान मिले अनुभवों को उन्होंने दो किताबों में संजोया है . मुलाकात के दौरान पुलिसिंग, प्रशासन, समाज और बदलते समय की चुनौतियों पर दिलचस्प बातचीत हुई . पहाड़ की खूबसूरती, झील का नज़ारा और अनुभवों से भरी बातचीत .आज का दिन यादगार रहा.