नितिन त्रिपाठी-
इन दिनों अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा गर्म है. स्थानीय अख़बार जैसे दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, अमर उजाला में रोज़ ढेरों ख़बरें चढ़ रही हैं. मंदिर में कार्यरत कर्मियों के नाम, पते तक रिपोर्टर्स खोज लाए हैं. ट्रस्ट के पदाधिकारियों के ड्राइवर् आदि का भी नाम आ रहा है जिन्होंने अल्प समय में ही अयोध्या में कोठी बना ली है. परिसर के अधिकारी ऑन कैमरा बयान दे रहे हैं कि यह लंबे समय से चल रहा था. सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तक डिलीट किए जाने की खबर है.
आज से पाँच वर्ष पूर्व यदि ऐसी कोई ख़बर होती तो निःसंदेह मुक़दमा लिखा जाता, दोषियों के घर बुलडोजर चल रहे होते.
पाँच वर्षों में चेंज यह आया कि जैसे ही यह मामला बाहर आया, अखिलेश यादव ने मंदिर कलेक्शन में सात करोड़ चोरी का आरोप लगाया. यह आरोप लगते ही सरकार की पूरी IT टीम, नेताओं की पर्सनल IT टीम और भक्त मंडली लग गए – अखिलेश की बेटी एक नाइजीरियन के साथ भाग गई सात करोड़ लेकर. भाजपा जो सदैव चाल चरित्र चेहरा की पार्टी रही है, राम मंदिर जिसकी सफलता का मूल मंत्र रहा है, उस मंदिर के चंदे में चोरी करने वाले ड्राइवर, क्लर्क आदि को बचाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी और समर्थक उतर पड़े, दो दिन तक जबरदस्त गंदगी फैलाई.
संदेश यह कि अगर तुम हमारे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज उठाओगे तो हम तुम्हारी बहन बेटियों को नहीं छोड़ेंगे. कल्पना कीजिए नेता विपक्ष की बेटी के लिए ये इस लेवल तक गिर गए कोई आम आदमी आवाज उठाता तो उसका क्या करते यह समर्थक. ऊपर से तर्क क्या? यही काम तो सपा वाले करते थे. अरे भाई वो करते थे इसी लिए तो जनता ने उन्हें हटा कर तुम्हें बिठाया और तुम भी यह करने लगे?
और यह इकलौती घटना नहीं है. विगत दो तीन वर्षों में कहीं कुछ भी गड़बड़ होती है विक्टिम का ही चीर हरण कर दिया जाता है. सीबीएसई में इंटर मीडिएट परीक्षा की गड़बड़ी सामने आई, छात्र पाकिस्तानी हैं. नोएडा में एक इंजीनियर नब्बे डिग्री सड़क पर अँधेरे और साइन न होने से गड्ढे में गिर डूब मर गया सरकार की पूरी मशीनरी सामने खड़ी थी आधा घंटे ठंड में गड्ढे पानी में कौन उतरे. दोषी कौन? मुहिम चला दी गई इंजीनियर दारू पिए था. उसका बाप दोषी कि बेटे को तैरना न सिखाया. ख़ुद क्यों न कूद गया बेटे को बचाने के लिए.
हज़ारों केसेज के साथ रोज़ यही हो रहा है. पाकिस्तानी बोल दो. देश द्रोही बोल दो. खानदान में एक कांग्रेसी निकाल दो. लड़की है फिर तो उसका चीर हरण सबसे आसान है. फेक फ़ोटो डाल दो. फिर भी न शांत हो तो वीडियो बना कर डाल दो. अपनी सरकार है, फुल ऑन लाइसेंस है.
भाजपा को यह सत्ता इस लिए नहीं मिली कि वह सत्ता भोगें बल्कि इस लिए मिली है कि सुचारू शासन दें. यदि कहीं कोई अपराध हो रहा है, भ्रष्टाचार हो रहा है तो उस पर कार्यवाही करने से सरकार छोटी नहीं होती. पर जब आप भ्रष्टाचारियों को बचाते हैं तो संदेश साफ़ होता है आप स्वयं लिप्त है.
अब यह राम मंदिर में घपले का मामला भी धर्मेंद्र प्रधान मामला बन गया है. अब सरकार कार्यवाही करती है तो यह ईगो को ठेस वाली बात होगी तो दबाने के भरसक प्रयत्न होंगे. और जाहिर सी बात है बदबू को जितना ही दबाने का प्रयास करेंगे वह और प्रदूषित करेगी.
Let the sanity prevails और सरकार वापस वह काम करना आरम्भ करे जिसकी सरकार से उम्मीद रहती है.


