Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : भाजपा ने तृणमूल के गद्दारों और अपने ‘घुसपैठियों’ को अधिकृत तौर पर वापस लिया

Front page of a Hindi newspaper featuring a large bold headline: 'हमले में ईरान का चाबहार पोर्ट तबाह, यहाँ भारत ने 1 हजार करोड़ लगा दिए', with a smaller article box beneath.

दैनिक भास्कर ने जंग तेज के तहत बताया है कि हमले में ईरान का चाबहार पोर्ट तबाह हो गया है। भारत ने यहां एक हजार करोड़ रुपए लगाए थे।

संजय कुमार सिंह

दलबदल और शोर मचाने की भाजपाई राजनीति का हश्र आज कई अखबारों में प्रमुखता से है। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे दो कॉलम में टॉप पर छापा है तो अमर उजाला ने सबसे नीचे कोने में। खबर के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। चुनाव आयोग ने अपेक्षाकृत अचानक और जल्दी इन तीन सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी और अब इन्हीं  तीन खाली सीटों के लिए चुनाव होने हैं। तय है कि भाजपा के तीनों उम्मीदवार जीत जाएंगे और भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के उन्हीं तीन भगोड़ों को उम्मीदवार बना दिया है। इनके इस्तीफे की वजह से ये उपचुनाव हो रहे हैं। मतलब इस्तीफा, उपचुनाव और नतीजा सबके बावजूद – देश को मिला ठन ठन गोपाल। तकनीकी और कानूनी तौर पर इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के आधार पर जब लाखों लोगों को वोट देने से वंचित किया जा सकता है तब इस्तीफा देने वालों के चुने जाने की यह भाजपाई व्यवस्था खबर है या नहीं तय करना मुश्किल है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने तीन कॉलम में छापा है तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने सिंगल कॉलम में निपटा दिया है। हालांकि शीर्षक लाल स्याही से है। टीएमसी के भगोड़ों और भाजपा ने यह सब खुल्लम खुला किया है क्योंकि इसमें कुछ गलत नहीं है। भले सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है, नियम कायदों का मजाक बनता है। लेकिन बड़े लोगों की बड़ी बात। आम आदमी सवाल पूछे तो उसके अधिकारों के रक्षक भारत के मुख्य न्यायाधीश भी पूछ सकते हैं, आप हैं कौन? हालांकि, अब पत्रकार भी आम आदमी ही हैं संपादक को भी बीएलओ औकात बता चुका है। ऐसे समय में आज इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, भाजपा में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद टीएमसी के तीन सांसदों को बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया गया। अमर उजाला की खबर का शीर्षक है, तृणमूल के तीन पूर्व सांसद हुए भाजपाई, फिर जाएंगे राज्यसभा। यही नहीं एक खबर यह भी है जो बताती है कि तीनों सीटों पर जीत तय। जो बात नहीं बताई गई या मौजूदा दौर की पत्रकारिता में बताना जरूरी नहीं रह गया है वह यह कि राज्य सभा कि सदस्यता पार्टियां इनाम में देती रही हैं, पहले टीएमसी ने इन्हें  इनाम दिया था।

राज्य विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने टीएमसी को कमजोर करने की कोशिशें शुरू कीं। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव यह काम कर रहे थे। खबर है कि उनके चार सहायकों को सरकार ने अचानक बदल दिया है और अभी तक यह पता नहीं चला है कि ऐसा कौन सा अपराध इन चार सहायकों ने किया कि उन्हें अचानक पद से हटा दिया गया। इनमें दो की तो नौकरी भी चली गई है और राजस्व सेवा के एक अधिकारी को प्रशासनिक कारण से हटाना बताया गया है। लोकसभा के 20 दलबदुलओं के बारे में कुछ पता नहीं है और राज्यसभा के तीन सदस्यों के लिए उपचुनाव हो रहा है क्योंकि भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का जीतना तय है। लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं होता है इसलिए मामला अभी लटका हुआ है। जाहिर है, इस्तीफा और उपचुनाव की पूरी जरूरत भाजपा की दलबदल की जरूरत या इच्छा पूरी करने के लिए है। लोकसभा उम्मीदवारों का मामला इतना आसान नहीं है इसलिए इस्तीफे नहीं हुए हैं, पता नहीं चुनाव होंगे या नहीं और होंगे तो जीतेंगे कि नहीं – तय नहीं है। और चूंकि जीतना तय नहीं है इसलिए टिकट मिलेगा कि नहीं वह भी तय नहीं है। आप जानते हैं कि लोकसभा सांसद अगर अच्छा काम करे तो अपने दम पर भी चुनाव जीत सकता है और दलबदलुओं का मामला पक्का नहीं होता। इसलिए टिकट मिलने पर भी जीतना तय नहीं होता है। टीएमसी के 20 दल बदलुओं के मामले में कोशिश दिख रही है कि (लोकसभा उप) चुनाव न कराना पड़े और लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अलग गुट मान लें। दूसरी ओर, राज्य सभा में जीतना तय था तो उसका दुरुपयोग किया जा रहा है। इस्तीफा देना वाला फिर जीत कर आ जाए तो दल बदलने के लिए इस्तीफा और उपचुनाव कितना नैतिक है, आप समझ सकते हैं हालांकि नैतिकता का इस सरकार में क्या महत्व है वह अपनी जगह है।  

द टेलीग्राफ ने इस खबर को तीन कॉलम का लीड बनाया है। फ्लैग शीर्षक है, इस्तीफे के बाद राज्यसभा के लिए पुनर्नामांकन। टीएमसी की बागी तिकड़ी के लिए भाजपा टिकट। राज्य विधानसभा में भाजपा उम्मीदवारों की संख्या के मद्देनजर इन तीनों का जीतना तय है और इसीलिए इनलोगों ने शुरू में ही इस्तीफा देकर माहौल बनाया था जो बाद में फंस गया है। भूपेन्द्र यादव के सहायकों को हटाए जाने के बाद उलझा लग रहा है। जल्दबाजी में उप चुनाव का मकसद बागियों को भरोसे में रखना भी हो सकता है लेकिन वह अलग मुद्दा है। खास बात यह है कि जिन लोगों ने इस्तीफा दे दिया था वही नामांकन कर रहे हैं और व्यवस्था के अनुसार यह गलत नहीं है। खबर भी नहीं है। तभी तो सिर्फ द टेलीग्राफ में लीड है। इसका कारण यह भी है कि होने को यह चुनाव है लेकिन मतदाता तय हैं और गैर भाजपाई का हारना तय है फिर भी अगर किसी ने नामांकन दायर कर दिया तो चुनाव होगा और निर्विरोध विजयी घोषित किया जा सकता है। एक और खास बात यह है कि ये लोग अपने पुराने कार्यकाल के लिए ही चुने जाएंगे। यानी इनकी सदस्यता तभी तक वैध रहेगी जब तक पहले वाली सदस्यता थी, जिससे इनलोगों ने स्वेच्छा से या भाजपा की सदस्यता के लिए इस्तीफा दिया है। जो भी हो, यह लोकतंत्र और चुनाव की प्रक्रिया का मजाक है। इसलिए खबर बड़ी है आप चाहें तो कह सकते हैं खबर है ही नहीं। कहने की जरूरत नहीं है कि तीन लोगों ने यह दल बदल उस पार्टी के लिए किया है जिसका सत्ता में रहना देश के लिए भारी पड़ रहा है रोज नए मामले सामने आ रहे हैं। इस सरकार का हाल यह है कि घुसपैठियों के खिलाफ हवा-हवाई अभियान चलाया। जिन लोगों को घुसपैठिया कह कर बांग्लादेश भेजा उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वापस लाया गया फिर भी क्रम नहीं रुका है। आज द हिन्दू की खबर के अनुसार, चार भारतीय नागरिक जो गए साल घुसपैठिये ‘पहचाने’ गए थे, जबरन बांग्लादेश भेज दिए गए थे, वापस घर आ गए। आप समझ सकते हैं कि यह एक सरकार द्वारा अपने ही नागरिकों के साथ की गई जबरदस्ती का सबसे भयानक और लापरवाह रूप है। ऐसी गलती करने वालों से माफी की उम्मीद भी क्या की जाए जब नोटबंदी थोपने के लिए कोई माफी नहीं मांगी गई है और इसपर नजर रखने के लिए जिम्मेदार लोग इस सरकार के प्रचारक बन गए हैं। आम और विशिष्ट नागरिकों के तो कहने ही क्या।

इस सरकार की उपलब्धियों में जबरन चुनाव जीतना, ईवीएम में आग लग जाना नया शामिल हुआ है। अब पेट्रोल में जबरन इथेनॉल मिलाना शामिल है। इसमें भी आलम यह है कि देश के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की वकालत और उसका बचाव करते हैं जबकि उनके बेटे यही काम करते हैं और इसी से कमाते हैं। पूछने पर कह दिया कि उनका हिस्सा केवल 0.07 प्रतिशत है जबकि अनुमान है कि यह भी कम से कम 50 करोड़ रुपए प्रति वर्ष है। दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्री यह नहीं बता रहे हैं कि ईरान अमेरिका युद्ध के समय बढ़ाये गए पेट्रोल की कीमत कब कम होगी और अभी तक कम क्यों नहीं की गई है और पेट्रोलियम कंपनियां कई दिनों से रोज 11 रुपए लीटर के हिसाब से ज्यादा कमा रही है और इस आशय की खबर छप चुकी है। परिवहन मंत्री कह रहे हैं और इंडियन एक्सप्रेस ने टॉप पर पांच कॉलम में छापा है कि एथनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ी खराब होने के मामले सोशल मीडिया पर बढ़ा चढ़ा कर बताए जा रहे हैं। दिलचस्प यह है कि मंत्री जी ने पहले एक उदाहरण पेश करने की बात की थी अब उदाहरणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बता रहे हैं और तहसीन पूना वाला ने कहा है कि उनके पास छह उदाहरण हैं और वे इन छह लोगों के साथ उनसे मिलना चाहते हैं तो दिल्ली पुलिस ने मना कर दिया है। गिरफ्तार कर लेने की चेतावनी दी है। इन सबके बावजूद इंडियन एक्सप्रेस ने नितिन गडकरी को अपना मंच दिया है। इसपर उन्होंने कहा और प्रचारित किया गया है कि, ई20 से माइलेज प्रभावित होता है लेकिन पश्चिम एशिया का संकट बताता है कि भारत को विकल्प का पता लगाना चाहिए। अब विकल्प का पता कैसे लगेगा इसके लिए अनुसंधान और विकास कौन करेगा, कैसे करेगा, सरकार क्या कर रही है – कुछ पता नहीं है।

आज ही इंडियन एक्सप्रेस में खबर है, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज को मिलने वाले पैसों में कटौती हो सकती है। खबरों के अनुसार, इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च ने दिल्ली स्थित सीएसडीएस को कारण बताओ नोटिस जारी कर अनुदान वापस लेने की बात कही है। इससे संस्था को मिलने वाले पैसों में कटौती का खतरा पैदा हो गया है। यह अनुदान सीएसडीएस के कुल वेतन खर्च का लगभग 90% है। जाहिर है इससे यह संस्थान बंद हो जाए तो हो जाए और अध्ययन का इसका काम नहीं हो पाएगा। इस सरकार ने ऐसा कई संस्थाओं के साथ किया है और यह तो देसी चंदे का मामला है विदेशी चंदा लेना और प्राप्त करना भी मुश्किल कर दिया गया है। इससे कई गैर सरकारी संगठनों का काम बंद या कम हो गया है और रोजगार का जो संकट है सो है ही। दुनिया जानती है कि ये वो संगठन है जो नरेन्द्र मोदी का विरोध करते थे, किया है और कर सकते हैं। सीएसडीएस के मामले में तो अखबार ने ही लिखा है, यह कार्रवाई सीएसडीएस के प्रोफेसर, संजय कुमार द्वारा महाराष्ट्र चुनाव के वोटर डेटा में कथित गड़बड़ी दिखाने के बाद शुरू हुई। हालांकि कुमार ने ऐसा भ्रम के कारण हुआ बताया था और माफी भी मांग ली थी। इसके बाद आईसीएसएसआर ने एक जांच समिति बना कर अनुदान को “अबेयेंस” में डाल दिया था। इस नोटिस में धन के दुरुपयोग, फैकल्टी की नियुक्तियों में नियमों का उल्लंघन और अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। लेकिन इन आरोपों का क्या मतलब जब शिक्षा मंत्री के तमाम कारनामों और भारी मांग व दबाव के बावजूद उन्हें कई वर्षों में नहीं हटाया गया है। 

ऐसे में देश भर में सामान्य प्रशासन का जो हाल है वह भी चिन्ताजनक है। भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे के बावजूद रिटायर अफसर से बरामद संपत्ति का हाल आपने कल यहां पढ़ा था। आज देश भर में बारिश से परेशानी की खबरें भरी पड़ी हैं। वह भी तब जब इस बार बारिश देर से हुई है और सामान्य के मुकाबले बहुत कम है। फिर भी टाइम्स ऑफ इंडिया की आज  की लीड बारिश से हुई परेशानी की खबर है और कहानी दिल्ली एनसीआर की है। ठीक है कि कल का दिन तीन साल में दिल्ली में सबसे ज्यादा बारिश वाला था लेकिन डबल इंजन वाले एनसीआर के कई इलाकों में पानी भर गया था। नवोदय टाइम्स ने दिल्ली गाजियाबाद में डूबने से दो बच्चों की मौत की खबर दी है। दि एशियन एज ने बताया है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने विधानसबा क्षेत्र के शालीमार गांव में ड्रेनेज का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि पानी निकासी की उचि व्यवस्था सुनिश्चित करें। एक और खबर के अनुसार, रायगढ़ में बाढ़ के कारण एक एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के 2000 सिलेंडर बह गए। उत्तराखंड में भूस्खलन, पानी भरने और नदियों में पानी बढ़ने से 100 से ज्यादा सड़कें बंद हो गईं। इनमें प्रमुख राजमार्ग भी हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने गाजीपुर सब्जी मंडी के सामने की सड़क की तस्वीर छापी है। यहां घुटनों तक पानी भारी हुआ है। दैनिक भास्कर ने जंग तेज के तहत बताया है कि हमले में ईरान का चाबहार पोर्ट तबाह हो गया है। भारत ने यहां एक हजार करोड़ लगाए थे। देशबन्धु ने अमेरिका को ईरान की चेतावनी बताई है और लिखा है, धमकियों से नहीं खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट।     

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन