नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जून में फ्रांस में हुई मुलाकात को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ गया है। अब भारत सरकार के सूत्रों ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि ट्रंप के “अप्रत्याशित व्यवहार” को देखते हुए भारत ने मुलाकात के दौरान सावधानी भरा रुख अपनाया था।
दरअसल, सर्जियो गोर ने हाल में एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत ने मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता या मीडिया से सवाल-जवाब नहीं करने की इच्छा पहले ही अमेरिकी पक्ष को बता दी थी। गोर के मुताबिक, ट्रंप को इस बात की जानकारी थी, लेकिन मुलाकात के बाद उन्होंने अचानक मीडिया से सवाल लेने शुरू कर दिए और करीब 45 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
गोर की इस टिप्पणी के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर सवाल उठाए गए। इसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा कि विदेशी नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर पहले से व्यवस्थाओं पर चर्चा करना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। भारत ने भी अपने यहां VVIP यात्राओं के दौरान अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया के बारे में अमेरिकी पक्ष को पहले ही जानकारी दी थी।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर सतर्क रहते हैं। सूत्रों ने इसके लिए ट्रंप की दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ हुई बातचीत का भी हवाला दिया। इसी वजह से मोदी-ट्रंप मुलाकात में भारत ने सावधानी बरतने का फैसला किया था।
जून में फ्रांस में हुई थी मोदी-ट्रंप मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियां-ले-बैन में G7 शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और अन्य अहम मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
अब सर्जियो गोर के बयान और सरकार की सफाई के बाद मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान मीडिया इंटरैक्शन को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने इसे सामान्य VVIP प्रोटोकॉल और ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लिया गया सावधानी भरा कूटनीतिक फैसला बताया है।
तो नौबत यहां तक आ गई की “डीयर फ्रेंड ट्रंप” अब “मनमौजी ट्रंप” हो गये.
अमेरिकी राजदूत सर्जिओ गोर के सार्वजनिक बयान कि “ट्रंप के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी की तरफ से पत्रकारों के सवाल ने लेने की गुजारिश की गई थी” पर विदेश मंत्रालय ने मोदी के बचाव में सेल्फ कर दिया है.
विदेश मंत्रालय ने ‘सूत्रों’ के हवाले से मीडिया में छपवाया है कि “ट्रंप unpredictable (मनमौजी) हैं इसलिये मोदी ने सावधानी बरती और सवाल लेने से बचे’.
अपनी कमज़ोरी छुपाने के लिये अमेरिका के राष्ट्रपति को सरकार की तरफ से मनमौजी कहा जाये या सनकी कहने का इशारा किया जाये कौन से समझदारी है?
इस तरह के कमेंट पत्रकार या कमेंटेटर्स करे तो ठीक है लेकिन सरकार?
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार


