महेश झालानी-
जयपुर। वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी की बकाया वरिष्ठ पत्रकार सम्मान निधि को लेकर उनके अधिवक्ता राम निरंजन गुप्ता की ओर से लीगल नोटिस जारी किए जाने के साथ ही सरकार ने बकाया सम्मान निधि राशि के भुगतान का आदेश प्रसारित कर दिया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आदेश के अनुसार झालानी को जून से अगस्त 2026 तक तीन माह की सम्मान निधि के रूप में 18 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से कुल 54 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा।

लीगल नोटिस में सम्मान निधि रोके जाने को लेकर विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए सात दिन में भुगतान करने, राशि रोकने का वैधानिक आधार बताने तथा संबंधित फाइल, नोटशीट और सक्षम प्राधिकारी के आदेश की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
नोटिस में कहा गया था कि झालानी के खिलाफ दर्ज FIR के मामले में पुलिस अनुसंधान पूरा हो चुका है और Final Report न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके बावजूद सम्मान निधि रोके जाने को लेकर नोटिस में पूछा गया था कि आखिर किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत भुगतान रोका गया।
नोटिस के अनुसार 3 जुलाई को आयुक्त राकेश शर्मा ने झालानी से Final Report की प्रति मांगी थी और 4 अगस्त को यह प्रति आयुक्त तथा विभागीय सचिव डॉ. जितेंद्र सोनी को व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए उपलब्ध करा दी गई थी। इसके बावजूद भुगतान लंबित रहने पर नोटिस में अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही का सवाल उठाया गया था। नोटिस में यह भी मांग की गई थी कि यदि सम्मान निधि रोकने के लिए सीएमओ अथवा मुख्य सचिव स्तर से कोई लिखित निर्देश है तो उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
साथ ही कथित प्रशासनिक उत्पीड़न के लिए 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति तथा परिस्थितियां प्रमाणित होने पर दोनों अधिकारियों के विरुद्ध 2 करोड़ रुपए की मानहानि/क्षतिपूर्ति की पृथक कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। विधिक नोटिस में सात दिन में समाधान नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने की चेतावनी भी दी गई थी।
अब विभाग द्वारा सम्मान निधि भुगतान की स्वीकृति जारी किए जाने के बाद बकाया राशि के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। विभागीय आदेश में 21 मई 2026 की संशोधित अधिसूचना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के अधिस्वीकृत पत्रकारों को 18 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि दिए जाने का प्रावधान भी उद्धृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि इस प्रकरण में जहां विभागीय सचिव डॉ जितेंद्र सोनी की सक्रियता और संवेदनशीलता देखने को मिली, वहीं आयुक्त राकेश शर्मा और अधीनस्थ अधिकारियों ने अपनी घोर लापरवाही, अकर्मण्यता और बदनीयती का परिचय दिया। आयुक्त की निष्क्रियता के चलते करीब दो माह तक यह प्रकरण लंबित रहा। राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आयुक्त की निष्क्रियता और बदनीयती को उजागर किया जाएगा।
संबंधित खबर…
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी की सम्मान निधि मामले ने लिया कानूनी मोड़


