अचलगंज/असोहा (उन्नाव)। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को आजाद मार्ग टोल प्लाजा से आगे आटा बंथर-लक्ष्मणखेड़ा मार्ग के अंडरपास के पास बारिश के कारण सड़क किनारे की मिट्टी धंस गई। इससे करीब पांच फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया। सड़क के नीचे मिट्टी खिसकने से इसके और धंसने का खतरा बढ़ गया है।
मामले की जानकारी मिलते ही निर्माण एजेंसी पीएनसी की तकनीकी टीम ने मौके पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया। बताया गया कि गड्ढे को पूरी तरह ठीक करने में करीब दो दिन लगेंगे। खास बात यह है कि इसी स्थान पर पहले भी मिट्टी धंस चुकी है और गड्ढे को भरकर मरम्मत की गई थी।
10 किलोमीटर के दायरे में सड़क पर बने व्हील ट्रैक
एक्सप्रेसवे के करीब 10 किलोमीटर के हिस्से में हल्की बारिश के बाद ही सड़क पर जगह-जगह व्हील ट्रैक यानी गहरी नालियां बन गई हैं। इनमें पानी भरने के कारण सड़क की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। इससे तेज रफ्तार वाहनों के लहराने और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर किलोमीटर 65 से 65.7 के बीच भारी वाहनों के लिए बनी तीसरी लेन कई जगह दब गई है। उन्नाव-लालगंज हाईवे पुल के पास करीब 40 मीटर हिस्से में सड़क की ऊपरी परत कई जगह टूट गई है।
इसी लेन पर किलोमीटर 42.6 में मेदपुर गांव के पास बारिश के बाद जलभराव हो गया। सड़क पर बनी गहरी नालियों में पानी भरने से वाहन चालकों को परेशानी हुई। किलोमीटर 44.9 पर कुदिकापुर गांव के सामने और 47.9 के पास भी जलभराव की स्थिति बनी रही। किलोमीटर 59 पर नेवरना गांव के पास करीब 40 मीटर सड़क दबने के बाद उसकी ऊपरी परत उखाड़कर नई परत बिछाई गई है।
लोकार्पण के बाद से लगातार सामने आ रहीं खामियां
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के उन्नाव से लखनऊ के बीच करीब 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हिस्से की हालत लगातार सवालों के घेरे में है। लोकार्पण के महज 13वें दिन से सड़क की मरम्मत शुरू हो गई थी। अब तक 2500 से अधिक स्थानों पर मरम्मत और पैचवर्क कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद सड़क की खामियां 32वें दिन भी सामने आ रही हैं।
बार-बार सड़क धंसने, गड्ढे बनने और जलभराव की स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनएचएआई ने जिम्मेदारी पीएनसी पर डाली
निर्माण एजेंसी पर जुर्माना और इंजीनियरों पर कार्रवाई के बाद भी एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम जारी है। पीएनसी लगातार पैचवर्क और अन्य सुधार कार्य करा रही है, लेकिन बार-बार सामने आ रही नई खामियों से मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद 15 साल तक इसकी देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी पीएनसी की है। अधिकारियों के मुताबिक, यातायात प्रभावित होने की स्थिति में जिम्मेदारों से जवाब लिया जाएगा। मरम्मत पूरी होने और भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन तक जनता से टोल नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में गुजरने वाले वाहनों का टोल निर्माण एजेंसी से वसूला जाएगा।
आधी सड़क तक पहुंची जेसीबी, संकेतक भी नाकाफी
लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए पीएनसी ने कई स्थानों पर जेसीबी लगाई है। किलोमीटर 54.5 पर तौरा गांव के पास सड़क के एक बड़े हिस्से में मशीनें लगी होने के बावजूद वाहन जोखिम के बीच गुजरते नजर आए। काम के दौरान पर्याप्त संकेतक नहीं लगाए जाने से हादसे का खतरा बना रहा। हालांकि, इस दौरान कोई दुर्घटना नहीं हुई।
पीएनसी का दावा- कटान से धंसी मिट्टी, सड़क को खतरा नहीं
पीएनसी के अधिकारियों के मुताबिक, आटा बंथर के पास बारिश के कारण मिट्टी का कटान हुआ है। अंडरपास होने की वजह से वहां बीम वॉल मौजूद है, इसलिए सड़क को तत्काल कोई खतरा नहीं है। जानकारी मिलते ही मरम्मत शुरू करा दी गई है। सड़क पर जहां भी व्हील ट्रैक बने हैं, वहां सुधार कराया जा रहा है। साइड रोड दबने या सेफ्टी वॉल में किसी तरह की समस्या होने पर उसे भी ठीक किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि ज्यादातर मरम्मत का काम पूरा हो चुका है और ड्रेनेज सिस्टम को भी दुरुस्त किया जा रहा है।

क्या इतना घटिया एवं निम्नतम दर्जे का एक्सप्रेस वे बनाने वाले पीएनसी इंफ्राटेक के कर्ताधर्ताओं को सरकार द्वारा मुकदमा दर्ज कराकर अरेस्ट नहीं किया जाना चाहिये? एक दो जगह सड़क धंसने की घटना को तो दरकिनार किया जा सकता है, लेकिन रिटेनिंग वॉल का धंस जाना इस प्रोजेक्ट में हुए भ्रष्टाचार, लापरवाही एवं मनमानेपन का सहज प्रमाण है. यह किस तरह की घटिया इंजीनियरिंग है कि पूरा का पूरा एक्सप्रेस वे ही धंस और टूट रहा है?
पीएनसी के जिम्मेदार लोगों के साथ एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर एवं अन्य जिम्मेदारों पर भी तत्काल मुकदमा दर्ज कर अरेस्ट किया जाना चाहिये! PNC Infra को इतना घटिया निर्माण एवं भ्रष्टाचार करने के लिये ब्लैक लिस्टेड करते हुए देश में कहीं भी कोई प्रोजेक्ट नहीं मिले, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये. क्या पीएनसी इंफ्रा के प्रमोटरों की नजर आम इंसान की कोई कीमत है कि नहीं, जो लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे का इतना घटिया निर्माण किया?
-अनिल कुमार, वरिष्ठ पत्रकार


