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सियासत

बंगाल के नंदीग्राम में जो हुआ, वह चुनावी लूट का ऐसा खुला खेल है, जिसमें कोई पर्दा नहीं रह गया है!

Breaking news headline in Hindi above a photo of three people sitting around a conference table in a formal office setting with wood paneling and a portrait on the wall (video thumbnail).

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव से पहले शुक्रवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद मिलन प्रधान को पुलिस ने 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक उनके खिलाफ पुराने मामलों में गिरफ्तारी वारंट था।

गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस और ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए लोकतंत्र पर हमला करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि नंदीग्राम उपचुनाव से पहले उसके उम्मीदवार को पुराने मामले में अचानक गिरफ्तार किया गया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने बीजेपी पर निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी चुनावी मुकाबले को खत्म करना चाहती है।

कांग्रेस ने भी एक्स पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि पहले ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार को नामांकन वापस लेने के लिए डराया-धमकाया गया और इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार को 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इन आरोपों पर बीजेपी ने कहा है कि पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की है और गिरफ्तारी का राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी विपक्ष से डर गई है।

ममता बनर्जी ने भी गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा के कुछ ही मिनट बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी के ‘पुराना केस निकालने’ वाले फॉर्मूले के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी पर भी गंभीर आरोप लगाए।

नंदीग्राम उपचुनाव का यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों को लेकर चुनाव आयोग ने भी बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पुराने ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने और इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के फैसले ने मुकाबले का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। इसके तुरंत बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ा दिया है।


नंदीग्राम में जो हुआ, वह चुनावी लूट का ऐसा खुला खेल है, जिसमें कोई पर्दा नहीं रह गया है।
तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता डे ने बीजेपी के सीएम से मुलाकात की और नामांकन वापस ले लिया।
इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन का ऐलान कर द‍िया
ऐलान होते ही मिलन प्रधान को भी एक पुराने केस में गि‍रफ्तार कर ल‍िया गया।
नेता खरीदे जाएंगे। उम्मीदवार खरीदे जाएंगे। पार्टी खरीदी जाएगी। चुनाव खरीदा जाएगा। विधायक खरीदे जाएंगे। सांसद खरीदे जाएंगे। आयोग खरीदा जाएगा। पूरा तंत्र खरीदा जाएगा।
विडंबना तो ये है कि यह सब उसी जनता के पैसे से हो रहा है, जो इस लोकतंत्र और इस देश की मालिक है। जनता का धन, जनता का लोकतंत्र, जनता के ही खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है।
यही नरेंद्र मोदी के सपनों का लोकतंत्र है।
-कृष्णकांत

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