आदर्श सिंह-
आज लखनऊ में मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारिता के नाम पर ड्रामा हुआ वो सही है?
किसी के प्रायोजित एजेंडे के तहत उठकर चिल्लाना, चिल्लाने और नाटक का वीडियो बन जाने के बाद फिर रिएक्शन देना कि “मेरा काम हो गया” और कैमरा चलता देख फिर से चिल्लाना ये पत्रकारिता है?
मैंने दुर्भाग्यवश मोहतरमा की पूरी प्रोफाइल देखी तब जाकर समझ आया कि असल में आज जो हुआ वो पत्रकारिता नहीं बल्कि किसी “राजकुमार” के इशारे पर और किसी के निशाने पर की जाने वाली शुद्ध रूप से ठेकेदारी थी।
क्योंकि करीब 24 घंटे पहले इस विषय पर पहले से वीडियो पोस्ट किया गया था मतलब मामला पहले से प्रायोजित था?
और हाँ जो लोग वीडियो शेयर कर रहे हैं जरा एक बार इनसे पूछें तो कि आखिर सवाल था क्या? सिर्फ जवाब चाहिए था लेकिन सवाल तो पूछा ही नहीं।
और अंत में यूपी बीजेपी की मीडिया टीम को बधाई, आपने बेहद सफल आयोजन कराया, भीड़ दिखाने के लिए ABCD जहां से जो मिला सबको बुलाया और बैठाया, अंत में नतीजा आपके सामने है।
देवकी नंदन मिश्रा-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और BJP राज्य प्रमुख पंकज चौधरी की पत्रकार वार्ता BJP मुख्यालय में थी। प्रेस कान्फ्रेंस का मुद्दा ग़ायब हो गया और एक तथाकथित पत्रकार का “सवाल का जवाब देते जाइये CM साहब” कहना सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। मैंने इसके फ़ैक्ट पर वीडियो बनाया तो कई ने कमेंट में मुझे चाटुकार कह दिया। कोई बात नहीं लेकिन सच सबको जानना चाहिये फिर कमेंट करना होता है। घटनाक्रम रखता हूँ…
प्रेस कान्फ्रेंस में सबसे पहले पंकज चौधरी जी बोलते हैं उसके बाद CM योगी जी का नंबर आता है। वह अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं और धन्यवाद देकर उठ जाते हैं। किसी पत्रकार ने सवाल नहीं किया। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि सवाल नहीं होना चाहिये? पत्रकार का काम है सवाल पूछना लेकिन कोई बताये कि मोहतरमा पत्रकार ने सवाल क्या पूछा? वह तो सिर्फ यही कहती रहीं कि हमारे सवाल का जवाब देते जाइये योगी जी CM साहब। मुझे तो इसमें कोई सवाल नज़र नहीं आया। अरे मैडम सवाल तो पूछी होती। मुझे किसी ने बताया कि यह रील बनाकर फेमस होने के लिये यहाँ आई थीं और हो भी गईं। उनका काम तो हो गया लेकिन पत्रकार बिरादरी तो अनायास ही बदनाम हो गई।
पत्रकार संगठनों को इस तरह के लोगों पर नज़र रखकर रोक लगानी चाहिये। मैडम पत्रकार को यह खुलासा करना चाहिये कि वह किस मीडिया/सोशल मीडिया संस्थान के लिये काम करतीं थीं। कहीं मैंने सुना बोल रहीं थी नौकरी चली गई। लेकिन पहले यह तो पता चले कि उनके संस्थान का नाम क्या है?
आज की इस घटना के बाद अब जब BJP दफ्तर में पत्रकार वार्ता होगी तो कड़ी पड़ताल के बाद ही किसी को भीतर आने दिया जायेगा। CM के यहाँ तो और कड़ा पहरा होगा। इससे नुक़सान उनका होगा जो लोग वाक़ई पत्रकार हैं इनकी तरह नहीं जो किसी भी तरह फ़ेमस होना चाहती थीं। सपा दफ़्तर में भी पत्रकारों पर बंदिश लगेगी।
इन्हीं ग़लत हरकतों की वजह से पत्रकार सरकार और सत्ता से दूर कर दिये जा रहे। एक समय था जब मैं गृह विभाग देखता रोज़ प्रमुख सचिव गृह शाम को पाँच बजे पत्रकार वार्ता करते थे। जिसमें पुलिस विभाग के एक अफ़सर भी होते थे। अब तो सरकार किसी घटना के बारे में क्या सोचती है पता ही नहीं चलता। इसके लिये सरकार के नुमाइन्दे तो जिम्मेदार हैं ही लेकिन पत्रकार उनसे भी ज़्यादा। एक वक़्त आयेगा नेता LIVE बोल देंगे आप उनको सामने से देख भी नहीं पायेंगे।


