दूरदर्शन का मुफ़्त डीटीएच प्लेटफ़ॉर्म डीडी फ्री डिश, जिसके एक स्लॉट के लिए कभी न्यूज़ चैनल 20 करोड़ रुपये से ऊपर तक की बोली लगा देते थे, अब घटती वसूली और खाली स्लॉट से जूझ रहा है। प्रसार भारती जनवरी 2027 में होने वाली सालाना बोली से पहले नीलामी के तरीके में बदलाव पर विचार कर रहा है। कोई भी फ़ैसला बाज़ार के आकलन और उद्योग से बातचीत के बाद होगा।
रिपोर्ट के अनुसार FY2024-25 में 64 स्लॉट से करीब 1,157 करोड़ रुपये आए थे, जो अब तक का शिखर है। 2025 की नीलामी में यह रकम उद्योग के अनुमान से करीब 780 करोड़ रह गई, और FY2026-27 की आठवीं सालाना नीलामी में 55 स्लॉट से लगभग 642 करोड़ रुपये ही मिले — पिछली बार से 17.7% कम और शिखर से करीब 44% नीचे। बीच साल में खाली हुए स्लॉट भरने के लिए मई और जुलाई 2026 में अलग से ई-नीलामियां करनी पड़ीं।
हिंदी न्यूज़ चैनलों का जोश भी ठंडा पड़ा है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में हिंदी न्यूज़ स्लॉट की विजेता बोलियां करीब 13.4 से 14.4 करोड़ रुपये के बीच रहीं, जबकि उससे एक साल पहले ये 17 से 18.5 करोड़ रुपये तक थीं।
गिरावट की कोई एक वजह नहीं बताई गई है। प्रसार भारती के एक वरिष्ठ अधिकारी ने लीनियर टीवी की ढलान, केबल-कटिंग और ब्रॉडकास्टरों पर बढ़ते दबाव का ज़िक्र किया, और माना कि पिछले कई महीनों से टीवी रेटिंग रोके जाने का भी असर पड़ा है। एक स्वतंत्र ब्रॉडकास्टर के अधिकारी का कहना है कि छोटे चैनल इसी व्यवस्था में बड़े नेटवर्कों से मुकाबला नहीं कर पाते, और बीच साल प्लेटफ़ॉर्म छोड़ने पर रिफंड या समायोजन के साफ़ नियम होने चाहिए।
प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी पिछले साल इस गिरावट को चुनावी सालों की असामान्य उछाल के बाद की “सामान्य स्थिति में वापसी” बता चुके हैं। ब्रॉडकास्टरों के संगठन IBDF ने मांग रखी है कि हर दौर के बाद नीलाम हुए कुल स्लॉट, बिना बिके स्लॉट और बकेट-वार आवेदकों का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में फ्री डिश करीब 4.9 करोड़ घरों तक पहुंचता था। सवाल यही है कि नए नियम बड़े नेटवर्कों की सुविधा देखेंगे या उन छोटे न्यूज़ चैनलों की, जिनके लिए इतनी बड़ी पहुंच का यह सबसे अहम रास्ता है।


