वाराणसी में दयाल होटल के ध्वस्तीकरण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीन के मालिकाना हक, कानून के दोहरे मापदंड और सत्ता के गलियारों में चल रहे कथित खेल पर सवाल खड़े कर रहा है। जिस थियोसोफिकल सोसायटी की जमीन पर बने दयाल होटल को गिराने की तैयारी है, उसी खसरा संख्या की जमीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन से जुड़ा रोपवे भी बन रहा है। होटल मालिक राजेश सिंह का दावा है कि हाईकोर्ट से ध्वस्तीकरण पर रोक के बावजूद 16 अक्टूबर को प्रशासन कार्रवाई की तैयारी के साथ पहुंच गया। अदालत के आदेश की प्रति दिखाए जाने के बाद उसे लौटना पड़ा। सवाल है कि अगर जमीन के स्वामित्व पर विवाद है, तो उसी जमीन पर बन रहे रोपवे के मामले में नियमों का हिसाब क्या है? एक ही जमीन पर होटल के लिए बुलडोजर और रोपवे के लिए रास्ता—आखिर इस विरोधाभास की वजह क्या है?
अभिषेक उपाध्याय-
वाराणसी में प्रधानमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम वाला रोपवे, दयाल होटल और ध्वस्तीकरण का ऑर्डर।
वाराणसी में थियोसोफिकल सोसायटी की लीज़ वाली ज़मीन पर बन रहे दयाल होटल के ध्वस्तीकरण आदेश का मामला दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के प्रति अनन्य श्रद्धा रखने वाले दयाल होटल के मालिक राजेश सिंह के होश फाख्ता हैं।
ये मामला विचित्र इसलिए हो गया है क्योंकि थियोसोफिकल सोसायटी की जिस ज़मीन पर ये होटल बन रहा है, उसी ज़मीन पर वो रोपवे भी बन रहा है, जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री मोदी को करना है।
वाराणसी प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण के आदेश के पीछे की बड़ी वजह इस सोसायटी की ज़मीन के स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है।
ऐसे में सवाल है कि फिर सरकार ने कैसे इसी खसरा संख्या की ज़मीन को रोपवे के लिए अधिग्रहित कर लिया। जब ज़मीन विवादित है तो फिर इस पर बना रोपवे भी विवादित हुआ?
सवाल उठ रहे हैं कि जब एक ही खसरा नंबर, एक ही भू-स्वामी संस्था, फिर दो अलग अलग कानून क्यों?
प्रशासन इस होटल को ध्वस्त करने के लिए इस कदर बेचैन है कि कल यानि 16 अक्टूबर को ध्वस्तीकरण की तैयारियों के साथ वो इस कैंपस में पहुंच गया, जबकि हाईकोर्ट इस ध्वस्तीकरण के खिलाफ स्टे दे चुका है।
ध्वस्तीकरण के खिलाफ स्टे का आदेश दिखाए जाने के बाद प्रशासन को बैरंग वापिस लौटना पड़ा।
इस बीच उस रेवेन्यू बोर्ड में कुछ सदस्यों के ट्रांसफर का मामला भी प्रकाश में आया है जहां इस विवाद की सुनवाई चल रही है।
आरोप है कि थियोसोफिकल सोसायटी के पक्ष में आदेश देने वाले सदस्यों के धड़ाधड़ तबादले किए जा रहे हैं।
कथा का सार ये है कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले दयाल होटल के मालिक राजेश सिंह बुरी तरह से प्रशासन के निशाने पर हैं।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कुछ ही वक्त पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय में जाकर वहां जारी अव्यवस्थाओं के पहाड़ को आइना दिखाया था। यहां तक कह दिया था कि जब सीएम सिटी में इतनी कमियां और भ्रष्टाचार है तो और जगहों का क्या होगा?
राजनीति संयोगों और प्रयोगों का अभूतपूर्व मिश्रण होती है। कभी कभी कंधे अलग होते हैं और निशाना अलग! बाकी समझदार को इशारा ही काफी है!!



