नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को निशाना बनाने और उनके काम में बाधा डालने को लेकर News Pinch के पत्रकार अभिनव पांडे ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को गुंडों के रूप में भेजकर उन्हें आम प्रदर्शनकारी के तौर पर पेश किया जाता है। इसके जरिए जनता के बीच यह धारणा बनाने की कोशिश होती है कि प्रदर्शनकारी ही पत्रकारों को काम नहीं करने दे रहे हैं।
अभिनव पांडे ने अपने ट्वीट में लिखा, “नई स्क्रिप्ट आई है मार्केट में, मगर ये खेल भी ज़्यादा नहीं चलेगा। गुंडों को प्रोटेस्ट में भेजकर खुद को प्रदर्शनकारी बताते हैं और पत्रकारों को काम करने से रोकते हैं। और पब्लिक में माहौल बनाते हैं कि देखो आम लोग ऐसा कर रहे हैं। ये चाल भी नहीं चलेगी। सच को परेशान कर सकते हो, मगर दबा नहीं सकते।”
अभिनव पांडे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें काम करने से रोकने की घटनाएं चर्चा में हैं। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। News Pinch ने भी अपने वीडियो और रिपोर्टों में प्रदर्शन स्थल पर पत्रकारों को घेरने, उनके साथ बदसलूकी करने और उनकी रिपोर्टिंग में बाधा डालने के आरोपों को उठाया है।
अभिनव पांडे के ट्वीट का मूल सवाल यह है कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के काम में बाधा डालने वाले लोगों को जानबूझकर प्रदर्शनकारी के रूप में पेश किया जा रहा है, तो इससे न केवल पत्रकारों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित होती है, बल्कि पूरे आंदोलन को लेकर जनता की धारणा भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, प्रदर्शन में लोगों को योजनाबद्ध तरीके से भेजे जाने के उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह सवाल जांच और प्रमाण का विषय है कि पत्रकारों को रोकने वाली घटनाएं स्वतःस्फूर्त थीं या इनके पीछे कोई संगठित रणनीति थी।
अभिनव पांडे ने अपने ट्वीट के अंत में साफ संदेश दिया कि पत्रकारों को परेशान करके सच को सामने आने से नहीं रोका जा सकता। उनका बयान एक बार फिर इस बहस को सामने लाता है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।
नई स्क्रिप्ट आई है मार्केट में, मगर ये खेल भी ज़्यादा नहीं चलेगा। गुंडों को प्रोटेस्ट में भेजकर खुद को प्रदर्शनकारी बताते हैं और पत्रकारों को काम करने से रोकते हैं। और पब्लिक में माहौल बनाते हैं कि देखो आम लोग ऐसा कर रहे हैं। ये चाल भी नहीं चलेगी
सच को परेशान कर सकते हो, मगर दबा नहीं सकते।
-अभिनव पांडे, न्यूज पिंच

