लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से जुड़ी एक खबर को लेकर ABP नेटवर्क को सफाई देनी पड़ी है। नेटवर्क ने स्वीकार किया है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित खबर तथ्यों के आधार पर गलत थी। इसके लिए ABP News ने खेद जताते हुए माफी मांगी है। इससे पहले नेहा सिंह राठौर ने खबर पर कड़ी आपत्ति जताते हुए चैनल पर उन्हें अपमानित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
ABP News के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी स्पष्टीकरण में कहा गया, ”ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक ख़बर प्रसारित की गई, जो तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई। इस त्रुटिपूर्ण प्रसारण के लिए हमें खेद है, हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।”
दरअसल, इस खबर को लेकर नेहा सिंह राठौर ने ABP News पर गंभीर आरोप लगाए थे। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा था कि चैनल उन्हें ‘वेश्या और कॉल गर्ल’ बताना चाहता है। उन्होंने इस खबर को अपने अपमान की कोशिश बताते हुए नाराजगी जताई थी।
नेहा सिंह राठौर ने अपने पोस्ट में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी टैग किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिला आयोग इस मामले पर ध्यान नहीं देगा। नेहा ने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने के कारण उन्हें इस तरह अपमानित करने की कोशिश की जा रही है।
अब ABP नेटवर्क की ओर से खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत मानते हुए माफी मांगे जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, नेटवर्क के स्पष्टीकरण में खबर की विशिष्ट त्रुटियों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

एबीपी न्यूज़ को मैं दूसरे चैनलों से कुछ अलग समझता आया हूँ। शाज़ी ज़माँ और मिलिंद खांडेकर का ज़माना भले चला गया, दिबांग भी अब वहाँ नहीं, फिर भी बुलंद ऐंकर संदीप चौधरी या रोमाना इसरार ख़ान, प्रतिमा मिश्रा जैसी आवाज़ों ने चैनल की ठसक बनाए रखी है।
लेकिन एबीपी नैटवर्क में जुझारू गायिका नेहा सिंह राठौर को बदनाम करने वाली झूठी ख़बर — जो उनके पोर्टल यानी डिज़िटल माध्यम पर चली — ने एबीपी न्यूज़ नैटवर्क की विश्वसनीयता को कटघरे में ला खड़ा किया है। एबीपी ने माफ़ी माँग ली। नेहा ने माफ़ी नहीं दी है। देनी भी नहीं चाहिए। यह कोई चूक नहीं थी। सरासर आपराधिक कृत्य था।
माफ़ी की याचना के साथ एबीपी वालों को ख़बर लिखने और चलाने वाले पत्रकारों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए थी। मैं कभी किसी का रोज़गार छीनने के पक्ष में नहीं रहा। लेकिन चंडीगढ़ में एक उप-संपादक को (उन दिनों वेजबोर्ड की पक्की नौकरी हुआ करती थी) पहले मुअत्तल किया, फिर बाहरी लम्बी इंक्वायरी के बाद बर्ख़ास्त कर दिया था। मामला भ्रष्ट आचरण का था।
नेहा प्रतिभावान हैं, प्रसिद्ध हैं, बहादुर हैं। उनकी हिम्मत तोड़ने को दूर-दूर मुक़दमे हुए। राजद्रोह तक का मुक़दमा दायर किया गया। इस सिलसिले को देखते हुए मुमकिन है कि निडर गायिका को बदनाम करने के लिए कोई क्षुद्र चाल चली गई हो।
लेकिन मीडिया उसका हथियार क्यों बने। ख़बर का पहला क़ायदा है, तथ्यों की पड़ताल। दूसरे पक्ष से बात करते ही कल्पित बातें खुल जाती हैं। सचाई हो तब भी दूसरे पक्ष का कथन ख़बर का हिस्सा होता है। नेहा से बात ही नहीं की गई, इसी से साफ़ है कि ख़बर लिखने-प्रसारित करने वाले पत्रकारों की नीयत में खोट थी — या वे ज़िम्मेदारी के निर्वाह को सर्वथा अयोग्य हैं।
नेहा अदालत में जा रही हैं। वे समझौते वाली शख़्सियत नहीं। उम्मीद है उन्हें न्याय मिलेगा और कीचड़उछाल मीडियाकर्मियों को सबक़ भी।
-ओम थानवी (वरिष्ठ पत्रकार)

